सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः) – Class 8 Sanskrit Chapter 11 Notes & NCERT PDF
Notes and a simple summary of Chapter 11 of the NCERT Class 8 Sanskrit book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.
🎧 Listen to the content
पाठ 11: सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः) (अच्छे उद्देश्य के लिए त्याग श्रेष्ठ – दूसरा भाग)
पाठ-परिचय
एकादशः पाठः – सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः) हितोपदेश की वीरवर-कथा का दूसरा और अन्तिम भाग है। पहले भाग में राजलक्ष्मी ने बताया था कि यदि वीरवर अपनी सबसे प्रिय वस्तु भगवती सर्वमङ्गला को अर्पित करे, तो राजा शूद्रक सौ वर्ष जीएगा। इस भाग में वीरवर और उसका पूरा परिवार राजा और राष्ट्र के हित के लिए सर्वस्व-त्याग को तैयार होता है, और अन्त में देवी की कृपा से सब कुछ शुभ होता है। पाठ का सन्देश है – अच्छे उद्देश्य के लिए किया गया त्याग श्रेष्ठ है; साथ ही कर्तव्यनिष्ठा, स्वामिभक्ति और विनम्रता।
पाठ-सार
परिवार का निर्णय
वीरवर घर गया और सोई हुई पत्नी, पुत्र और पुत्री को जगाकर राजलक्ष्मी से हुई पूरी बात बताई।
धनानि जीवितञ्चैव परार्थे प्राज्ञ उत्सृजेत् ।
सन्निमित्ते वरं त्यागो विनाशे नियते सति ॥ १ ॥
भावार्थ – बुद्धिमान् व्यक्ति दूसरों के हित के लिए धन और जीवन भी त्याग दे। जब शरीर का नाश निश्चित ही है, तब अच्छे कारण के लिए त्याग श्रेष्ठ है।
सर्वमङ्गला के मन्दिर में
सब भगवती सर्वमङ्गला के मन्दिर गए। वीरवर ने देवी-पूजा करके प्रार्थना की – भगवति ! प्रसीद, विजयतां महाराजः शूद्रकः – और पुत्र को उपहार रूप में अर्पित किया। उसने मन में सोचा कि स्वामी का ऋण चुक गया, पर पुत्र के बिना उसका जीवन निष्फल है; इसलिए उसने स्वयं को भी देवी को समर्पित कर दिया, और फिर पत्नी और पुत्री ने भी वैसा ही किया। राजा शूद्रक यह सब छिपकर (अदृश्य रहकर) देख रहा था।
राजा का भाव और देवी का वरदान
राजा ने सोचा:
जायन्ते च म्रियन्ते च मादृशाः क्षुद्रजन्तवः ।
अनेन सदृशो लोके न भूतो न भविष्यति ॥ २ ॥
भावार्थ – मेरे जैसे साधारण प्राणी जन्म लेते और मरते रहते हैं, पर इसके (वीरवर के) समान व्यक्ति संसार में न पहले हुआ, न आगे होगा।
राजा को लगा कि ऐसे व्यक्ति के बिना राज्य का भी क्या प्रयोजन – उसने भी देवी को अपना सर्वस्व अर्पित करना चाहा। तभी भगवती सर्वमङ्गला प्रकट हुईं, राजा का हाथ पकड़कर बोलीं – वत्स ! प्रसन्ना भवामि त्वयि, अलं साहसेन (मैं प्रसन्न हूँ, साहस मत करो) – अब तुम्हारे राज्य का नाश नहीं होगा।
राजा ने साष्टाङ्ग प्रणाम करके कहा – मुझे राज्य या जीवन की इच्छा नहीं; यदि आपकी कृपा है तो मेरी शेष आयु से भी वीरवर अपने पुत्र, पत्नी और पुत्री सहित जीवित हो उठे। देवी ने राजा के सत्त्वोत्कर्ष (सत्त्वगुण की पराकाष्ठा) और भृत्य-वात्सल्य (सेवक के प्रति स्नेह) से प्रसन्न होकर वर दिया – गच्छ, विजयी भव – और आदर्शचरित वीरवर भी परिवार सहित जीवित रहे। फिर देवी अदृश्य हो गईं।
अगला दिन
वीरवर प्रसन्नता से परिवार सहित घर गया और अगले दिन फिर द्वार पर सेवा में लग गया। राजा ने पूछा – का वार्ता राजपुत्र ! वीरवर ने विनम्रता से कहा – वह रोती हुई स्त्री मुझे देखकर अदृश्य हो गई; और कोई बात नहीं, स्वामी। (अपने त्याग का बखान नहीं किया।) राजा अत्यन्त प्रसन्न हुआ और वीरवर को समग्र कर्णाट प्रदेश दे दिया।
शब्दार्थ
व्याकरण-बिन्दु: वाच्य (तीन प्रकार)
कर्तृवाच्य
कर्मवाच्य
भाववाच्य
सन्धि (पाठ से)
अभ्यास-संकेत
योग्यताविस्तर (संक्षेप)
यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते निघर्षणच्छेदनतापताडनैः ।
तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते कुलेन शीलेन गुणेन कर्मणा ॥
(जैसे सोना घिसने, काटने, तपाने और पीटने – इन चार से परखा जाता है, वैसे ही मनुष्य कुल, शील, गुण और कर्म से।)
