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क्या लिखूँ? – Class 9 Hindi Chapter 2 Notes & NCERT PDF

Class 9HindiChapter 2NCERT book: गंगा (Ganga) - Hindi Class 9

Notes and a simple summary of Chapter 2 of the NCERT Class 9 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

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पाठ 2: क्या लिखूँ?

पाठ-परिचय

'क्या लिखूँ?' एक निबंध है। इसके लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हैं। उनका जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में हुआ था। वे कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार और हास्य-व्यंग्यकार के रूप में प्रसिद्ध हैं, पर निबंध लेखन के लिए विशेष रूप से याद किए जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं:

  • निबंध संग्रह: पंच-पात्र, पद्म-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने
  • काव्य: अश्रुदल, शतदल
  • कहानी संग्रह: झलमला, त्रिवेणी
  • उन्होंने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन किया। सन् 1971 में उनका निधन हुआ।

    पुस्तक के अनुसार इस निबंध में लेखक ने निबंध की रचना-प्रक्रिया को समझाया है। 'दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार', इन दो विषयों को लेकर उन्होंने निबंध लेखन की कठिनाइयों की चर्चा की है। निबंध की आत्मपरक शैली, जिसमें लेखक स्वयं पाठक से संवाद करता है, इसे जीवंत और आत्मीय बनाती है।

    पाठ-सार

    समस्या — दो निबंध, दो घंटे

    लेखक एक मास्टर हैं। उन्हें नमिता और अमिता के लिए आदर्श निबंध लिखने हैं। नमिता चाहती है कि वे 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' पर लिखें और अमिता का आग्रह है कि 'समाज-सुधार' पर लिखें। दोनों विषय परीक्षा में आ चुके हैं, और लेखक के पास केवल दो घंटे हैं।

    गार्डिनर का मत — हैट और खूँटी

    अंग्रेजी निबंधकार ए.जी. गार्डिनर कहते हैं कि लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है। उस समय विषय की चिंता नहीं रहती:

    हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है... असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।

    अर्थात मन के भाव ही मुख्य हैं, विषय नहीं। पर लेखक मानते हैं कि उन्हें ऐसी स्थिति का अनुभव नहीं हुआ। उन्हें सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है।

    निबंधशास्त्र के आचार्यों की सलाह

  • निबंध छोटा होना चाहिए, क्योंकि बड़े निबंध में सुंदरता नहीं बनी रहती।
  • निबंध के दो प्रधान अंग हैं: सामग्री और शैली। सामग्री के लिए मनन और अध्ययन चाहिए, पर लेखक के पास न पुस्तकालय है, न विश्वकोश।
  • पहले रूपरेखा बनानी चाहिए, पर लेखक को यह कठिन लगता है। गार्डिनर को तो शीर्षक बनाने में ही सबसे अधिक कठिनाई होती थी। लेखक के अनुसार शेक्सपीयर ने भी घबराकर एक नाटक का नाम 'जैसा तुम चाहो' रख दिया।
  • भाषा में प्रवाह हो और वाक्य छोटे पर परस्पर जुड़े हों।
  • लेखक व्यंग्य करते हैं कि मास्टर होने के नाते विद्वत्ता दिखाने के लिए वाक्य कम-से-कम आधे पृष्ठ के होने चाहिए, जैसे बाणभट्ट ने कादंबरी में लिखे। उनके अनुसार श्रीहर्ष और सेनापति ने भी जान-बूझकर दुर्बोधता रखी।

    मानटेन की पद्धति

    अंग्रेजी निबंधकारों ने दूसरी पद्धति अपनाई, जिसके जन्मदाता मानटेन माने जाते हैं। उन्होंने जो देखा, सुना और अनुभव किया, वही लिख दिया। ऐसे निबंध मन की स्वच्छंद रचनाएँ होते हैं और उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है। लेखक यही पद्धति अपनाने का निर्णय लेते हैं।

    अमीर खुसरो की युक्ति

    लेखक को अमीर खुसरो की कहानी याद आती है। खुसरो ने चार स्त्रियों की चार माँगें (खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल) एक ही पद्य में पूरी कर दी थीं:

    खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला।
    आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।

    इसी युक्ति से लेखक दोनों विषयों को एक ही निबंध में जोड़ देते हैं।

    निबंध — दूर के ढोल और समाज-सुधार

    दूर के ढोल इसलिए सुहावने लगते हैं क्योंकि उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती। दूर बैठा व्यक्ति ढोल सुनकर किसी विवाहोत्सव या नव-वधू की कल्पना कर लेता है। इसी तरह दूरी से यथार्थ की कठोरता का अनुभव नहीं होता:

  • तरुणों को भविष्य उज्ज्वल लगता है और वृद्धों को अतीत सुखद।
  • दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं।
  • तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक।

