सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु – Class 8 Sanskrit Chapter 3 Notes & NCERT PDF
Notes and a simple summary of Chapter 3 of the NCERT Class 8 Sanskrit book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.
🎧 Listen to the content
पाठ 3: सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु (सुभाषितों का रस पीकर जीवन सफल करो)
पाठ-परिचय
पाठ दादी (पितामही) और पोती के संवाद से शुरू होता है। पोती नई कथा सुनाने को कहती है; दादी कहती हैं — आज नीतिश्लोक सुनो। नीतिश्लोक ही सुभाषितानि हैं — "सुष्ठु भाषितानि इति सुभाषितानि" अर्थात् सुन्दर, हितकारी वचन। सुभाषित पढ़ने से आदर्श जीवन-निर्माण की प्रेरणा मिलती है और वे कर्तव्य-अकर्तव्य का स्पष्ट मार्गदर्शन करते हैं। पाठ में आठ सुभाषित हैं।
पाठ-सार (सुभाषित और भावार्थ)
१. भारतभूमि की महिमा
गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे ।
स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात् ॥ १ ॥
देवता भी गीत गाते हैं कि भारतभूमि में जन्म लेने वाले धन्य हैं। स्वर्ग और मोक्ष (अपवर्ग) के मार्गरूप इस भूमि पर देवता भी देवत्व छोड़कर बार-बार मनुष्य रूप में जन्म लेना चाहते हैं।
२. गुणी ही गुण जानता है
गुणी गुणं वेत्ति न वेत्ति निर्गुणः बली बलं वेत्ति न वेत्ति निर्बलः ।
पिको वसन्तस्य गुणं न वायसः करी च सिंहस्य बलं न मूषकः ॥ २ ॥
गुणवान् ही गुण पहचानता है, गुणहीन नहीं; बलवान् ही बल जानता है, निर्बल नहीं। कोयल (पिकः) वसन्त का गुण जानती है, कौआ (वायसः) नहीं; हाथी (करी) सिंह का बल जानता है, चूहा (मूषकः) नहीं।
३. सत्पुरुषों की नम्रता
भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैः नवाम्बुभिर्दूरविलम्बिनो घनाः ।
अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः स्वभाव एवैष परोपकारिणाम् ॥ ३ ॥
फल आने पर वृक्ष झुक जाते हैं, नए जल से भरे बादल नीचे आ जाते हैं, और समृद्धि पाकर सज्जन उद्धत (घमण्डी) नहीं होते — परोपकारियों का यही स्वभाव है। पाठ में व्यास-वचन भी है: परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम्।
४. पुरुष की चार कसौटियाँ
यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते निघर्षणच्छेदनतापताडनैः ।
तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते कुलेन शीलेन गुणेन कर्मणा ॥ ४ ॥
जैसे सोना चार प्रकार से परखा जाता है — घिसना, काटना, तपाना, पीटना — वैसे ही पुरुष चार बातों से परखा जाता है — कुल, शील (स्वभाव), गुण और कर्म।
५. आठ गुण जो पुरुष को चमकाते हैं
अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा च कौल्यं च दमः श्रुतं च ।
पराक्रमश्चाबहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च ॥ ५ ॥
आठ गुण: प्रज्ञा (विशेष बुद्धि), कौल्यम् (कुलीनता), दमः (इन्द्रिय-संयम), श्रुतम् (शास्त्र-ज्ञान), पराक्रमः, अबहुभाषिता (कम पर सार्थक बोलना), यथाशक्ति दानम्, कृतज्ञता। पाठ कहता है — गुणवान् पूज्यते नरः।
६. सच्ची सभा
न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः वृद्धा न ते ये न वदन्ति धर्मम् ।
धर्मः स नो यत्र न सत्यमस्ति सत्यं न तद्यच्छलमभ्युपैति ॥ ६ ॥
वह सभा नहीं जिसमें वृद्ध (अनुभवी) न हों; वे वृद्ध नहीं जो धर्म की बात न कहें; वह धर्म नहीं जिसमें सत्य न हो; और वह सत्य नहीं जिसमें छल मिला हो।
७. दुर्जन से मित्रता न करें
दुर्जनेन समं सख्यं प्रीतिं चापि न कारयेत् ।
उष्णो दहति चाङ्गारः शीतः कृष्णायते करम् ॥ ७ ॥
दुर्जन से मित्रता और प्रेम न करें — जैसे अंगारा गरम हो तो हाथ जलाता है और ठंडा हो तो हाथ काला कर देता है।
८. पुरुषार्थ और भाग्य
यथा ह्येकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत् ।
एवं पुरुषकारेण विना दैवं न सिध्यति ॥ ८ ॥
