नहीं होना बीमार – Class 7 Hindi Chapter 5 Notes & NCERT PDF
Notes and a simple summary of Chapter 5 of the NCERT Class 7 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.
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पाठ 5: नहीं होना बीमार
पाठ-परिचय
'नहीं होना बीमार' एक हास्यपूर्ण कहानी है, जिसके लेखक स्वयं प्रकाश (1947–2019) हैं। स्वयं प्रकाश हिंदी के जाने-माने कहानीकार थे। उनकी कहानियाँ पढ़कर लगता है मानो कोई पुराना मित्र हमसे बातें कर रहा हो। उनकी कुछ रचनाएँ हैं — मात्रा और भार, अगली किताब, ज्योति रथ के सारथी, फीनिक्स।
यह कहानी एक बच्चे की "मैं" शैली (आत्मकथात्मक) में लिखी गई है। बच्चा स्कूल न जाने के लिए बीमारी का बहाना बनाता है, पर पूरे दिन उसे जो झेलना पड़ता है, उससे वह सबक सीख लेता है।
पाठ-सार
1. अस्पताल की यात्रा — "क्या ठाठ हैं बीमारों के!"
एक दिन नानीजी बच्चे को साथ लेकर बीमार पड़ोसी सुधाकर काका को देखने अस्पताल गईं। बच्चे का अस्पताल जाने का यह पहला अवसर था। बड़े वार्ड में एक जैसे पलंग, सफ़ेद चादरें, लाल कंबल, खिड़कियों पर हरे परदे और चमकता फ़र्श था।
"न ट्रैफ़िक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी...। सिर्फ़ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुन। बाकी एकदम शांति।"
नर्स ने काका को दवा खिलाई और नानीजी ने उन्हें साबूदाने की खीर खिलाई। यह देखकर बच्चे ने सोचा — "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी! ... काश! सुधाकर काका की जगह मैं होता! मैं कब बीमार पड़ूँगा!"
2. बीमारी का बहाना
कुछ दिन बाद बच्चे का स्कूल जाने का मन नहीं था और उसने होमवर्क भी नहीं किया था, इसलिए सज़ा का डर था। उसने सोचा — "चलो बीमार पड़ जाते हैं।" वह रज़ाई से निकला ही नहीं और नानीजी से बोला कि उसके सिर में दर्द, पेट में दर्द और बुखार है।
नानाजी ने माथा छुआ, पेट और नब्ज़ देखी — "बुखार तो नहीं है।" बच्चे ने चालाकी से थर्मामीटर लगाने को कहा, पर थर्मामीटर मिला ही नहीं। फिर नानाजी ने उसे कड़वी पुड़िया खिलाई और काढ़े जैसी चाय पिलाई, और कहा —
"आज इसे कुछ खाने को मत देना। आराम करने दो। शाम को देखेंगे।"
3. अकेलापन, ऊब और भूख
सब अपने-अपने काम पर चले गए — छोटे मामा, कुसुम मौसी (कॉलेज), मुन्नू (स्कूल)। बच्चा अकेला रज़ाई में पड़ा-पड़ा सोचता रहा कि गली में चंदू भाई ड्राइक्लीनर, तेजराम की दुकान, महेश घी सेंटर पर क्या हो रहा होगा। पर "मजबूरी थी... लेटे ही रहना था।" लेटे-लेटे उसकी पीठ दुखने लगी।
उसे भूख लगी, पर नानाजी का नियम था — "तबियत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना। इससे सारे विकार निकल जाएँगे।" नींद में भी उसे खस्ता कचौड़ी, मावे की बर्फ़ी, बेसन की चिक्की, गोलगप्पे और साबूदाने की खीर दिखाई देती रही। उसे लगा कि स्कूल चला जाता तो अच्छा था — रिसेस में नमक-मिर्च लगे अमरूद खाता!
4. मुन्नू और आम
दोपहर में मुन्नू स्कूल से लौटा। सब दाल-चावल और तली हुई हरी मिर्च खा रहे थे, और मुन्नू आम चूस रहा था (शायद बंबई वाले चाचाजी ने भेजे थे)। बच्चा जलन, गुस्से और कुढ़न में पाँव पटकता बिस्तर पर लौट आया। उसे पूरे दिन भूखे पेट रहना पड़ा।
"इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।"
पात्र
शब्दार्थ
भाषा-बिन्दु
चित्रात्मक भाषा
अस्पताल का वर्णन पढ़कर आँखों के सामने चित्र-सा बन जाता है — इसे चित्रात्मक भाषा कहते हैं। लेखक ने कहानी को रोचक बनाने के लिए हास्य, बच्चे का स्वयं से बातें करना, कल्पना करना और सोच में बदलाव जैसी तकनीकें भी अपनाई हैं।
लेखन के अनोखे तरीके
साधारण बात को विशेष ढंग से कहना —
विराम चिह्न
शब्द से जुड़े शब्द
'बीमार' से जुड़े शब्द: काढ़ा, पुड़िया, बुखार, थर्मामीटर, नर्स, वार्ड, नब्ज़, अस्पताल।
केन्द्रीय भाव / सीख
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓कहानी की घटनाओं का क्रम — अस्पताल की यात्रा, बीमारी का बहाना, भूख और ऊब, अंत में सीख
- ✓बहाने और झूठ के परिणाम को समझना तथा ईमानदारी का महत्व जानना
- ✓चित्रात्मक भाषा, हास्य और 'स्वयं से बातें करना' जैसी लेखन-तकनीकों की पहचान
- ✓विराम चिह्नों (। , ? ! " ") का सही प्रयोग
- ✓पाठ के शब्दों — वार्ड, काढ़ा, साबूदाना, ड्राइक्लीनर, अरहर — के अर्थ समझना
👨🏫 Teaching Tips
- →कहानी को भाव के साथ पढ़ें — बच्चे की ललक, ऊब और जलन को आवाज़ के उतार-चढ़ाव से दिखाएँ
- →पाठ में दिए पाँच संवादों का समूह में अभिनय करवाएँ ("बुखार आ गया।", "आज इसे कुछ खाने को मत देना...")
- →अस्पताल वाले अनुच्छेद से 'चित्रात्मक भाषा' समझाकर छात्रों से अपने विद्यालय का ऐसा ही वर्णन लिखवाएँ
- →'मुँह में पानी' गतिविधि: जिन पंक्तियों में खाने का वर्णन है, उन्हें अलग रंग से रेखांकित करवाएँ
- →विराम चिह्नों की तालिका कहानी के वाक्यों से ही भरवाएँ
- →कहानी के अंत पर चर्चा: यदि बच्चा सच बता देता तो क्या होता? — वैकल्पिक अंत लिखवाएँ
- →बच्चे की कल्पना वाली गली (चंदू भाई, तेजराम, महेश घी सेंटर) का चित्र बनवाएँ
- →ईर्ष्या की भावना पर संवेदनशील चर्चा करें — उसे दूर करने के उपाय छात्र स्वयं सुझाएँ
📋 Assessment Questions
- बच्चे ने बीमारी का बहाना क्यों बनाया? दो कारण बताइए।
- नानाजी ने बच्चे का 'इलाज' कैसे किया और उन्होंने खाना न देने का क्या कारण बताया?
- कहानी में चित्रात्मक भाषा का एक उदाहरण लिखिए।
- दिए गए वाक्यों में उचित विराम चिह्न लगाइए।
- कहानी के अंत में बच्चे ने क्या निर्णय लिया और क्यों?
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