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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः – Class 6 Sanskrit Chapter 14 Notes & NCERT PDF

Class 6SanskritChapter 14NCERT book: दीपकम् (Deepakam) - Sanskrit Class 6

Notes and a simple summary of Chapter 14 of the NCERT Class 6 Sanskrit book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

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पाठ 14: आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः (आलस्य ही सबसे बड़ा शत्रु)

पाठ-परिचय

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः — "आलस्य ही मनुष्य के शरीर में रहने वाला सबसे बड़ा शत्रु है।" यह पाठ एक रोचक कथा के माध्यम से परिश्रम का महत्त्व सिखाता है और साथ ही द्वितीया विभक्ति (कर्म — 'को') का अभ्यास कराता है।

पाठ की शुरुआत माँ और बच्चे के संवाद से होती है। बच्चा कहता है — "अद्य तु अवकाशदिनम् अस्ति, अहं सम्पूर्णदिने विश्रामं करिष्यामि।" माँ उत्तर देती है — "अवकाशः विद्यालयस्य अस्ति, न तु स्वाध्यायस्य।" (छुट्टी विद्यालय की है, स्वाध्याय की नहीं।) फिर माँ उसे एक कथा पढ़ने को कहती है।

पाठ-सार (कथा)

भिक्षुक और धनिक

एक बड़े गाँव में एक भिक्षुक रहता था। वह उन्नतः दृढकायः च युवकः (लम्बा, मज़बूत शरीर वाला युवक) था, फिर भी भीख माँगता था। वह सबसे कहता — "कृपया भिक्षां यच्छतु। दरिद्राय दानं करोतु। पुण्यं प्राप्नोतु।"

एक दिन एक धनिक (धनी व्यक्ति) उस मार्ग से आया। भिक्षुक ने सोचा — "आज तो बहुत धन मिलेगा!" उसने कहा — "आर्य! अहम् अतीव दरिद्रः अस्मि।" धनिक ने पूछा — "त्वं किम् इच्छसि?" भिक्षुक बोला — "अहं प्रभूतं धनम् इच्छामि।"

अनोखा सौदा

  • धनिक: "अहं तुभ्यं सहस्रं* रूप्यकाणि यच्छामि, त्वं मह्यं तव पादौ यच्छ।"*
  • भिक्षुक: "विना पादौ कथं वा चलामि?"

  • धनिक: "पञ्चसहस्रं* रूप्यकाणि स्वीकुरु, मह्यं तव हस्तौ यच्छ।"*
  • भिक्षुक: "हस्ताभ्यां विना अहं कथं भिक्षां स्वीकरोमि?"

    इसी तरह धनिक ने हज़ारों रुपयों में उसके अनेक अंग खरीदने चाहे, पर भिक्षुक ने मना कर दिया (निराकृतवान्)।

    धनिक की सीख

    पश्य मित्र! तव समीपे एव सहस्राधिकमूल्यकानि वस्तूनि सन्ति। तथापि किमर्थं त्वम् आत्मानं दुर्बलं मन्यसे? सौभाग्येन एव वयं मानवजन्म प्राप्तवन्तः।

    अर्थ: देखो मित्र! तुम्हारे पास हज़ारों से अधिक मूल्य की वस्तुएँ (अंग) हैं, फिर भी तुम स्वयं को कमज़ोर क्यों मानते हो? सौभाग्य से हमें मनुष्य-जन्म मिला है — इसे सफल करने का प्रयत्न करो।

    उस दिन से भिक्षुक ने भीख माँगना छोड़ दिया और परिश्रम से धन कमाकर सम्मानपूर्वक (सगौरवम्) जीवन जीने लगा।

    पाठ का मुख्य श्लोक

    आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः ।
    नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ॥
  • पदच्छेद: आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः, न अस्ति उद्यमसमः बन्धुः कृत्वा यं न अवसीदति।
  • अर्थ: आलस्य मनुष्य के शरीर में स्थित सबसे बड़ा शत्रु है। परिश्रम के समान कोई मित्र (बन्धु) नहीं, जिसे करके मनुष्य कभी दुःखी नहीं होता।
  • शब्दार्थ

  • दृढकायः – मज़बूत शरीर वाला
  • भिक्षाटनम् – भीख के लिए घूमना
  • प्रभूतम् – बहुत सारा
  • मह्यम् – मुझे, मेरे लिए
  • शरीराङ्गानि – शरीर के अंग
  • निराकृतवान् – अस्वीकार किया
  • दुर्बलम् – कमज़ोर
  • त्यक्त्वा – छोड़कर
  • नावसीदति – दुःखी नहीं होता
  • रिपुः – शत्रु
  • बन्धुः – मित्र, सम्बन्धी
  • उद्यमः – परिश्रम
  • व्याकरण-बिन्दु — द्वितीया विभक्ति (कर्म कारक, 'को')

    जिस पर क्रिया का फल पड़ता है, वह कर्म है और उसमें द्वितीया विभक्ति लगती है। उदाहरण: भक्तः देवं* नमति। छात्रः श्लोकं पठति।*

    शब्दरूप (द्वितीया — एक./द्वि./बहु.)

