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परीक्षा – Class 6 Hindi Chapter 10 Notes & NCERT PDF

Class 6HindiChapter 10NCERT book: मल्हार (Malhar) - Hindi Class 6

Notes and a simple summary of Chapter 10 of the NCERT Class 6 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

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पाठ 10: परीक्षा

पाठ-परिचय

परीक्षा कथा-सम्राट प्रेमचंद (1880–1936) की प्रसिद्ध कहानी है। प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपतराय था। उन्होंने समाज-सुधार और राष्ट्रीय भावना से भरी अनेक कहानियाँ और उपन्यास लिखे — जैसे ईदगाह, बड़े भाईसाहब, गुल्ली डंडा, दो बैलों की कथा।

यह कहानी बताती है कि किसी पद के लिए सच्ची योग्यता डिग्री या दिखावा नहीं, बल्कि दया, साहस और आत्मबल है।

पाठ-सार

दीवान की विदाई और शर्त

रियासत देवगढ़ के दीवान सरदार सुजानसिंह ने चालीस वर्ष सेवा की। बुढ़ापे में उन्होंने महाराज से छुट्टी माँगी, ताकि कोई भूल-चूक होकर जीवन भर की नेकनामी पर दाग न लगे। महाराज ने प्रार्थना मान ली, पर शर्त रखी कि नया दीवान उन्हें ही खोजना होगा।

विज्ञापन

"यह ज़रूरी नहीं है कि वे ग्रेजुएट हों, मगर हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है … विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जाएगा।"

एक महीने तक उम्मीदवारों के रहन-सहन और आचार-विचार की देखभाल होनी थी। विज्ञापन ने सारे मुल्क में तहलका मचा दिया — पंजाब, मद्रास से सैकड़ों लोग आ पहुँचे; सबसे अधिक ग्रेजुएट थे।

दिखावे का महीना

हर उम्मीदवार अपने को अच्छा दिखाने की कोशिश करने लगा:

  • मिस्टर 'अ' नौ बजे तक सोते थे, अब बगीचे में उषा-दर्शन करने लगे।
  • मिस्टर 'द', 'स', 'ज' नौकरों से 'आप' और 'जनाब' कहकर बात करने लगे।
  • मिस्टर 'ल' को किताबों से घृणा थी, अब बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने लगे।
  • "लेकिन मनुष्यों का वह बूढ़ा जौहरी आड़ में बैठा हुआ देख रहा था कि इन बगुलों में हंस कहाँ छिपा हुआ है।"

    असली परीक्षा — हॉकी के बाद

    उम्मीदवारों ने आपस में हॉकी खेली। शाम तक हार-जीत का निर्णय न हुआ। पास के नाले में एक किसान की अनाज से भरी गाड़ी कीचड़ में फँसी थी — बोझ अधिक, बैल कमज़ोर। थके खिलाड़ी उधर से निकले, पर उनकी आँखों में सहानुभूति न थी —

    "उनमें स्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था।"

    पर एक युवक — जिसके पैर में खेलते हुए चोट लगी थी — लँगड़ाता हुआ आया, कोट उतारा और बोला: "मैं तुम्हारी गाड़ी निकाल दूँ?" घुटने तक कीचड़ में धँसकर भी उसने पहिया ढकेला और गाड़ी नाले के ऊपर चढ़ा दी।

    युवक ने हँसकर पूछा, "अब मुझे कुछ इनाम देते हो?" किसान बोला, "नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।" युवक को संदेह हुआ — कहीं यह सुजानसिंह तो नहीं? किसान मुस्कुराकर बोला:

    "गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।"

    परिणाम

    दरबार में सुजानसिंह ने घोषणा की कि इस पद के लिए ऐसा पुरुष चाहिए जिसके हृदय में दया हो और साथ में आत्मबल — और पंडित जानकीनाथ को दीवानी की बधाई दी।

    "जो पुरुष स्वयं जख्मी होकर भी एक गरीब किसान की भरी हुई गाड़ी को दलदल से निकालकर नाले के ऊपर चढ़ा दे, उसके हृदय में साहस, आत्मबल और उदारता का वास है। ऐसा आदमी गरीबों को कभी न सतावेगा।"

    कर्मचारियों की आँखों में सत्कार था, उम्मीदवारों की आँखों में ईर्ष्या।

    शब्दार्थ

  • रियासत – राज्य
  • दीवान – राजा का मुख्य मंत्री
  • दीनबंधु – गरीबों के सहायक (राजा के लिए संबोधन)
  • नेकनामी – अच्छा नाम, यश
  • नीतिकुशल – नीति में निपुण
  • हृष्ट-पुष्ट – स्वस्थ और तगड़ा
  • मंदाग्नि – भूख कम लगने (पाचन कमज़ोर होने) का रोग
  • सनद – प्रमाण-पत्र, डिग्री
  • तहलका – हलचल, खलबली
  • जौहरी – रत्नों का पारखी (यहाँ: मनुष्यों का पारखी)
  • बगुला / हंस – दिखावटी लोग / सच्चा गुणी व्यक्ति
  • मद – घमंड
  • वात्सल्य – स्नेह, ममता
  • आत्मबल – मन की शक्ति
  • उबार लिया – संकट से बचा लिया
  • भाषा-बिन्दु

