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नए मेहमान – Class 8 Hindi Chapter 8 Notes & NCERT PDF

Class 8HindiChapter 8NCERT book: मल्हार (Malhar) - Hindi Class 8

Notes and a simple summary of Chapter 8 of the NCERT Class 8 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

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पाठ 8: नए मेहमान

पाठ-परिचय

'नए मेहमान' एक एकांकी है, जिसके लेखक हैं उदयशंकर भट्ट (1898–1966)। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा में हुआ था। उन्होंने रेडियो के लिए अनेक नाटक लिखे और नाटकों तथा फिल्मों में अभिनय भी किया। उनका उपन्यास लोक-परलोक और एकांकी संग्रह पर्दे के पीछे बहुत चर्चित रहे।

यह एकांकी एक शहरी मध्यवर्गीय परिवार की कहानी है जो किराये के छोटे, बंद मकान में भीषण गरमी से परेशान है। रात को अचानक दो ऐसे मेहमान आ जाते हैं जिन्हें घर का कोई नहीं जानता — यानी 'मान न मान मैं तेरा मेहमान' वाली स्थिति।

पात्र-परिचय

  • विश्वनाथ — गृहपति, उम्र 45 वर्ष, गंभीर और संकोची स्वभाव।
  • रेवती — विश्वनाथ की पत्नी, पंद्रह दिन से सिर-दर्द से परेशान।
  • प्रमोद, किरण — विश्वनाथ के बच्चे (एक छोटी बच्ची उषा का भी उल्लेख है)।
  • नन्हेमल (लगभग 35 वर्ष) और बाबूलाल (लगभग 24 वर्ष) — अनजान अतिथि, जो खुद को बिजनौर से आया बताते हैं।
  • आगंतुक — रेवती का भाई।
  • पड़ोसी — जो विश्वनाथ से नाराज़ रहता है।
  • स्थान: भारत का कोई बड़ा नगर। समय: गरमी की ऋतु, रात के आठ बजे।

    पाठ-सार

    गरमी और बंद मकान

    एकांकी की शुरुआत रंगमंच-निर्देश से होती है — कमरा बेहद गरम है, पुराना पंखा बहुत कम हवा देता है, बच्चा पसीने से तर है। विश्वनाथ कहता है:

    "इन बंद मकानों में रहना कितना भयंकर है! मकान है कि भट्टी!"

    रेवती कहती है, "पत्ता तक नहीं हिल रहा है।" छत इतनी छोटी है कि पूरी खाटें नहीं आतीं, और पड़ोसी खाली छत पर भी बच्चों के लिए खाट नहीं बिछाने देते। रेवती प्रार्थना करती है — "ईश्वर करे इन दिनों कोई मेहमान न आए।"

    अनजान मेहमानों का आना

    तभी दरवाजा खटखटाया जाता है और नन्हेमल व बाबूलाल बिस्तर और संदूक लेकर आ जाते हैं। वे आते ही पानी, खाना और नहाने का प्रबंध माँगने लगते हैं। वे बिना रुके बातें करते हैं — कपड़ों के दाम (बाबूलाल की धोती नौ रुपये की; नन्हेमल ने मलमल सवा रुपया गज ली, जबकि नत्थामल के यहाँ साढ़े नौ आने गज बिक रही थी)।

    विश्वनाथ कई बार पूछता है कि वे कहाँ से और किसके पास आए हैं, पर उन्हें ठीक उत्तर नहीं मिलता। वे लाला संपतराम गोटेवाले और सेठ जगदीशप्रसाद (मुरादाबाद) के नाम लेते हैं, पर विश्वनाथ संपतराम को जानता ही नहीं। मेहमान छत पर हाथ धोकर पानी फैला देते हैं, जिससे पड़ोसी झगड़ने आ जाता है — "यदि मेहमान बुलाने हों तो बड़ा-सा मकान लो।"

