महादेवी वर्मा — जाग तुझको दूर जाना – Class 11 Hindi Chapter 13 Notes & NCERT PDF
Notes and a simple summary of Chapter 13 of the NCERT Class 11 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.
🎧 Listen to the content
पाठ 13: महादेवी वर्मा — जाग तुझको दूर जाना
कवयित्री-परिचय
महादेवी वर्मा (1907–1987) का जन्म फ़र्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ और प्रारंभिक शिक्षा इंदौर में हुई। बहुत छोटी उम्र में ही उनका विवाह हो गया था। प्रयाग विश्वविद्यालय से उन्होंने संस्कृत में एम.ए. किया और फिर प्रयाग महिला विद्यापीठ में नियुक्त हुईं, जहाँ वे लंबे समय तक प्राचार्य रहीं।
कविता का परिचय
पाठ्यपुस्तक में संकलित गीत 'जाग तुझको दूर जाना' स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचित एक जागरण-गीत है। इसमें कवयित्री भीषण कठिनाइयों की चिंता न करते हुए, कोमल बंधनों के आकर्षण से मुक्त होकर लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ने का आह्वान करती हैं। मोह-माया के बंधन में जकड़े मनुष्य को वे जगाती हैं।
कविता-सार और भावार्थ
पहला बंद — विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ो
चिर सजग आँखें उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना!
जाग तुझको दूर जाना!
जो आँखें सदा सजग रहती थीं, वे आज नींद से भरी हैं और वेश अस्त-व्यस्त है। कवयित्री कहती हैं — जागो, तुम्हें बहुत दूर जाना है।
अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कंप हो ले,
या प्रलय के आँसुओं में मौन अलसित व्योम रो ले;
आज पी आलोक को डोले तिमिर की घोर छाया,
जागकर विद्युत-शिखाओं में निठुर तूफ़ान बोले!
पर तुझे है नाश-पथ पर चिह्न अपने छोड़ आना!
चाहे अचल हिमालय काँप उठे, आकाश प्रलय के आँसू बहाए, घोर अंधकार प्रकाश को निगल ले या बिजली की चमक के साथ तूफ़ान गरजे — तुम्हें इस विनाश के पथ पर भी अपने पदचिह्न छोड़ते हुए आगे बढ़ना है।
दूसरा बंद — कोमल बंधनों में मत उलझो
बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले?
पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले?
मोम के सजीले बंधन (सुख-सुविधा, मोह), तितलियों के रंगीले पर (सांसारिक आकर्षण), भौंरे की मधुर गुनगुन और ओस-भीगी फूल की पंखुड़ियाँ — क्या ये तुम्हें रोक लेंगे? क्या इनमें डूबकर तुम संसार का क्रंदन भूल जाओगे?
तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना!
अपनी ही छाया (अपने मोह, अपनी सीमाओं) को अपने लिए कारा (कैद) मत बना लेना।
तीसरा बंद — अमरता का पुत्र मृत्यु को क्यों चाहे?
वज्र का उर एक छोटे अश्रु-कण में धो गलाया,
दे किसे जीवन-सुधा दो घूँट मदिरा माँग लाया?
वज्र-सा कठोर हृदय एक छोटे आँसू में गल गया; अमृत-सा जीवन देकर बदले में दो घूँट मदिरा (क्षणिक सुख) ले आए? क्या मलय पवन का तकिया लेकर आँधी सो गई? क्या संसार का शाप चिर-निद्रा बनकर पास आ गया?
अमरता-सुत चाहता क्यों मृत्यु को उर में बसाना?
तुम अमरता के पुत्र हो, फिर मृत्यु (जड़ता, निराशा) को हृदय में क्यों बसाना चाहते हो?
चौथा बंद — संघर्ष में ही सार्थकता
कह न ठंडी साँस में अब भूल वह जलती कहानी,
आग हो उर में तभी दृग में सजेगा आज पानी;
हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका,
राख क्षणिक पतंग की है अमर दीपक की निशानी!
है तुझे अंगार-शय्या पर मृदुल कलियाँ बिछाना!
