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प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः – Class 8 Sanskrit Chapter 4 Notes & NCERT PDF

Class 8SanskritChapter 4NCERT book: दीपकम् (Deepakam) - Sanskrit Class 8

Notes and a simple summary of Chapter 4 of the NCERT Class 8 Sanskrit book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

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पाठ 4: प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः (यह महामना देशभक्त गोपबन्धु प्रणाम के योग्य हैं)

पाठ-परिचय

यह पाठ ओडिशा के महान समाजसेवक और स्वतन्त्रता-सेनानी उत्कलमणि गोपबन्धु दास के जीवन पर आधारित है। पाठ एक कक्षा-चर्चा से आरम्भ होता है — ओडिशा के केन्द्रापड़ा जनपद में महानदी में भयंकर बाढ़ (जलप्लावः) आई है; घर नष्ट हो गए, लोग भूखे हैं, पशु बह गए। शिक्षक कहते हैं कि हमें ऐसे दुःखी लोगों की सहायता करनी चाहिए — जैसे गोपबन्धु ने बाढ़-पीड़ितों की निःस्वार्थ सेवा की थी।

पाठ-सार

भोजन का प्रसंग (दया)

एक बार आचार्य हरिहरदास ने सत्यवादी-वनविद्यालय के सभी अध्यापकों को भोजन पर बुलाया। केले के पत्तों पर स्वादिष्ट व्यंजन परोसे गए। गोपबन्धु ने हँसकर कहा:

भोजनस्यातिदौर्लभ्यं जीवनाय सुखप्रदम् ।
तदर्थं भोजनं कुर्याः मा शरीरे दयां कुरु ॥

उसी समय बाहर से करुण पुकार आई — "माँ! मैं भूखा हूँ, तीन दिन से कुछ नहीं खाया।" यह सुनते ही गोपबन्धु की आँखें आँसुओं से भर आईं (अश्रुपूर्णनयनः)। बिना कुछ सोचे वे अपना परोसा हुआ भोजन उठाकर बाहर गए और भिक्षुक को खिला दिया।

जीवन-परिचय

  • जन्म: ओडिशा के पुरी जनपद में साक्षीगोपाल के समीप सुआण्डो ग्राम।
  • सत्यवादी-वनविद्यालय के अध्यापक और प्रसिद्ध पञ्चमित्रों (पाँच मित्रों) में से एक; स्वतन्त्रता-संग्रामी।
  • पढ़ाई के समय से ही गरीबों और रोगियों की सेवा की; छात्रों को निःशुल्क पढ़ाया; निरक्षरता दूर करने के लिए सदा प्रयत्नशील।
  • खादी के लिए स्वयं सूत कातते थे; सदा स्वदेशी वस्त्रों और वस्तुओं का उपयोग किया।
  • महात्मा गांधी की प्रेरणा से स्वतन्त्रता-आन्दोलन में भाग लिया और दो वर्ष कारावास भोगा।
  • कारागार में ओड़िआ भाषा में 'बन्दीर आत्मकथा', 'कारा-कविता', 'धर्मपद', 'गो-माहात्म्य', 'नचिकेता-उपाख्यान' आदि पुस्तकें लिखीं।
  • मरणासन्न पुत्र को छोड़कर भी बाढ़-पीड़ित हज़ारों लोगों की सेवा के लिए घर से निकल पड़े।
  • प्रसिद्ध वचन

    स्वदेशभूमौ मम लीयतां तनुः, स्वदेशलोकास्तदनु प्रयान्तु नु ।
    स्वराज्यमार्गे यदि गर्तमालिका, ममास्थिमांसैः परिपूरितास्तु सा ॥

    भावार्थ – मेरा शरीर अपनी देशभूमि में विलीन हो जाए; देशवासी मेरे पीछे-पीछे चलें। स्वराज्य के मार्ग में यदि गड्ढों की शृंखला हो, तो वह मेरी हड्डियों और मांस से भर जाए। (मूल ओड़िआ: मिशु मोर देह ए देश माटिरे…)

    संस्थाएँ और सम्मान

  • सत्यवादी-वनविद्यालय, दरिद्रनारायण-सेवासंघ, सत्यवादी-मुद्रणालय और दैनिक पत्र 'समाज' के संस्थापक। 'समाज' सौ से अधिक वर्षों से आज भी प्रतिदिन प्रकाशित होता है।
  • वैज्ञानिक आचार्य प्रफुल्लचन्द्र राय ने उन्हें 'उत्कलमणि' उपाधि से सम्मानित किया।
  • उत्कलमणिरित्याख्यः प्रसिद्धो लोकसेवकः ।
    प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः ॥