    सच का पता चलना

    अंत में पता चलता है कि उन्हें 'कविराज' या 'वैद्य' के पास जाना था। प्रमोद बताता है कि पिछली गली में एक कविराज वैद्य रहते हैं — वे कविराज रामलाल वैद्य के मेहमान थे! दोनों "राम-राम" कहकर चले जाते हैं। रेवती कहती है — "अब जान में जान आई।"

    असली मेहमान

    तभी रेवती का भाई आता है; उसने झाँसी से तार भेजा था जो नहीं मिला। वह कहता है कि खाना रहने दो, पर इस बार सिर-दर्द के बावजूद रेवती तुरंत कहती है:

    "कैसी बातें करते हो भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ।"

    शब्दार्थ

  • एकांकी — एक ही अंक वाला नाटक
  • गृहपति — घर का मुखिया
  • आगंतुक — आने वाला, अचानक आया व्यक्ति
  • अंटी — धोती की कमर के ऊपर की लपेट, गाँठ ("माल-मसाला तो अंटी में है न?")
  • चर्राना — चर-चर करना, सूखकर तनना
  • ख़ाक — धूल, मिट्टी
  • गज — लंबाई का एक माप (36 इंच)
  • आना — पुरानी भारतीय मुद्रा
  • तार — तार (टेलीग्राफ) द्वारा भेजी गई खबर
  • छज्जा — छत का दीवार से बाहर निकला भाग
  • तुनककर — छोटी बात पर चिढ़कर
  • कदाचित — शायद
  • खीझ — झुँझलाहट
  • यवनिका — पर्दा (नाटक का अंत)
  • भाषा-बिन्दु

    रंगमंच-निर्देश और संवाद

  • कोष्ठक में दिए समय, स्थान, वेशभूषा और अभिनय के संकेत रंगमंच-निर्देश कहलाते हैं, जैसे (पश्चिम की ओर से एक स्त्री प्रवेश करती है)।
  • पात्रों द्वारा कही गई बातें संवाद हैं। एकांकी की कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है।
  • मुहावरे

  • दिन-रात एक करना — बहुत परिश्रम करना ("आज दो साल से दिन-रात एक करके ढूँढ़ रहा हूँ।")
  • ख़ाक में मिलना — सब कुछ नष्ट हो जाना ("लाखों के आदमी खाक में मिल गए।")
  • जान में जान आना — राहत मिलना
  • पुस्तक का मिलान (स्तंभ 1 → भाव)

  • लाखों के आदमी खाक में मिल गए → बहुत समृद्ध व्यक्ति थे, अब कुछ नहीं रहा
  • धोती ऐसी चर्रा रही है, जैसे पुरानी हो → कपड़ा पसीने से भीगकर पुराने जैसा हो गया
  • माल-मसाला तो अंटी में है न? → धनराशि सुरक्षित तो है न!
  • खाने में क्या देर-दार है → भोजन की व्यवस्था कब तक होगी
  • पहले आत्मा फिर परमात्मा → पहले अपना ध्यान, फिर दूसरा काम
  • 'ही' और 'तो' से बल देना

  • "मैं भी ढूँढ़कर ही* रहा"* — 'ही' हटाने से निश्चय का बल कम हो जाता है।
  • "तुम नहाने तो* जाओ"* / "तुम तो* नहाने जाओ"* — 'तो' का स्थान बदलने से अर्थ बदलता है।
  • गरमी की भीषणता बताने वाले प्रयोग

    "सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो", "चारों तरफ दीवारें तप रही हैं", "चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं"।

    केन्द्रीय भाव / सीख

  • शहर के छोटे, बंद मकानों में रहने वाले मध्यवर्गीय परिवारों की कठिनाइयाँ।
  • 'अतिथिदेवो भव' की भावना — विश्वनाथ अनजान लोगों को भी भूखा नहीं लौटाना चाहता; पर बिना परिचय पूछे किसी को घर में ले आना सावधानी के विरुद्ध है।
  • अपनों के लिए प्रेम — बीमार रेवती भी अपने भाई के लिए खुशी से खाना बनाती है।
  • हास्य और व्यंग्य से यह भी दिखाया गया है कि अच्छे अतिथि को मेज़बान की परिस्थिति का ध्यान रखना चाहिए।
  • अभ्यास-संकेत

