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साङकेन – Class 5 Hindi Chapter 4 Notes & NCERT PDF

Class 5HindiChapter 4NCERT book: वीणा (Veena) - Hindi Class 5

Notes and a simple summary of Chapter 4 of the NCERT Class 5 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

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पाठ 4: साङकेन (अरुणाचल प्रदेश का नववर्ष-पर्व)

पाठ-परिचय

'साङकेन' एक वर्णनात्मक कहानी है जो हमें अरुणाचल प्रदेश के चौखाम क्षेत्र में मनाए जाने वाले त्योहार साङकेन से परिचित कराती है। दिल्ली से आई बालिका वल्लरी अपने मित्र चाऊतान के परिवार के साथ यह त्योहार देखती है और उसे होली की याद आ जाती है। पाठ भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता को सुंदर ढंग से दिखाता है।

पाठ-सार

दिल्ली और चौखाम का अंतर

वल्लरी के पिताजी चौखाम के मंडल कार्यालय में अधिकारी हैं। दिल्ली की भीड़भरी सड़कें, हॉर्न बजाती कारें-बसें, लंबी कतारें — और चौखाम का खुला, शांत वातावरण, जहाँ "जिधर देखो, हरियाली ही हरियाली और फूल ही फूल।" यहाँ के लोगों के मुखों पर सदैव मुस्कान रहती है (अर्थात् लोग सदा प्रसन्न रहते हैं)।

चाऊतान के घर

चाऊतान के पिताजी घर की सफ़ाई छोड़कर मेहमानों का स्वागत करते हैं; माताजी स्वादिष्ट पकवान लाती हैं। तभी सड़क पर एक शोभायात्रा निकलती है — कंधों पर पालकियाँ, उनमें भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की मूर्तियाँ, लोग नाचते-गाते।

नदी किनारे का मंदिर

गाँव वालों ने नदी के किनारे एक नया मंदिर बनाया है। उसकी जालीदार दीवारें बाँस और बाँस की खपच्चियों से बनी थीं, बीच-बीच में हरी टहनियाँ और उन पर रंग-बिरंगे फूल खोंसे गए थे। बौद्ध भिक्षुओं ने मंत्र पढ़ते हुए मूर्तियाँ पालकियों से उतारकर मंदिर में रखीं, पूजा की और जल चढ़ाया। मूर्तियाँ तीन दिन मंदिर में रहेंगी।

पानी और चावल का आटा

लोग बालटियाँ भर-भरकर एक-दूसरे पर पानी डाल रहे थे और चेहरों पर चावल का आटा लगा रहे थे। वल्लरी को लगा होली है। चाऊतान ने बताया:

"आज हमारे यहाँ साङकेन का त्योहार है। आज से हमारा नया वर्ष आरंभ होता है।"

वल्लरी बताती है कि उसके यहाँ भी होली से नया वर्ष आरंभ होता है — रंगीन पानी, गुलाल, और अगले दिन मिलना-जुलना, मिठाइयाँ-नमकीन।

तीन दिन का पर्व

साङकेन तीन दिन मनाया जाता है। तीसरे दिन भिक्षु मूर्तियाँ वापस बौद्ध-विहार ले जाते हैं; गाँव वाले दंडवत प्रणाम करते हैं और भिक्षु आशीर्वाद देते हैं:

खेती फूले-फले तुम्हारी, तुम्हें न हो कोई बीमारी।
हिल-मिलकर सब नाचें-गाएँ, नए साल में खुशी मनाएँ।

पात्र

  • वल्लरी – दिल्ली से आई जिज्ञासु बालिका
  • चाऊतान – वल्लरी का मित्र, चौखाम का निवासी
  • वल्लरी के पिताजी, चाऊतान के माता-पिता, बौद्ध भिक्षु
  • शब्दार्थ

  • मंडल कार्यालय – ज़िले/क्षेत्र का सरकारी दफ़्तर
  • शोभायात्रा – धूमधाम से निकलने वाला जुलूस
  • पालकी – कंधों पर उठाई जाने वाली सवारी
  • बौद्ध-विहार – बौद्ध भिक्षुओं के रहने और पूजा का स्थान
  • भिक्षु – बौद्ध संन्यासी
  • खपच्चियाँ – बाँस की पतली पट्टियाँ
  • जालीदार – जाली (छेद वाली बुनावट) जैसी
  • खोंस-खोंसकर – फँसा-फँसाकर लगाना
  • दंडवत प्रणाम – ज़मीन पर लेटकर प्रणाम करना
  • सम्मिलित – शामिल
  • उत्साह – जोश, उमंग
  • भाषा-बिन्दु

    1. समानार्थी शब्द

    मित्र – दोस्त, सखा • घर – गृह, सदन • नदी – सरिता, तटिनी • पेड़ – वृक्ष, तरु • त्योहार – पर्व, उत्सव

    2. 'जहाँ देखो ... ही ...' (बल देने वाली रचना)

    "जहाँ देखो हरियाली ही हरियाली और फूल ही फूल!"