जैसे एक पहिये से रथ नहीं चलता, वैसे ही पुरुषार्थ (प्रयत्न) के बिना भाग्य सफल नहीं होता। पाठ: उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
शब्दार्थ
अभ्यास-संकेत
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓सुभाषित का अर्थ (सुष्ठु भाषितम्) और जीवन में उसका महत्त्व समझना
- ✓आठों सुभाषितों को कण्ठस्थ कर उनका सरल भावार्थ बताना
- ✓पुरुष की चार कसौटियाँ (कुल, शील, गुण, कर्म) और आठ गुण जानना
- ✓उपमाओं (कोयल-कौआ, हाथी-चूहा, अंगारा, एक पहिये का रथ) से नैतिक सन्देश समझना
- ✓पुरुषार्थ और भाग्य के सम्बन्ध को उदाहरण सहित समझना
👨🏫 Teaching Tips
- →सुभाषित-अन्त्याक्षरी करवाएँ — एक छात्र श्लोक का अन्तिम अक्षर दे, दूसरा उसी से शुरू करे
- →प्रत्येक सुभाषित का पदच्छेद-अन्वय बोर्ड पर समूह-कार्य से बनवाएँ
- →सोने की चार परीक्षाओं को चित्र या अभिनय से दिखाएँ, फिर पुरुष की कसौटियों से जोड़ें
- →'एक पहिये का रथ' — खिलौना गाड़ी का एक पहिया हटाकर पुरुषार्थ-भाग्य समझाएँ
- →आठ गुणों की सूची बनाकर छात्र अपने आदर्श व्यक्ति में वे गुण पहचानें
- →प्रतिदिन एक सुभाषित 'आज का विचार' के रूप में प्रार्थना-सभा में बुलवाएँ
📋 Assessment Questions
- क्या छात्र 'सुभाषित' शब्द की व्युत्पत्ति बता सकते हैं?
- क्या वे आठों गुणों के नाम और अर्थ बता सकते हैं?
- क्या वे किसी सुभाषित का भावार्थ अपने शब्दों में लिख सकते हैं?
- क्या वे रिक्त स्थान (फलोद्गमैः, शीलेन, कृतज्ञता, सिध्यति) पूरे कर सकते हैं?
Ask the AI tutor about Class 8 Sanskrit Chapter 3
Get question answers, important questions, a quick MCQ quiz or a simple explanation of “सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु”. Free — sign in with Google.
- Explain सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु in simple words
- Answer the NCERT exercise questions of Class 8 Sanskrit Chapter 3 step by step
- Give me 5 important questions with answers from सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु
- Quiz me with 5 MCQs on सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु
- Make last-minute revision notes for Class 8 Sanskrit Chapter 3
- Explain सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु with an everyday example
👩🏫 Class 8 Sanskrit classes near you — online or at home
Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.
- Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
- Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
- At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.
Keep learning
- Maharashtra Board Class 8 SolutionsState board textbook solutions
- TalentJR FlashcardsQuick revision cards
- Coding for KidsLearn to code with TalentJR
All chapters in दीपकम् (Deepakam) - Sanskrit Class 8
- 1. संगच्छध्वं संवदध्वम्
- 2. अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका
- 3. सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु
- 4. प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः
- 5. गीता सुगीता कर्तव्या
- 6. डिजिभारतम् – युगपरिवर्तनम्
- 7. मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा
- 8. पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्
- 9. कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?
- 10. सन्निमित्ते वरं त्यागः (क-भागः)
- 11. सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)
- 12. सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते
- 13. वर्णोच्चारण-शिक्षा १
- 14. परिशिष्टम् १: व्याकरणम् (उपसर्गाः, प्रत्ययाः, विभक्तिः, सन्धिः)
- 15. परिशिष्टम् २: शब्दरूपाणि
- 16. परिशिष्टम् ३: धातुरूपाणि