TalentJR

फूल और काँटा – Class 7 Hindi Chapter 3 Notes & NCERT PDF

Class 7HindiChapter 3NCERT book: मल्हार (Malhar) - Hindi Class 7

Notes and a simple summary of Chapter 3 of the NCERT Class 7 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

🎧 Listen to the content

पाठ 3: फूल और काँटा

पाठ-परिचय

फूल और काँटा कविता अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) की रचना है। इसमें फूल और काँटे को प्रतीक बनाकर बताया गया है कि एक ही परिवार या परिवेश में जन्म लेने पर भी लोगों का स्वभाव अलग-अलग हो सकता है, और सम्मान कुल से नहीं, अपने गुणों और कर्मों से मिलता है।

कवि-परिचय: ‘उठो लाल, अब आँखें खोलो। पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।’ — यह प्रसिद्ध बाल-कविता भी हरिऔध जी की है। उनका जन्म आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उनकी काव्य-कृति प्रियप्रवास को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। बच्चों के लिए उनके कविता-संकलन चंद्र-खिलौना और खेल-तमाशा उल्लेखनीय हैं।

पाठ-सार (पद-दर-पद)

पद 1 — एक-सी परिस्थितियाँ

“हैं जनम लेते जगह में एक ही,
एक ही पौधा उन्हें है पालता।
रात में उन पर चमकता चाँद भी,
एक ही सी चाँदनी है डालता।”

फूल और काँटा एक ही जगह, एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं; चाँद दोनों पर एक-सी चाँदनी डालता है।

पद 2 — फिर भी ढंग अलग

“मेह उन पर है बरसता एक सा,
एक सी उन पर हवायें हैं बही।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।”

वर्षा और हवा भी दोनों को बराबर मिलती है, फिर भी दोनों के स्वभाव (ढंग) अलग होते हैं।

पद 3 — काँटे का स्वभाव

काँटा किसी की उँगलियाँ छेद देता है, किसी के सुंदर वस्त्र (वर बसन) फाड़ देता है, प्यार में डूबी तितलियों के पंख काट देता है और भौंरे का काला शरीर (श्याम तन) बेध देता है। वह दूसरों को केवल पीड़ा देता है।

पद 4 — फूल का स्वभाव

फूल तितलियों को गोद में ले लेता है, भौंरे को अपना अनूठा रस पिलाता है, और अपनी सुगंध व निराले रंग से कली का जी (मन) खिला देता है। वह सबको आनंद देता है।

पद 5 — निष्कर्ष

“है खटकता एक सब की आँख में,
दूसरा है सोहता सुर शीश पर।
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे,
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।”

काँटा सबकी आँख में खटकता है (सबको बुरा लगता है), जबकि फूल देवताओं के सिर पर शोभा पाता है। यदि किसी में बड़प्पन (महानता) की कमी हो, तो ऊँचे कुल की बड़ाई उसके किस काम आएगी? अर्थात् व्यक्ति अपने कर्मों से बड़ा बनता है, कुल से नहीं।

शब्दार्थ

  • मेह — बादल, वर्षा
  • वर बसन — सुंदर/श्रेष्ठ वस्त्र
  • पर कतरना — पंख काटना
  • भौंर — भौंरा
  • बेध देना — छेद देना
  • श्याम तन — काला शरीर
  • अनूठा — अनोखा
  • निज — अपना; औ — और (लय के लिए ‘र’ छोड़ा गया)
  • आँख में खटकना — बुरा लगना (मुहावरा)
  • सोहना — शोभा देना
  • सुर शीश — देवताओं का सिर
  • कुल — वंश, परिवार
  • बड़ाई — प्रशंसा, महिमा
  • बड़प्पन — बड़ा होने का भाव, महानता (बड़ा + पन)
  • कसर — कमी
  • भाषा-बिन्दु

    कविता की विशेषताएँ

  • प्रतीक — फूल अच्छाई, दया, कोमलता, प्रेम, परोपकार का; काँटा बुराई, कठोरता, पीड़ा, स्वार्थ का प्रतीक।
  • मानवीकरण — “फूल लेकर तितलियों को गोद में” — फूल को मनुष्य की तरह कार्य करते दिखाया गया है।
  • मुहावरे — आँख में खटकना, जी खिलाना।
  • प्रश्न — “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे?”
  • विरोधी भाव — ‘खटकता’ बनाम ‘सोहता’।
  • तुकांत — हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती ध्वनि वाला (पालता/डालता, बही/नहीं)।
  • शब्द-संक्षेप — ‘और’ को औ, ‘प्यार में डूबी’ को प्यार-डूबी लिखा गया।
  • विशेषण और विशेष्य

