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पानी रे पानी – Class 7 Hindi Chapter 4 Notes & NCERT PDF

Class 7HindiChapter 4NCERT book: मल्हार (Malhar) - Hindi Class 7

Notes and a simple summary of Chapter 4 of the NCERT Class 7 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

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पाठ 4: पानी रे पानी

पाठ-परिचय

पानी रे पानी प्रसिद्ध पर्यावरणविद अनुपम मिश्र का लेख है। इसमें उन्होंने सरल भाषा और गुल्लक की रोचक तुलना से समझाया है कि पानी की कमी (अकाल) और पानी की अधिकता (बाढ़) — दोनों समस्याएँ एक ही कारण से जुड़ी हैं, और उनका हल हमारे तालाबों व भूजल की रक्षा में है।

लेखक-परिचय: अनुपम मिश्र (1948–2016) प्रखर लेखक, संपादक, पर्यावरणविद और छायाकार थे। उनकी सबसे चर्चित पुस्तक ‘आज भी खरे हैं तालाब’ है, जिसका ब्रेल लिपि सहित अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ। ‘साफ माथे का समाज’ उनकी एक और महत्वपूर्ण पुस्तक है। वे गाँधी शांति प्रतिष्ठान की पत्रिका ‘गांधी मार्ग’ के संस्थापक और संपादक थे।

पाठ-सार

1. किताबी जल-चक्र

भूगोल की किताब में जल-चक्र का सुंदर चित्र होता है — सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, बरसात की बूँदें, बहती नदी और उसके किनारे बसे घर-गाँव-शहर। समुद्र से उठी भाप बादल बनकर बरसती है और नदियों के सहारे पानी वापस समुद्र में मिल जाता है — जल-चक्र पूरा हो जाता है।

2. असली जीवन में ‘पानी का चक्कर’

  • नलों में पूरे समय पानी नहीं आता; खोलने पर सूँ-सूँ की आवाज़ आती है।
  • पानी आता भी है तो बेवक्त — कभी देर रात, कभी बहुत सबेरे।
  • पानी को लेकर तू-तू, मैं-मैं होने लगती है।
  • कई घर नलों में मोटर लगवा लेते हैं, जिससे कई घरों का पानी खिंचकर एक घर में आ जाता है — यह पड़ोसियों का हक छीनने जैसा है।
  • शहरों में पानी बिकने लगा है; दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बैंगलोर जैसे बड़े शहर भी कष्ट में हैं; कई हिस्सों में अकाल जैसी हालत।
  • बरसात में उल्टा — घर, स्कूल, सड़कें, रेल की पटरियाँ पानी में डूब जाती हैं; बाढ़ गाँव और मुंबई जैसे शहर, किसी को नहीं छोड़ती।
  • “पानी का बेहद कम हो जाना और पानी का बेहद ज्यादा हो जाना, यानी अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”

    3. धरती — एक बड़ी गुल्लक

    जैसे हम पैसे गुल्लक में जमा करते हैं और ज़रूरत पर निकालते हैं, वैसे ही धरती एक बहुत बड़ी गुल्लक है। वर्षा का पानी — जो रुपयों से भी कई गुना कीमती है — इसमें जमा करना चाहिए। गाँव-शहर के तालाब और झीलें इस गुल्लक में पानी भरने का काम करते हैं; उनका पानी धीरे-धीरे रिसकर, छनकर भूजल भंडार में मिल जाता है। यही छिपा खज़ाना बरसात के बाद पूरे साल काम आता है।

    4. हमारी बड़ी गलती

    ज़मीन के लालच में हमने तालाबों को कचरे से पाटकर समतल कर दिया और उन पर मकान, बाज़ार, स्टेडियम, सिनेमा बना दिए। इसकी सज़ा — गर्मी में नल सूख जाते हैं और बरसात में बस्तियाँ डूबने लगती हैं।

    5. समाधान

    जल-चक्र को ठीक से समझें, बरसात को थाम लें, भूजल भंडार सुरक्षित रखें, जलस्रोतों — तालाबों और नदियों — की रखवाली करें। तभी ज़रूरत के समय पानी की कमी नहीं होगी।

    झरोखे से — ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’

    अनुपम मिश्र के इस अंश में कूड़न, बुढ़ान, सरमन और कौंराई चार किसान भाइयों की कहानी है। कूड़न की बेटी की दराँती एक पत्थर से छूकर सोने की हो गई — वह पारस था। कूड़न ने पारस राजा को सौंप दिया, पर राजा ने न पारस लिया न सोना; उसने कहा — “जाओ इससे अच्छे-अच्छे काम करते जाना, तालाब बनाते जाना।” पाटन क्षेत्र में आज भी चारों भाइयों के नाम के तालाब हैं — बूढ़ा सागर, मझगवाँ में सरमन सागर, कुआँग्राम में कौंराई सागर और कुंडम गाँव में कुंडम सागर। तालाब बनाने वालों को समाज ‘महाराज’ या ‘महात्मा’ कहकर अमर बनाता था।

    शब्दार्थ

  • जल-चक्र — समुद्र से भाप, बादल, वर्षा और फिर नदी से समुद्र तक पानी की यात्रा
  • भूजल — ज़मीन के नीचे छिपा जल भंडार
  • जल संकट — जल की अत्यधिक कमी
  • वर्षा जल संग्रहण — वर्षा के जल को धरती में या टंकियों में संग्रह करना
  • बेवक्त — गलत/अनुचित समय पर
  • अकाल — सूखा, कुसमय
  • गुल्लक — पैसे जमा करने का पात्र
  • पाटना — भरकर समतल करना
  • रिसना — धीरे-धीरे टपकना/छनना
  • समृद्ध — भरपूर, संपन्न
  • तू-तू, मैं-मैं — कहासुनी, झगड़ा (मुहावरा)
  • एक ही सिक्के के दो पहलू — एक ही बात के दो रूप (मुहावरा)
  • भाषा-बिन्दु