  • भाववाचक (मन के भाव) संज्ञाएँ: स्वार्थ, मद, उदारता, वात्सल्य, दया, साहस, आत्मबल, ईर्ष्या, सत्कार, सहानुभूति — ये दिखाई न देने वाले मन के भावों के नाम हैं।
  • विपरीतार्थक शब्द: आना–जाना, गुण–अवगुण, आदर–अनादर, स्वस्थ–अस्वस्थ, कम–अधिक, दयालु–निर्दयी, योग्य–अयोग्य, हार–जीत, आशा–निराशा।
  • कहावत: "गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है" = कोशिश करने पर ही सफलता मिलती है (जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ)। अन्य — एक अनार सौ बीमार (एक नौकरी, सैकड़ों उम्मीदवार), अधजल गगरी छलकत जाए।
  • चित्रात्मक भाषा: "लोग पसीने से तर हो गए। खून की गरमी आँख और चेहरे से झलक रही थी।"
  • उपमा: "गेंद किसी दफ़्तर के अप्रेंटिस की तरह ठोकरें खाने लगी", "मानो लोहे की दीवार है"।
  • केन्द्रीय भाव / सीख

    सच्ची योग्यता चरित्र में है, डिग्री या दिखावे में नहीं। जिसके हृदय में दया और मन में साहस हो, वही ज़िम्मेदारी के पद के योग्य है। मनुष्य की असली परीक्षा तब होती है जब उसे लगता है कि कोई देख नहीं रहा।

    अभ्यास-संकेत

  • महाराज ने उत्तराधिकारी चुनने का कार्य दीवान को क्यों सौंपा? — उनकी नीतिकुशलता के कारण।
  • दीवान के नौकरी छोड़ने का कारण — राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना (साथ में बुढ़ापे में बदनामी का डर)।
  • किनकी आँखों में सत्कार, किनकी में ईर्ष्या? — रियासत के कर्मचारियों-रईसों की आँखों में सत्कार; उम्मीदवारों की आँखों में ईर्ष्या (क्योंकि पद उन्हें नहीं मिला)।
  • शीर्षक 'परीक्षा' क्यों? — असली परीक्षा लिखित नहीं थी; किसान बनकर सुजानसिंह ने दया और साहस की परीक्षा ली।
  • युवक ने किसान को पहचान लिया — "उसके मन में एक संदेह हुआ, क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं? आवाज़ मिलती है, चेहरा-मोहरा भी वही।"
  • सामान्य भूलें

  • यह मानना कि युवक को हॉकी के कारण पद मिला — पद किसान की मदद के कारण मिला।
  • 'किसान' को असली किसान समझना — वह भेष बदले सुजानसिंह थे।
  • विज्ञापन में 'ग्रेजुएट' को अनिवार्य समझना — ग्रेजुएट होना ज़रूरी नहीं था, हृष्ट-पुष्ट होना ज़रूरी था।
  • 'मद' का अर्थ 'मदद' करना — मद = घमंड।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓प्रेमचंद की कहानी में सुजानसिंह ने किसान का भेष बनाकर उम्मीदवारों की दया और साहस की छिपी परीक्षा ली
    • ✓सच्ची योग्यता डिग्री या दिखावे में नहीं, बल्कि दया, उदारता, साहस और आत्मबल जैसे चरित्र-गुणों में है
    • ✓भाववाचक संज्ञाएँ (स्वार्थ, मद, उदारता, वात्सल्य, ईर्ष्या) और विपरीतार्थक शब्द पहचानना
    • ✓कहावतों ('गहरे पानी पैठने से ही मोती मिलता है', 'एक अनार सौ बीमार') का अर्थ और प्रयोग समझना
    • ✓कहानी में समस्या-समाधान, चित्रात्मक भाषा और संवादों की भूमिका पहचानना

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →कहानी शुरू करने से पहले पूछें: 'कक्षा का मॉनिटर चुनना हो तो किन गुणों को देखेंगे?' — उत्तर बोर्ड पर लिखकर अंत में कहानी से मिलाएँ
    • →गाड़ी फँसने वाले दृश्य और युवक-किसान संवाद का समूहों में अभिनय करवाएँ
    • →'दिखावा बनाम असली गुण' तालिका बनवाएँ — मिस्टर अ, द, स, ज, ल ने क्या दिखावा किया और जानकीनाथ ने क्या किया
    • →विज्ञापन की सामग्री पढ़कर बच्चों से रंगीन चार्ट पर 'देवगढ़ को दीवान चाहिए' विज्ञापन बनवाएँ
    • →'क्या हॉकी भी एक विद्या है?' विषय पर पक्ष-विपक्ष वाद-विवाद (हर समूह 5 मिनट) करवाएँ
    • →कहावतों को कहानी की घटनाओं से जोड़ने का खेल करवाएँ (एक अनार सौ बीमार, अधजल गगरी छलकत जाए)
    • →'आगे की कहानी' — जानकीनाथ के दीवान बनने के बाद क्या हुआ — कल्पना-लेखन करवाएँ

    📋 Assessment Questions

    1. नौकरी पाने के लिए उम्मीदवारों ने कौन-कौन से प्रयत्न किए?
    2. सुजानसिंह ने जानकीनाथ को ही दीवान के योग्य क्यों माना? कहानी के वाक्य से उत्तर दीजिए।
    3. 'मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या' — किनकी आँखों में क्या था और क्यों?
    4. कहानी से पाँच भाववाचक संज्ञाएँ और तीन विपरीतार्थक शब्द-युग्म लिखिए।
    5. कहानी का शीर्षक 'परीक्षा' क्यों उचित है?

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