ठंडी साँस भरकर अपनी जलती कहानी (संघर्ष) को मत भूलो। हृदय में आग (उत्साह, संकल्प) होगी तभी आँखों में करुणा का पानी सजेगा। संघर्ष में मिली हार भी जय की पताका बन जाएगी — जैसे दीपक पर जल मरने वाले पतंगे की राख दीपक के अमर होने की निशानी है। तुम्हें अंगारों की शय्या पर कोमल कलियाँ बिछानी हैं — अर्थात् कष्टों के बीच भी सृजन और कोमलता बनाए रखनी है।
शब्दार्थ
काव्य-सौंदर्य
केन्द्रीय भाव
कवयित्री मनुष्य को मोह-माया और आलस्य त्यागकर स्वाधीनता के कठिन मार्ग पर दृढ़ता से बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। प्रकृति का प्रलय हो या सुख के कोमल बंधन — किसी को भी लक्ष्य में बाधा न बनने दें। संघर्ष में मिली हार भी सम्मान की जीत है। वे मनुष्य में साहस, दृढ़ संकल्प, त्याग, आत्मबल और करुणा — इन गुणों का विस्तार चाहती हैं।
परीक्षा हेतु (प्रश्न-अभ्यास पर आधारित)
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचित जागरण-गीत की मूल संवेदना समझना
- ✓विपरीत प्राकृतिक परिस्थितियों और कोमल मोह-बंधनों के प्रतीकों को पहचानना
- ✓टेक 'जाग तुझको दूर जाना!' की भूमिका और गीति-शैली समझना
- ✓छायावादी लाक्षणिकता, मानवीकरण और विरोधाभास का विश्लेषण करना
- ✓महादेवी वर्मा के जीवन, कृतियों और सम्मानों की जानकारी प्राप्त करना
👨🏫 Teaching Tips
- →गीत का सस्वर पाठ कराएँ और टेक पर पूरी कक्षा से समूह-गान करवाएँ।
- →बोर्ड पर दो स्तंभ बनाएँ — 'विपरीत परिस्थितियाँ' और 'कोमल बंधन' — छात्रों से पंक्तियाँ छाँटकर भरवाएँ।
- →प्रतीकों (मोम, तितली, छाँह, अंगार-शय्या) के अर्थ पर जोड़ी-चर्चा कराएँ।
- →स्वाधीनता आंदोलन के अन्य जागरण-गीतों का संकलन (योग्यता-विस्तार) कराएँ।
- →'हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका' पर छोटी वाद-विवाद गतिविधि रखें।
- →महादेवी वर्मा के गद्य (रेखाचित्र) का एक अंश पढ़कर उनके व्यक्तित्व से परिचय कराएँ।
📋 Assessment Questions
- कवयित्री मानव को किन विपरीत स्थितियों में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित करती हैं?
- 'मोम के बंधन सजीले' और 'तितलियों के पर रंगीले' किसके प्रतीक हैं?
- 'तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना' का आशय स्पष्ट कीजिए।
- कविता के आधार पर मनुष्य में किन गुणों का विस्तार अपेक्षित है?
Ask the AI tutor about Class 11 Hindi Chapter 13
Get question answers, important questions, a quick MCQ quiz or a simple explanation of “महादेवी वर्मा — जाग तुझको दूर जाना”. Free — sign in with Google.
- Explain महादेवी वर्मा — जाग तुझको दूर जाना in simple words
- Answer the NCERT exercise questions of Class 11 Hindi Chapter 13 step by step
- Give me 5 important questions with answers from महादेवी वर्मा — जाग तुझको दूर जाना
- Quiz me with 5 MCQs on महादेवी वर्मा — जाग तुझको दूर जाना
- Make last-minute revision notes for Class 11 Hindi Chapter 13
- Explain महादेवी वर्मा — जाग तुझको दूर जाना with an everyday example
👩🏫 Class 11 Hindi classes near you — online or at home
Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.
- Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
- Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
- At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.
Keep learning
- Maharashtra Board Class 11 SolutionsState board textbook solutions
- TalentJR FlashcardsQuick revision cards
- Coding for KidsLearn to code with TalentJR
All chapters in अंतरा भाग 1 (Antra) - Hindi Class 11
- 1. ईदगाह
- 2. दोपहर का भोजन
- 3. टॉर्च बेचनेवाले
- 4. गूँगे
- 5. ज्योतिबा फुले
- 6. खानाबदोश
- 7. उसकी माँ
- 8. भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?
- 9. कबीर — अरे इन दोहुन राह न पाई; बालम, आवो हमारे गेह रे
- 10. सूरदास — खेलन में को काको गुसैयाँ; मुरली तऊ गुपालहिं भावति
- 11. देव — हँसी की चोट; सपना; दरबार
- 12. सुमित्रानंदन पंत — संध्या के बाद
- 13. महादेवी वर्मा — जाग तुझको दूर जाना
- 14. नागार्जुन — बादल को घिरते देखा है
- 15. श्रीकांत वर्मा — हस्तक्षेप
- 16. सुदामा पांडेय 'धूमिल' — घर में वापसी