TalentJR

दो गौरैया – Class 8 Hindi Chapter 2 Notes & NCERT PDF

Class 8HindiChapter 2NCERT book: मल्हार (Malhar) - Hindi Class 8

Notes and a simple summary of Chapter 2 of the NCERT Class 8 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

🎧 Listen to the content

पाठ 2: दो गौरैया

पाठ-परिचय

'दो गौरैया' एक हास्य-व्यंग्यपूर्ण, मर्मस्पर्शी कहानी है, जिसके लेखक भीष्म साहनी (1915–2003) हैं।

  • भीष्म साहनी हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के लेखक थे। उनकी कहानियों में देश-विभाजन और मानवीय मूल्यों की मार्मिक अभिव्यक्ति है।
  • उपन्यास 'तमस' पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
  • भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से अलंकृत किया।
  • बच्चों के लिए 'गुलेल का खेल' आदि कहानियाँ लिखीं।
  • कहानी कौन सुना रहा है? घर का बेटा ('मैं') — वही सारी घटनाएँ बताता है।
  • पाठ-सार

    घर या सराय?

    घर में तीन ही लोग रहते हैं — माँ, पिताजी और मैं। पर पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है; घर के असली मालिक तो कोई और (जीव-जंतु) हैं।

  • आँगन के आम के पेड़ पर तरह-तरह के पक्षी डेरा डाले रहते हैं।
  • घर में बीसियों चूहे धमा-चौकड़ी मचाते हैं — एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठता है (शायद बूढ़ा है, उसे सर्दी लगती है), दूसरा बाथरूम की टंकी पर (उसे गरमी लगती है)।
  • बिल्ली मन आया तो दूध पी जाती है, न मन आया तो 'फिर आऊँगी' कहकर चली जाती है।
  • चमगादड़ शाम को कसरत करते हैं, कबूतर 'गुटर-गूँ' करते हैं, छिपकलियाँ, बर्रें और चींटियों की फौज भी है।
  • गौरैयों का आगमन

    एक दिन दो गौरैया बिना पूछे घर में घुस आईं और मकान का "निरीक्षण" करने लगीं। दो दिन बाद उन्होंने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में घोंसला बना लिया।

    पिताजी बनाम गौरैया

    माँ ने कहा, "अब तो ये नहीं उड़ेंगी।" पिताजी को गुस्सा आया — "गौरैयाँ मेरे आगे क्या चीज़ हैं!"

    "छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!" माँ ने व्यंग्य से कहा।
  • पिताजी ने ताली बजाई, 'श…शू' किया, बाँहें झुलाईं, कूदने लगे — माँ हँसकर बोलीं, "चिड़ियाँ पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?"
  • फिर पिताजी लाठी ले आए। माँ ने सुझाया कि एक दरवाज़ा खुला छोड़कर बाकी बंद कर दो। गौरैयाँ किचन के दरवाज़े से बाहर निकलीं — पर तुरंत दरवाज़ों के नीचे की खाली जगह से लौट आईं।
  • पिताजी ने दरवाज़ों के नीचे कपड़े ठूँसे, तो गौरैयाँ रोशनदान से आ गईं, जिसका एक शीशा टूटा था।
  • यह सिलसिला रोज़ चलने लगा। पिताजी कहते, "मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।"
  • घोंसला तोड़ने का प्रयास और बदलाव

    आखिर पिताजी स्टूल पर चढ़कर लाठी से घोंसला नोचने लगे — "किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।"

  • इस बीच दोनों गौरैयाँ बाहर दीवार पर चुपचाप बैठी थीं — कुछ दुबली और काली पड़ गई थीं, अब वे चहक भी नहीं रही थीं।
  • तभी "चीं-चीं" की आवाज़ आई — पंखे के गोले से दो नन्हीं गौरैयाँ झाँक रही थीं और अपने माँ-बाप को पुकार रही थीं।
  • पिताजी के हाथ ठिठक गए। वे चुपचाप स्टूल से उतरे, लाठी एक ओर रख दी। माँ ने सभी दरवाज़े खोल दिए। गौरैया माँ-बाप उड़कर आए और बच्चों की चोंच में चुग्गा डालने लगे।
  • "कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।"

    पात्र

  • पिताजी: ज़िद्दी, जल्दी गुस्सा होने वाले, "हार न मानने वाले" — पर अंत में करुणा से भर जाते हैं और दृष्टिकोण बदल लेते हैं।
  • माँ: हँसमुख, व्यंग्य-प्रिय, समझदार — गौरैयों के प्रति सहानुभूति रखती हैं ("चिड़ियों को मत निकालो… अंडे दे दिए होंगे")।
  • लेखक (बेटा): कहानी सुनाने वाला, जो अंत में अवाक् रह जाता है।
  • दो गौरैया: अपने घर और बच्चों के लिए बार-बार लौटने वाली — निरंतर प्रयास का प्रतीक।
  • शब्दार्थ

  • सराय — यात्रियों के ठहरने का स्थान
  • डेरा डालना — टिककर रहना
  • धमा-चौकड़ी — उछल-कूद, शोर-शराबा
  • निरीक्षण — जाँच-परख
  • व्यंग्य — चुटकी लेकर कही बात
  • झिड़ककर — डाँटकर
  • ठकोरा — ठोका, खटखटाया
  • खदेड़ना — भगा देना
  • रोशनदान — हवा-रोशनी के लिए दीवार में ऊँचा झरोखा
  • थिगलियाँ — कपड़े के टुकड़े
  • ठिठक गए — अचानक रुक गए
  • अवाक् — हैरान, चुप
  • चुग्गा — चोंच से खिलाया जाने वाला दाना
  • मल्हार — वर्षा ऋतु से जुड़ा शास्त्रीय संगीत का राग
  • भाषा-बिन्दु

