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घर की याद – Class 9 Hindi Chapter 12 Notes & NCERT PDF

Class 9HindiChapter 12NCERT book: गंगा (Ganga) - Hindi Class 9

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पाठ 12: घर की याद

कवि-परिचय

भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म सन् 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) में हुआ। साहित्य के साथ स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय कवियों में वे प्रमुख हैं।

  • प्रमुख रचनाएँ: गीत-फ़रोश, खुशबू के शिलालेख, चकित है दुख, अँधेरी कविताएँ, बुनी हुई रस्सी, कवितांतर, शतदल, गांधीपंचशती, त्रिकाल संध्या।
  • बुनी हुई रस्सी पर साहित्य अकादमी पुरस्कार।
  • 1952–55 में हैदराबाद से प्रकाशित पत्रिका 'कल्पना' का संपादन; 1955–58 आकाशवाणी के हिंदी कार्यक्रमों से संबद्ध; संपूर्ण गांधी वाङ्मय का संपादन।
  • निधन: सन् 1985।
  • कविता की पृष्ठभूमि

    सन् 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग लेने पर कवि को तीन वर्ष का कारावास हुआ। जेल में रहते हुए उन्होंने 'घर की याद' लिखी। कविता की केंद्रीय संवेदना परिवार की स्मृति है। कवि सावन के बादल को संदेशवाहक बनाकर घर संदेश भेजता है — कि जेल के कष्ट न बताए, सबको सांत्वना दे।

    कविता-सार

    बरसता पानी और बेचैन मन

    आज पानी गिर रहा है,
    बहुत पानी गिर रहा है,
    रात-भर गिरता रहा है,
    प्राण मन घिरता रहा है,

    लगातार बारिश कवि के मन की चिंता और बेचैनी का प्रतीक है। "एक छिन सौ बरस है रे" — जेल में एक क्षण भी सौ वर्ष जैसा लगता है।

    परिवार की याद

  • घर में चार भाई, चार बहिनें — "भुजा भाई प्यार बहिनें"; बहिन मायके आई है — "हाय रे परिताप के घर!" (घर में दुख का वातावरण)।
  • माँ — "बिन-पढ़ी", दुख में गढ़ी हुई; जिसकी गोद में सिर रखो तो दुख नहीं रहता। उसे लिखना नहीं आता, इसलिए वह पत्र नहीं भेज सकती।
  • गिर रहा पानी झरा-झर,
    हिल रहे पत्ते हरा-हर,
    बह रही है हवा सर-सर,
    काँपते हैं प्राण थर-थर,

    पिता का चित्र

    पिताजी भोले बहादुर,
    वज्र-भुज नवनीत-सा उर,

    पिता की भुजाएँ वज्र-सी कठोर और हृदय मक्खन-सा कोमल — दृढ़ और संवेदनशील। बुढ़ापा उन्हें छू नहीं गया; वे मौत और शेर के आगे भी नहीं हिचकते। गीता-पाठ, दो सौ साठ दंड, मुगदर — फिर भी पाँचवें बेटे (कवि) का नाम लेकर रो पड़े होंगे। कवि को वे 'सोने पर सुहागा' कहते थे।

    माँ-पिता की बातचीत (कल्पना)

  • माँ ने कहा होगा — "आँख में किसलिए पानी, वहाँ अच्छा है भवानी... पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता" — स्नेहमयी और दृढ़ माँ।
  • पिताजी ने कहा होगा — "कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ" — पर याद आया कि भवानी को बरसात प्यारी थी, वह बाड़े में लौकी का बीज लगाता था।
  • सावन को संदेश

    हे सजीले हरे सावन,
    हे कि मेरे पुण्य पावन,
    तुम बरस लो वे न बरसें,
    पाँचवें को वे न तरसें,

    कवि सावन से कहता है — उन्हें बताना कि मैं लिख-पढ़ रहा हूँ, "मस्त हूँ मैं", कातने में व्यस्त हूँ, वजन सत्तर सेर है, "दुख डटकर ठेलता हूँ"। पर यह मत कहना कि मैं जागता हूँ, मौन हूँ, आदमी से भागता हूँ। कवि अपना दुख परिजनों से छिपाना चाहता है।

    एक पत्ता टूट जाए,
    बस कि धारा फूट जाए,

    पिता इतने भावुक हैं कि एक पत्ता टूटे तो आँसुओं की धारा फूट पड़े।

    शब्दार्थ

  • छिन — क्षण
  • घनेरी — गाढ़ी, घनी
  • तिरना — तैरना
  • परिताप — अत्यधिक दुख
  • चतुर्दिक् — चारों ओर
  • वज्र — बहुत कठोर
  • नवनीत — मक्खन
  • उर — हृदय
  • झंझा — आँधी-तूफ़ान
  • लरजना — काँपना
  • निहायत — अत्यधिक
  • तृषा — प्यास, लालसा
  • क्लेश — कष्ट
  • ख़म — झुकाव
  • विरस — नीरस
  • चुआ — टपका (स्थानीय शब्द; मन भर आया)
  • काव्य-सौन्दर्य / भाषा-बिन्दु