    ‘श्याम तन’ में ‘श्याम’ विशेषण है (विशेषता बताता है) और ‘तन’ विशेष्य है (जिसकी विशेषता बताई गई)। इसी तरह— वर बसन, अनूठा रस, निराले रंग।

    पर्यायवाची (कविता का सौंदर्य)

  • रात — रात्रि, रजनी, निशा
  • चाँद — शशि, चंद्रमा, राकेश, इंदु
  • मेह — बादल, मेघ, जलद
  • हवा — वायु, पवन, समीर, मारुत, बयार
  • केन्द्रीय भाव / सीख

    एक जैसी परिस्थितियाँ मिलने पर भी हर व्यक्ति का स्वभाव उसके अपने चुनाव से बनता है। सम्मान गुणों, स्वभाव और कर्मों से मिलता है — दूसरों को सुख देने वाला ‘फूल’ सबका प्रिय बनता है, दुख देने वाला ‘काँटा’ सबको खटकता है।

    अभ्यास-संकेत

  • समानताएँ: एक ही जगह जन्म, एक ही पौधा, एक-सी चाँदनी, वर्षा और हवा।
  • बड़प्पन के भाव वाले शब्द: दया, सहनशीलता, संतोष, उदारता, विनम्रता, त्याग, परोपकार, सम्मान; नहीं: घमंड, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, लालच, स्वार्थ, क्रूरता।
  • आज की पहेली: फूल और काँटे वाले पौधे — बबूल, गुलाब, नागफनी, बेर, करौंदा, नींबू।
  • वाद-विवाद विषय: ‘जीवन में फूल और काँटे, दोनों की आवश्यकता होती है।’
  • सामान्य भूलें

  • ‘सुर शीश’ को ‘सुरीला’ समझना — सुर = देवता, शीश = सिर।
  • ‘कली जी क/का खिला’ का अर्थ ‘कली खिलना’ मात्र लिखना — अर्थ है मन प्रसन्न कर देना।
  • यह निष्कर्ष लिखना कि अच्छे कुल से ही सम्मान मिलता है — कविता इसका उल्टा कहती है।
  • ‘औ’ को गलत वर्तनी मानना — यह कविता में ‘और’ का लय-रूप है।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓फूल और काँटा एक ही पौधे पर, एक-सी चाँदनी, वर्षा और हवा पाकर भी अलग स्वभाव के होते हैं
    • ✓काँटा उँगलियाँ छेदता, वस्त्र फाड़ता, तितली के पंख काटता है; फूल तितली को गोद में लेता और भौंरे को रस पिलाता है
    • ✓‘किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर’ — सम्मान गुणों और कर्मों से मिलता है, कुल से नहीं
    • ✓कविता में प्रतीक, मानवीकरण, मुहावरे और तुक का प्रयोग है; विशेषण-विशेष्य (श्याम तन) की पहचान
    • ✓कवि हरिऔध की ‘प्रियप्रवास’ खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →कक्षा में गुलाब की टहनी (फूल और काँटे सहित) लाकर कविता की शुरुआत करें
    • →बोर्ड पर दो स्तंभ बनाकर ‘फूल क्या करता है / काँटा क्या करता है’ विद्यार्थियों से भरवाएँ
    • →प्रतीक-मिलान गतिविधि: दया, स्वार्थ, कोमलता, पीड़ा आदि कार्डों को ‘फूल’ या ‘काँटा’ के नीचे लगवाएँ
    • →‘श्याम तन’ से विशेषण-विशेष्य समझाकर विद्यार्थियों से फूल, काँटा, मेह, चाँद, रात के लिए विशेषण लिखवाएँ
    • →पर्यायवाची शब्दों से कविता की पंक्तियाँ बदलकर पढ़वाएँ और देखें कि कौन-सा शब्द लय में जँचता है
    • →‘जीवन में फूल और काँटे दोनों की आवश्यकता’ पर पाठ में दिए नियमों के अनुसार वाद-विवाद कराएँ
    • →फूल और काँटे के बीच काल्पनिक संवाद लिखवाकर जोड़ियों में प्रस्तुत कराएँ

    📋 Assessment Questions

    1. फूल और काँटे में कौन-कौन सी समानताएँ हैं और स्वभाव में क्या अंतर है?
    2. ‘किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर’ — उदाहरण देकर समझाइए।
    3. कविता की दो विशेषताएँ पंक्तियों के उदाहरण सहित लिखिए।
    4. दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य पहचानिए।
    5. ‘आँख में खटकना’ मुहावरे का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।

    👩‍🏫 Class 7 Hindi classes near you — online or at home

    Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.

    • Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
    • Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
    • At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.