  • अकारान्त पुं. ग्राम: ग्रामम् – ग्रामौ – ग्रामान्; बालक: बालकम् – बालकौ – बालकान्
  • उकारान्त पुं. भिक्षु: भिक्षुम् – भिक्षू – भिक्षून्
  • आकारान्त स्त्री. माला: मालाम् – माले – मालाः; बालिका: बालिकाम् – बालिके – बालिकाः
  • ईकारान्त स्त्री. नदी: नदीम् – नद्यौ – नदीः; लेखनी: लेखनीम् – लेखन्यौ – लेखनीः
  • अकारान्त नपुं. फल: फलम् – फले – फलानि (प्रथमा जैसे ही)
  • सर्वनाम: अस्मद्: माम् – आवाम् – अस्मान्; युष्मद्: त्वाम् – युवाम् – युष्मान्; तद् (पुं.): तम् – तौ – तान्
  • अभ्यास के नमूने

  • चन्द्रशेखरः लेखं लिखति → (द्विवचन) चन्द्रशेखरः लेखौ लिखति
  • वयं सुभाषितं वदामः → (बहुवचन) वयं सुभाषितानि वदामः
  • शिक्षकः (अस्मद्) पाठयति → शिक्षकः माम् पाठयति
  • अहं (युष्मद्) नमस्करोमि → अहं त्वाम् नमस्करोमि
  • योग्यताविस्तर के श्लोक

    विना वेदं विना गीतां विना रामायणीं कथाम् ।
    विना कविं कालिदासं भारतं भारतं न हि ॥

    यहाँ 'विना' के साथ वेदं, गीतां, कथाम्, कालिदासम् — सब द्वितीया में हैं! (अर्थ: वेद, गीता, रामायण और कालिदास के बिना भारत, भारत नहीं है।)

    अभ्यास-संकेत

  • एकपद उत्तर: भिक्षुकः किं करोति स्म? → भिक्षाटनम्। कः आगच्छति? → धनिकः। सौभाग्येन किं प्राप्तवन्तः? → मानवजन्म।
  • आम्/न: "भिक्षुकः धनिकाय पादौ ददाति" → न (उसने मना किया)।
  • भाषाक्रीडा: शिक्षक प्रथमा रूप बोलें, एक दल द्वितीया एकवचन, दूसरा दल बहुवचन बोले।
  • परियोजना: अपनी दिनचर्या पर द्वितीया विभक्ति के दस वाक्य; एवरेस्ट विजेता अरुणिमा सिन्हा पर दस वाक्य।
  • सामान्य भूलें

  • नदी का द्वितीया बहुवचन नदीः है, "नद्यः" नहीं (नद्यः प्रथमा बहुवचन है)।
  • नपुंसकलिङ्ग में प्रथमा और द्वितीया के रूप एक जैसे होते हैं — फलम्/फले/फलानि; इसे भूल न करें।
  • "अस्मद्" की द्वितीया माम् है, "मम" नहीं (मम षष्ठी है)।
  • कथा में धनिक ने पहले पैर माँगे (1000 रु.) फिर हाथ (5000 रु.) — क्रम याद रखें।
  • भिक्षुक दुर्बल या बीमार नहीं था — वह दृढकायः था; यही कथा का व्यंग्य है।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓भिक्षुक-धनिक कथा से सीख: स्वस्थ शरीर ही अमूल्य धन है, परिश्रम से सम्मानपूर्ण जीवन मिलता है
    • ✓मुख्य श्लोक 'आलस्यं हि मनुष्याणां…' का पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ
    • ✓द्वितीया विभक्ति (कर्म कारक) की पहचान और प्रयोग
    • ✓अकारान्त, उकारान्त, आकारान्त, ईकारान्त, नपुंसक और सर्वनाम शब्दों के द्वितीया रूप
    • ✓वाक्य में एकवचन से द्विवचन/बहुवचन में कर्म का परिवर्तन

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →भिक्षुक और धनिक के संवाद का कक्षा में नाट्य-अभिनय कराएँ — 'पादौ यच्छ', 'हस्तौ यच्छ' वाले दृश्य बच्चों को बहुत भाते हैं
    • →चर्चा प्रश्न: 'यदि कोई आपकी आँखें एक लाख रुपये में माँगे तो?' — इससे शरीर के मूल्य का बोध कराएँ
    • →द्वितीया के लिए 'को' प्रश्न विधि सिखाएँ: 'क्रिया + किम्/कम्/काम्?' — जिसका उत्तर मिले वही कर्म
    • →पाठ की भाषाक्रीडा दो दलों में कराएँ: प्रथमा शब्द → द्वितीया एकवचन → बहुवचन, सही उत्तर पर अंक
    • →शब्दरूप-तालिका (ग्राम, माला, नदी, फल, अस्मद्) का बड़ा चार्ट बनवाकर कक्षा में लगाएँ
    • →चित्र-वर्णन: कक्षा/बाज़ार का चित्र दिखाकर छात्रों से द्वितीया वाले दस वाक्य बनवाएँ
    • →'विना वेदं विना गीतां' श्लोक से दिखाएँ कि 'विना' के साथ द्वितीया लगती है
    • →अरुणिमा सिन्हा की कहानी सुनाकर 'उद्यमसमो बन्धुः नास्ति' को जीवन से जोड़ें

    📋 Assessment Questions

    1. क्या छात्र कथा को क्रम से (भिक्षुक → धनिक → सौदा → सीख → परिवर्तन) सुना सकते हैं?
    2. क्या वे मुख्य श्लोक शुद्ध उच्चारण से बोलकर उसका अर्थ बता सकते हैं?
    3. क्या वे वाक्य में कर्म पहचानकर उसकी विभक्ति बता सकते हैं?
    4. क्या वे दिए गए शब्द (जैसे नदी, लेखनी, अस्मद्) का द्वितीया एकवचन/बहुवचन सही लिख सकते हैं?
    5. क्या वे अपनी दिनचर्या पर द्वितीया विभक्ति के शुद्ध वाक्य बना सकते हैं?

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