    उपसर्ग

    अ + काल = अकाल। शब्द के आरंभ में जुड़कर अर्थ बदलने वाले शब्दांश उपसर्ग कहलाते हैं।

  • देश → प्रदेश, विदेश, परदेश, स्वदेश
  • पात्र → सुपात्र, अपात्र; ज्ञान → विज्ञान, अज्ञान
  • समानार्थी (पर्यायवाची) शब्द

  • सूरज — सूर्य, भास्कर, दिवाकर, दिनकर
  • बादल — मेघ, जलद, वारिद, नीरद
  • हवा — पवन, वायु, समीर
  • भाप — वाष्प
  • बात पर बल देना

    “हमारी यह धरती भी इसी तरह की एक गुल्लक है।” — ‘भी’ हटाने पर वाक्य का ज़ोर कम हो जाता है। ‘भी’, ‘ही’, ‘तो’ जैसे शब्द बात पर बल देते हैं।

    केन्द्रीय भाव / सीख

    पानी प्रकृति का अनमोल धन है। तालाब, झीलें और नदियाँ धरती की गुल्लक भरती हैं। इन्हें नष्ट करने से ही अकाल और बाढ़ दोनों आते हैं। “जल जहाँ गिरे, वहीं एकत्र कीजिए” — वर्षा जल संग्रहण (जैसे छत के ऊपर वर्षा-जल संग्रहण, जिसमें छत का पानी पाइप से टंकी में पहुँचाया जाता है और उपयोग से पहले साफ किया जाता है) हर व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है।

    अभ्यास-संकेत

  • धरती को गुल्लक क्यों कहा? — वर्षा का पानी तालाबों से रिसकर भूजल में जमा होता है और ज़रूरत पर निकाला जाता है।
  • ‘बड़ी गलती’ क्या है? — तालाबों को कचरे से पाटकर उन पर निर्माण करना।
  • पाठ का शीर्षक ‘पानी रे पानी’ क्यों? — पानी की कमी और अधिकता, दोनों से परेशान मनुष्य की पुकार।
  • पढ़ने के लिए: ‘विश्वेश्वरैया’ — मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (जन्म 15 सितंबर 1861, मुद्देनाहल्ली, मैसूर) जिन्होंने बचपन से प्रकृति की शक्ति समझने का संकल्प लिया और बड़े होकर महान इंजीनियर बने; उनका संदेश — पहले जानो, फिर करो।
  • सामान्य भूलें

  • यह लिखना कि केवल कम वर्षा से अकाल आता है — पाठ के अनुसार तालाबों का नष्ट होना मुख्य कारण है।
  • ‘भूजल’ और ‘वर्षा जल संग्रहण’ के अर्थ आपस में मिला देना।
  • उपसर्ग को शब्द के अंत में जोड़ना — उपसर्ग हमेशा आरंभ में जुड़ता है।
  • ‘एक ही सिक्के के दो पहलू’ का शाब्दिक अर्थ लिखना — अर्थ है अकाल और बाढ़ एक ही समस्या के दो रूप हैं।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓अकाल और बाढ़ ‘एक ही सिक्के के दो पहलू’ हैं — दोनों तालाबों व भूजल की उपेक्षा से जुड़े हैं
    • ✓धरती एक बड़ी गुल्लक है; तालाब-झीलें वर्षा का पानी रिसाकर भूजल भंडार भरती हैं
    • ✓तालाबों को कचरे से पाटकर उन पर निर्माण करना ‘बड़ी गलती’ है जिसकी सज़ा अकाल और बाढ़ है
    • ✓उपसर्ग शब्द के आरंभ में जुड़कर नया अर्थ देते हैं — अ+काल, प्र/वि/पर/स्व+देश
    • ✓लेखक अनुपम मिश्र की प्रसिद्ध पुस्तक ‘आज भी खरे हैं तालाब’ है; ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’ तालाब बनाने की परंपरा बताता है

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →मिट्टी की गुल्लक कक्षा में दिखाकर ‘धरती की गुल्लक’ की तुलना समझाएँ
    • →विद्यार्थियों से पाठ में आए जल-चक्र वाले अंश को पहचानकर उसका चित्र बनवाएँ और विवरण लिखवाएँ
    • →एक दिन के घरेलू पानी के उपयोग की तालिका (बाल्टी/घड़े से माप) घर से भरवाकर कक्षा में तुलना करें
    • →‘सबका पानी’ विषय पर परिचर्चा कराएँ और मुख्य बिंदुओं पर रिपोर्ट लिखवाएँ
    • →सार्वजनिक नल पर झगड़ा न हो — इस पर पाँच स्लोगन लिखवाएँ
    • →विद्यालय या आस-पास की वर्षा जल संग्रहण व्यवस्था का सर्वे कराएँ; न हो तो संपादक को पत्र लिखवाएँ
    • →उपसर्ग-कार्ड (प्र, वि, पर, स्व, सु, अ) और मूल शब्द-कार्ड मिलाकर नए शब्द बनाने का खेल कराएँ

    📋 Assessment Questions

    1. पाठ में धरती को गुल्लक क्यों कहा गया है?
    2. ‘अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं’ — इस कथन को पाठ के आधार पर समझाइए।
    3. लेखक किस ‘बड़ी गलती’ की ओर संकेत करता है और उसकी क्या सज़ा मिल रही है?
    4. ‘प्र’, ‘वि’, ‘सु’ उपसर्गों से दो-दो शब्द बनाइए।
    5. भूजल स्तर बढ़ाने के लिए आप क्या-क्या प्रयास कर सकते हैं?

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