    क्रिया विशेषण

    कोई कार्य कैसे हुआ, यह बताने वाले शब्द क्रिया विशेषण हैं:

  • माँ खिलखिलाकर हँस दीं।
  • पिताजी ने झिड़ककर कहा।
  • माँ ने गंभीरता से कहा।
  • उन्होंने गुस्से में कहा।
  • व्यंग्य

    हँसी-मज़ाक या उपहास के माध्यम से किसी कमी या विडंबना को उजागर करना व्यंग्य है। इसमें बात सीधे न कहकर उलटे या सांकेतिक ढंग से कही जाती है — जैसे "चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!"

    मात्रा का हेर-फेर

    एक मात्रा के अंतर से अर्थ बदल जाता है: पिता–पीता, सहसा–साहस, नीचा–नीचे, हार–हरा–हारा, नाच–नाचा–नचा, चूक–चुक।

    'मल्हार गा रही थीं'

    गौरैयाँ मज़े से चहचहा रही थीं — मानो राग मल्हार गा रही हों। मल्हार वर्षा ऋतु से जुड़ा राग है; हिंदी पाठ्यपुस्तक का नाम भी इसी पर है।

    केन्द्रीय भाव / सीख

    हर प्राणी को अपने घर और परिवार से प्रेम होता है। करुणा कठोर से कठोर मन को भी बदल देती है। गौरैयों का बार-बार लौटना निरंतर प्रयास की सीख देता है। पुस्तक 'झरोखे से' में बताती है कि गौरैयों की संख्या घट रही है; उनके संरक्षण के लिए हर साल 20 मार्च को 'विश्व गौरैया दिवस' मनाया जाता है।

    अभ्यास-संकेत

  • गौरैयों ने कहाँ-कहाँ से प्रवेश किया? — पहली बार सीधे अंदर; फिर दरवाज़ों के नीचे की खाली जगह से; फिर रोशनदान (टूटे शीशे) से।
  • गौरैयों के व्यवहार में बदलाव: घोंसला टूटते समय वे दुबली, काली पड़ गईं और चहकना बंद कर दिया — अपने घर और बच्चों की चिंता के कारण।
  • घर के प्राणी और मनुष्यों जैसे काम: बिल्ली 'फिर आऊँगी' कहती है; बूढ़े चूहे को सर्दी लगती है; चमगादड़ कसरत करते हैं; गौरैयाँ मकान का निरीक्षण करती हैं।
  • सामान्य भूलें

  • यह मानना कि माँ गौरैयों को निकालना चाहती थीं — माँ हँसती रहीं, मदद नहीं की, और बाद में गंभीरता से कहा "चिड़ियों को मत निकालो"।
  • गौरैयों का घोंसला 'आम के पेड़' पर बताना — घोंसला बैठक के पंखे के गोले में था।
  • कहानी का वाचक 'लेखक भीष्म साहनी' स्वयं मान लेना — वाचक कहानी का पात्र बेटा ('मैं') है।
  • 'मल्हार गा रही थीं' का शाब्दिक अर्थ लेना — यह गौरैयों के प्रसन्न चहचहाने का काव्यात्मक वर्णन है।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓भीष्म साहनी की कहानी में हास्य, व्यंग्य और करुणा का सुंदर मेल
    • ✓घर के जीव-जंतुओं का मानवीकरण और उनका मनुष्यों जैसा वर्णन
    • ✓पिताजी के दृष्टिकोण में बदलाव — नन्हीं गौरैयों को देखकर करुणा का जागना
    • ✓क्रिया विशेषण, व्यंग्य और मात्रा के हेर-फेर से अर्थ-परिवर्तन
    • ✓गौरैया संरक्षण और 20 मार्च 'विश्व गौरैया दिवस' का महत्व

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →कहानी का नाटकीय वाचन करवाएँ — अलग-अलग विद्यार्थी माँ, पिताजी और वाचक बनें
    • →गौरैयों के प्रवेश के रास्तों (दरवाज़े के नीचे, रोशनदान) का क्रमवार प्रवाह-चित्र बनवाएँ
    • →'माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं' विषय पर पक्ष-विपक्ष वाद-विवाद करवाएँ
    • →क्रिया विशेषण खोजो खेल: कहानी से 'कैसे' बताने वाले शब्द चुनवाएँ और नए वाक्य बनवाएँ
    • →संवाद-लेखन और अभिनय: घोंसले से झाँकती नन्हीं गौरैयाँ क्या बोल रही होंगी
    • →आस-पास के घोंसलों का दूर से अवलोकन करवाएँ (सावधानी: हाथ न लगाएँ) और तालिका भरवाएँ
    • →राग मल्हार का एक अंश सुनवाकर पुस्तक के नाम से संबंध बताएँ

    📋 Assessment Questions

    1. पिताजी ने घर को 'सराय' क्यों कहा? दो उदाहरण दीजिए
    2. गौरैयों ने घर में किन-किन रास्तों से प्रवेश किया? क्रम से लिखिए
    3. घोंसला तोड़ते समय गौरैयों के व्यवहार में क्या बदलाव आया और क्यों?
    4. 'चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!' — यह व्यंग्य क्यों है?
    5. अंत में पिताजी का दृष्टिकोण क्यों और कैसे बदला?

    👩‍🏫 Class 8 Hindi classes near you — online or at home

    Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.

    • Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
    • Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
    • At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.