  • 'सीधे लड़के' — नन्हेमल ने यह प्रमोद-किरण के चुपचाप सेवा करने और प्रश्न न करने के संदर्भ में कहा।
  • पड़ोसी की शिकायत — छत पर पानी फैलाना और रोज़ मेहमानों का आना।
  • अपरिचित होने के संवाद खोजें: "मैं संपतराम को नहीं जानता", "तो आप कोई चिट्ठी-विट्ठी लाए हैं?"
  • तार से एकांकी के पुराने समय का अनुमान लगाएँ; 1 रुपये में 16 आने, 4 आने में 25 पैसे, 1 गज में 3 फीट होते हैं।
  • सामान्य भूलें

  • नन्हेमल-बाबूलाल को विश्वनाथ का रिश्तेदार मान लेना — वे कविराज रामलाल वैद्य के मेहमान थे।
  • 'आगंतुक' को भी अनजान समझना — वह रेवती का भाई है।
  • रंगमंच-निर्देश को संवाद समझ लेना।
  • एकांकी और कहानी को एक जैसा मानना — एकांकी में एक ही अंक होता है और कहानी संवादों व अभिनय-संकेतों से आगे बढ़ती है।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓एकांकी की विशेषताएँ — एक अंक, पात्र-परिचय, रंगमंच-निर्देश और संवाद
    • ✓गरमी और छोटे मकान में रहने वाले शहरी मध्यवर्गीय परिवार की कठिनाइयों को समझना
    • ✓नन्हेमल-बाबूलाल के व्यवहार से अच्छे अतिथि और अच्छे मेज़बान के गुण पहचानना
    • ✓मुहावरों (दिन-रात एक करना, ख़ाक में मिलना) और 'ही'/'तो' से बल देने का प्रयोग
    • ✓अपरिचित व्यक्ति के घर आने पर सावधानी और सुरक्षा का महत्त्व

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →कक्षा को समूहों में बाँटकर एकांकी का 10–15 मिनट का मंचन करवाएँ; कुर्सी-मेज़ जैसी आसपास की वस्तुएँ ही प्रयोग करें
    • →पहले केवल रंगमंच-निर्देश पढ़वाएँ, फिर संवाद — ताकि विद्यार्थी दोनों का अंतर समझें
    • →बोर्ड पर 'गरमी की भीषणता' वाले वाक्य लिखकर विद्यार्थियों से सर्दी और वर्षा के लिए ऐसे ही वाक्य बनवाएँ
    • →'ही' और 'तो' का स्थान बदलकर एक ही वाक्य के तीन अर्थ दिखाएँ
    • →'आने', 'गज' और 'तार' पर छोटी खोजबीन गतिविधि दें — दादा-दादी से पूछकर लिखें
    • →अनजान व्यक्ति के आने पर क्या करें — इस पर सुरक्षा-चर्चा करवाएँ
    • →'झरोखे से' में निराला के आतिथ्य वाले अंश से 'अतिथिदेवो भव' पर चर्चा जोड़ें

    📋 Assessment Questions

    1. नन्हेमल और बाबूलाल वास्तव में किसके मेहमान थे और यह कैसे पता चला?
    2. रेवती पहले मेहमानों के लिए खाना बनाने से मना करती है, पर भाई के लिए तैयार हो जाती है — क्यों?
    3. एकांकी के दो रंगमंच-निर्देश और दो संवाद अलग-अलग लिखिए।
    4. 'ख़ाक में मिलना' और 'दिन-रात एक करना' मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य बनाइए।
    5. अपरिचित व्यक्ति के घर आने पर आप कौन-सी सावधानियाँ बरतेंगे?

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