  • ध्वन्यात्मकता / नाद-सौंदर्य: झरा-झर, हरा-हर, सर-सर, थर-थर।
  • पंक्तियों का दोहराव: "बहुत पानी गिर रहा है", "हे सजीले हरे सावन..."।
  • लोकभाषा की सहजता: छिन, फलानी, भौजी, चुआ।
  • संबोधनात्मकता: सावन को सीधा संबोधन।
  • अलंकार: "वज्र-भुज नवनीत-सा उर" (उपमा), "देह एक पहाड़ जैसे, मन कि बड़ का झाड़ जैसे" (उपमा)।
  • व्याकरणिक पहचान (पुस्तक का अभ्यास)

  • "पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा" — बुढ़ापा: संज्ञा (भाववाचक); व्यापा: क्रिया; जिनको: सर्वनाम
  • "खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह" — खुले: विशेषण; वह: सर्वनाम; बदन: संज्ञा; फिरता: क्रिया
  • "एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए" — एक: विशेषण (संख्यावाचक); फूट जाए: क्रिया; पत्ता: संज्ञा
  • "हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन" — सजीले: विशेषण; मेरे: सर्वनाम (सार्वनामिक विशेषण); सावन: संज्ञा
  • केन्द्रीय भाव

    कविता घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा का मार्मिक चित्र है। देश के लिए जेल गया कवि परिवार के प्रेम में डूबा है, फिर भी अपना दुख छिपाकर परिजनों को धैर्य देना चाहता है। घर यहाँ केवल स्थान नहीं, भावनाओं और संबंधों का केंद्र है।

    सामान्य भूलें

  • यह मानना कि कवि विदेश से पत्र लिख रहा है — वह जेल से, परिवार के लिए लिख रहा है।
  • "और कहना मस्त हूँ मैं" का अर्थ "कवि बहुत खुश है" लिखना — वह दुख छिपा रहा है।
  • "वज्र-भुज नवनीत-सा उर" से पिता को केवल कठोर बताना — वे दृढ़ भी और संवेदनशील भी हैं।
  • कवि को परिवार का बड़ा बेटा लिखना — वह पाँचवाँ है।
  • माँ को कमज़ोर समझना — माँ स्नेहमयी और दृढ़ है; कहती है कि पीछे हटना उसकी कोख को लजाना होगा।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓भवानीप्रसाद मिश्र — स्वाधीनता सेनानी कवि; 'बुनी हुई रस्सी' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार
    • ✓1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में कारावास के दौरान लिखी कविता — परिवार की स्मृति केंद्रीय संवेदना
    • ✓माँ (स्नेहमयी, दृढ़) और पिता (वज्र-भुज, नवनीत-सा उर) के सजीव चित्र
    • ✓सावन का बादल संदेशवाहक; कवि का दुख छिपाकर परिजनों को धैर्य देना
    • ✓ध्वन्यात्मक शब्द, पंक्तियों का दोहराव, लोकभाषा; संज्ञा-सर्वनाम-विशेषण-क्रिया की पहचान

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →कविता से पहले 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की संक्षिप्त पृष्ठभूमि बताएँ
    • →झरा-झर, थर-थर जैसे ध्वनि-शब्दों का सामूहिक वाचन/ऑडियो रिकॉर्डिंग करवाएँ
    • →माँ-पिता की कल्पित बातचीत को संवाद-लेखन और रोल-प्ले के रूप में प्रस्तुत करवाएँ
    • →'कवि की माँ पत्र लिख पातीं तो क्या लिखतीं' — पत्र-लेखन गतिविधि
    • →पुस्तक के व्याकरण अभ्यास से संज्ञा-सर्वनाम-विशेषण-क्रिया की पहचान का कार्यपत्रक
    • →परिवार-वृक्ष बनवाएँ और हर सदस्य पर दो पंक्तियाँ लिखवाएँ
    • →संयुक्त और एकल परिवार पर कक्षा-वाद-विवाद

    📋 Assessment Questions

    1. कवि ने यह कविता कहाँ और किन परिस्थितियों में लिखी?
    2. 'वज्र-भुज नवनीत-सा उर' से पिता के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि बनती है?
    3. कवि सावन से अपना कौन-सा हाल बताने और कौन-सा छिपाने को कहता है?
    4. लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है?
    5. 'एक पत्ता टूट जाए' में 'एक' और 'फूट जाए' का व्याकरणिक परिचय दीजिए।

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