    शब्दार्थ

  • जलप्लावपीडितानाम् – बाढ़-पीड़ितों का
  • अनाहारेण – भोजन न मिलने से
  • अकुण्ठम् – बिना संकोच, पूरे मन से
  • समादृतः – सम्मानित
  • व्यञ्जनानि – पकवान
  • निःशुल्कम् – बिना शुल्क
  • बुभुक्षितः – भूखा
  • दयाविगलितहृदयः – दया से पिघले हृदय वाला
  • अश्रुपूर्णनयनः – आँसुओं से भरी आँखों वाला
  • परिवेषितम् – परोसा हुआ
  • कारावासम् – जेल में रहना
  • सहस्रशः – हज़ारों
  • लीयताम् – विलीन हो जाए
  • गर्तमालिका – गड्ढों की शृंखला
  • महामनाः – उच्च विचार वाला
  • व्याकरण-बिन्दु

    पूर्वरूप-सन्धि

  • जब पहले पद के अन्त में ए या ओ हो और अगला पद अ से शुरू हो, तो 'अ' का लोप होकर अवग्रह (ऽ) लगता है।
  • देशभक्तो + अयम् = देशभक्तोऽयम्
  • सर्वे + अपि = सर्वेऽपि
  • पशवो + अपि = पशवोऽपि
  • बुभुक्षितो + अस्मि = बुभुक्षितोऽस्मि
  • अश्रुपूर्णनयनो + अभवत् = अश्रुपूर्णनयनोऽभवत्
  • क्तवतु-प्रत्यय (पुंलिङ्ग → स्त्रीलिङ्ग)

  • गतवान् → गतवती; प्राप्तवान् → प्राप्तवती; उपविष्टवान् → उपविष्टवती; भुक्तवान् → भुक्तवती
  • अभ्यास-संकेत

  • 'समाज'-दिनपत्रिका के प्रतिष्ठाता → गोपबन्धुः
  • गोपबन्धु ने अपना भोजन किसे दिया → भिक्षुकाय
  • कारावास → वर्षद्वयम् (दो वर्ष)
  • उपाधि → उत्कलमणिः
  • सामान्य भूलें

  • 'देशभक्तोऽयम्' को दीर्घ-सन्धि समझना — यह पूर्वरूप-सन्धि है।
  • अवग्रह (ऽ) लिखना भूल जाना।
  • उपाधि देने वाले का नाम गलत लिखना — उपाधि प्रफुल्लचन्द्र राय ने दी।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓उत्कलमणि गोपबन्धु दास के जीवन, सेवा और त्याग को जानना
    • ✓दया, निःस्वार्थ सेवा और स्वदेश-प्रेम के मूल्य आत्मसात् करना
    • ✓प्रसिद्ध देशभक्ति-श्लोक 'स्वदेशभूमौ मम लीयतां तनुः' का अर्थ समझना
    • ✓पूर्वरूप-सन्धि (ए/ओ + अ → ऽ) पहचानना और प्रयोग करना
    • ✓क्तवतु-प्रत्यय वाले पुंलिङ्ग रूपों को स्त्रीलिङ्ग (गतवती) में बदलना

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →समाचार की किसी बाढ़-घटना से पाठ आरम्भ करें और सहायता के उपायों पर चर्चा करें
    • →भोजन-प्रसंग का छोटा नाट्य-मंचन करवाएँ
    • →गोपबन्धु की जीवन-रेखा (जन्म, विद्यालय, आन्दोलन, कारावास, पुस्तकें, सम्मान) चार्ट पर बनवाएँ
    • →देशभक्ति-श्लोक का सस्वर पाठ और उसका ओड़िआ रूप सुनाकर भाषाई विविधता दिखाएँ
    • →पूर्वरूप-सन्धि के लिए पाठ से सभी 'ऽ' वाले शब्द खोजने की प्रतियोगिता
    • →सेवा-परियोजना: कक्षा मिलकर किसी ज़रूरतमन्द के लिए संग्रह-अभियान की योजना संस्कृत वाक्यों में लिखे

    📋 Assessment Questions

    1. क्या छात्र गोपबन्धु के जन्म-स्थान, संस्थाओं और उपाधि के बारे में बता सकते हैं?
    2. क्या वे भोजन-प्रसंग से गोपबन्धु के चरित्र का गुण पहचान सकते हैं?
    3. क्या वे पूर्वरूप-सन्धि वाले शब्दों का विच्छेद कर सकते हैं?
    4. क्या वे क्तवतु-रूपों को स्त्रीलिङ्ग में बदल सकते हैं?

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    All chapters in दीपकम् (Deepakam) - Sanskrit Class 8

    1. 1. संगच्छध्वं संवदध्वम्
    2. 2. अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका
    3. 3. सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु
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    5. 5. गीता सुगीता कर्तव्या
    6. 6. डिजिभारतम् – युगपरिवर्तनम्
    7. 7. मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा
    8. 8. पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्
    9. 9. कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?
    10. 10. सन्निमित्ते वरं त्यागः (क-भागः)
    11. 11. सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)
    12. 12. सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते
    13. 13. वर्णोच्चारण-शिक्षा १
    14. 14. परिशिष्टम् १: व्याकरणम् (उपसर्गाः, प्रत्ययाः, विभक्तिः, सन्धिः)
    15. 15. परिशिष्टम् २: शब्दरूपाणि
    16. 16. परिशिष्टम् ३: धातुरूपाणि