    जैसे — समुद्र के किनारे जहाँ देखो पानी ही पानी!

    3. वचन बदलना

    मूर्ति → मूर्तियाँ • खपच्ची → खपच्चियाँ • नदी → नदियाँ • मिठाई → मिठाइयाँ • बालटी → बालटियाँ (उलटा भी: बालटियाँ → बालटी)

    4. उद्धरण चिह्न (" ")

    किसी की बात ज्यों की त्यों लिखने पर: चाऊतान बोला, "आज से हमारा नया वर्ष आरंभ होता है।"

    5. वर्णमाला क्रम

    करेला, समय, मठ, तट, नमकीन, जल, वन, मटका → करेला, जल, तट, नमकीन, मटका, मठ, वन, समय

    बूझो पहेली (दूध वाले भैया)

    केवल 4 लीटर और 3 लीटर के बरतन से 5 लीटर दूध: 4 लीटर वाला भरकर 3 लीटर वाले में उड़ेलो → 4 वाले में 1 लीटर बचा; वह पतीले में डालो। फिर 4 लीटर वाला भरकर पतीले में डालो → 1 + 4 = 5 लीटर।

    सीख

  • भारत के अलग-अलग राज्यों के त्योहार अलग नाम के होते हुए भी मिल-जुलकर खुशी मनाने का संदेश देते हैं।
  • अतिथि-सत्कार, बड़ों का आशीर्वाद और प्रकृति से प्रेम हमारी साझा संस्कृति है।
  • सामान्य भूलें

  • साङकेन को होली समझ लेना — यह अरुणाचल का नववर्ष-पर्व है, जिसमें पानी डाला जाता है।
  • मंदिर को सरोवर/समुद्र के किनारे बताना — मंदिर नदी के किनारे था।
  • मूर्तियाँ भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की थीं, किसी और देवता की नहीं।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓साङकेन पर्व की विशेषताएँ (शोभायात्रा, बाँस का मंदिर, पानी डालना, नववर्ष, तीन दिन) बताना
    • ✓साङकेन और होली की समानताओं के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक एकता समझना
    • ✓समानार्थी शब्द, वचन-परिवर्तन और 'जहाँ देखो ... ही ...' रचना का प्रयोग करना
    • ✓उद्धरण चिह्न का सही प्रयोग और शब्दों को वर्णमाला क्रम में लगाना
    • ✓आँखों-देखा वर्णन (त्योहार का दिन) लिखने का अभ्यास करना

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →भारत के मानचित्र पर अरुणाचल प्रदेश और दिल्ली दिखाकर दूरी और वातावरण के अंतर पर बात करें
    • →बच्चों से उनके घर के नववर्ष-त्योहार (होली, बैसाखी, उगादी, पोंगल आदि) की तालिका बनवाएँ
    • →बाँस/कागज़ की पट्टियों से 'जालीदार मंदिर' का छोटा मॉडल समूह में बनवाएँ
    • →अलग-अलग राज्यों के अभिवादन शब्दों (नमस्ते, वणक्कम, सत श्री अकाल...) की सूची कक्षा में बनाएँ
    • →4 और 3 लीटर वाली दूध-पहेली को पानी और बोतलों से सचमुच करके दिखाएँ
    • →'होली आई, होली आई' कविता का सामूहिक लयबद्ध पाठ करवाएँ
    • →संकेत-शब्दों (शोभायात्रा, पालकी, भिक्षु...) की मदद से मित्र को पत्र/आँखों-देखा वर्णन लिखवाएँ

    📋 Assessment Questions

    1. साङकेन क्यों मनाया जाता है और कितने दिन चलता है?
    2. साङकेन मनाते समय वल्लरी को होली की याद क्यों आई?
    3. नदी किनारे बने मंदिर की सजावट का वर्णन कीजिए।
    4. 'मूर्ति', 'नदी', 'मिठाई' के बहुवचन लिखिए।
    5. पाठ से उद्धरण चिह्न वाला एक वाक्य लिखिए।

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