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓वीरवर-कथा का उत्तरार्ध – परिवार का निर्णय, सर्वमङ्गला-मन्दिर में समर्पण और देवी का वरदान
- ✓‘धनानि जीवितञ्चैव...’ और ‘जायन्ते च म्रियन्ते च...’ श्लोकों का भावार्थ
- ✓कर्तव्यनिष्ठा, राष्ट्रहित में त्याग, और वीरवर की विनम्रता का सन्देश
- ✓तीन वाच्य – कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य – के नियम और रूप (गम्यते, हस्यते)
- ✓अकर्मक धातु (हस्, क्रन्द्, स्था, स्ना, शी, भू) और पाठगत सन्धियाँ
👨🏫 Teaching Tips
- →पहले भाग का संक्षिप्त पुनःस्मरण विद्यार्थियों से कथा-श्रृंखला के रूप में करवाएँ
- →कथा के संवेदनशील अंश को सौम्य भाषा में पढ़ाएँ और बार-बार बताएँ कि देवी की कृपा से सब जीवित रहे
- →घटना-क्रम के सात वाक्य-पत्तियाँ बाँटकर समूहों से सही क्रम लगवाएँ
- →कर्तृ → कर्म वाच्य परिवर्तन के लिए एक ही वाक्य को दो रंगों में लिखकर दिखाएँ
- →भाववाच्य के लिए ‘मया/त्वया/अस्माभिः हस्यते’ की सामूहिक पुनरावृत्ति करवाएँ
- →‘यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते...’ सुभाषित पर चर्चा – मनुष्य की परख कैसे होती है
- →परियोजना: कथा का सरल संस्कृत में लघु नाटक बनाकर मञ्चन
📋 Assessment Questions
- शक्तिधर ने पिता की बात सुनकर क्या कहा? श्लोक सहित लिखिए।
- राजा ने वीरवर के विषय में क्या सोचा? श्लोक का अर्थ लिखिए।
- देवी ने प्रसन्न होकर क्या वर दिया और अन्त में वीरवर को क्या मिला?
- ‘बालकः ग्रामं गच्छति’ को कर्मवाच्य में बदलिए।
- भाववाच्य की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।
Ask the AI tutor about Class 8 Sanskrit Chapter 11
Get question answers, important questions, a quick MCQ quiz or a simple explanation of “सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)”. Free — sign in with Google.
- Explain सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः) in simple words
- Answer the NCERT exercise questions of Class 8 Sanskrit Chapter 11 step by step
- Give me 5 important questions with answers from सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)
- Quiz me with 5 MCQs on सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)
- Make last-minute revision notes for Class 8 Sanskrit Chapter 11
- Explain सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः) with an everyday example
👩🏫 Class 8 Sanskrit classes near you — online or at home
Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.
- Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
- Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
- At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.
Keep learning
- Maharashtra Board Class 8 SolutionsState board textbook solutions
- TalentJR FlashcardsQuick revision cards
- Coding for KidsLearn to code with TalentJR
All chapters in दीपकम् (Deepakam) - Sanskrit Class 8
- 1. संगच्छध्वं संवदध्वम्
- 2. अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका
- 3. सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु
- 4. प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः
- 5. गीता सुगीता कर्तव्या
- 6. डिजिभारतम् – युगपरिवर्तनम्
- 7. मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा
- 8. पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्
- 9. कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?
- 10. सन्निमित्ते वरं त्यागः (क-भागः)
- 11. सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)
- 12. सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते
- 13. वर्णोच्चारण-शिक्षा १
- 14. परिशिष्टम् १: व्याकरणम् (उपसर्गाः, प्रत्ययाः, विभक्तिः, सन्धिः)
- 15. परिशिष्टम् २: शब्दरूपाणि
- 16. परिशिष्टम् ३: धातुरूपाणि