    इसी कारण वर्तमान सदा सुधारों का काल बना रहता है। बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी जैसे सुधारक हुए, पर न दोषों का अंत है, न सुधारों का। जो कभी सुधार थे, वही आज दोष बन जाते हैं। आज के तरुण कल वृद्ध होकर अतीत का स्वप्न देखेंगे, क्योंकि दूर के ढोल सुहावने होते हैं।

    शब्दार्थ

  • स्फूर्ति — फुर्ती, उत्साह
  • आवेग — मन का तीव्र भाव
  • उत्थित — उठा हुआ, उत्पन्न
  • विज्ञ — जानकार, विद्वान
  • अतएव — इसलिए
  • दुर्बोधता — कठिनाई से समझ में आना
  • गांभीर्य — गंभीरता
  • स्वच्छंद — स्वतंत्र, बंधन-रहित
  • अनुभूति — अनुभव
  • कर्कशता — कठोरता, कानों को चुभने वाली ध्वनि
  • क्षुब्ध — अशांत, बेचैन
  • समीपस्थ / दूरस्थ — पास का / दूर का
  • प्रगतिशील — आगे बढ़ने वाला
  • भाषा-बिन्दु

    समास (पुस्तक के 'व्याकरण की बात' से)

    समास का अर्थ है संक्षेप। पहला पद पूर्वपद और दूसरा उत्तरपद कहलाता है। समास से बना शब्द समस्त पद है, और उसे अलग करना समास विग्रह है। समास के छह भेद:

  • तत्पुरुष — उत्तरपद प्रधान, परसर्ग का लोप: रसोईघर = रसोई के लिए घर; निबंधशास्त्र = निबंध का शास्त्र
  • कर्मधारय — विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान: नीलकमल = नीले रंग का कमल
  • द्विगु — पूर्वपद संख्यावाची: तिरंगा = तीन रंगों का समाहार
  • बहुव्रीहि — अन्य पद प्रधान: पीतांबर = पीला है अंबर जिसका, अर्थात् कृष्ण/विष्णु
  • द्वंद्व — दोनों पद प्रधान: भाई-बहन = भाई और बहन
  • अव्ययीभाव — पूर्वपद अव्यय: यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार; धीरे-धीरे
  • उपसर्ग और प्रत्यय

  • उपसर्ग शब्द के आरंभ में लगते हैं: दुर् + बोध = दुर्बोध; अन् + आदि = अनादि
  • प्रत्यय शब्द के अंत में लगते हैं: सुधार + क = सुधारक; कठिन + आई = कठिनाई
  • लोकोक्ति

    'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' एक लोकोक्ति है, यानी लोक में प्रचलित ऐसा वाक्य जो कोई सीख देता है। दूसरा उदाहरण: 'आम के आम गुठलियों के दाम'।

    निबंध

    'निबंध' का शाब्दिक अर्थ है बाँधना (नि + बंध), यानी भली-भाँति गठा हुआ।

    केन्द्रीय भाव / सीख

  • अच्छे लेखन के लिए सच्चा अनुभव और भाव नियमों से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
  • दूरी से चीज़ें सुंदर लगती हैं; निकट आने पर यथार्थ की कठोरता दिखती है।
  • समाज में सुधार की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
  • सामान्य भूलें

  • नमिता का विषय 'दूर के ढोल' है और अमिता का 'समाज-सुधार'। इन्हें उलटा न लिखें।
  • 'हैट-खूँटी' वाली बात गार्डिनर की है, मानटेन की नहीं।
  • निबंध के अनुसार सुधार भी समाप्त नहीं होते और दोष भी नहीं। यह कहना गलत है कि दोष समाप्त हो जाते हैं।
  • 'अव्ययीभाव' और 'बहुव्रीहि' में भ्रम न करें: बहुव्रीहि में कोई तीसरा अर्थ निकलता है।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓निबंध की रचना-प्रक्रिया — विषय चयन, सामग्री संग्रह, रूपरेखा, शैली — को समझना
    • ✓गार्डिनर (भाव प्रधान) और मानटेन (अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन) की पद्धतियों में अंतर जानना
    • ✓'दूर के ढोल सुहावने' के माध्यम से तरुण-वृद्ध मनोविज्ञान और समाज-सुधार की निरंतरता समझना
    • ✓समास के छह भेदों की पहचान और समास-विग्रह करना
    • ✓उपसर्ग-प्रत्यय से नए शब्द बनाना तथा लोकोक्ति का प्रयोग करना

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →पुस्तक के आरेख (प्रेरणा → विषय चयन → सामग्री संग्रह → रूपरेखा → शैली → लेखन और समापन) को बोर्ड पर बनाकर निबंध-प्रक्रिया समझाएँ।
    • →'हैट और खूँटी' के रूपक को किसी रोज़मर्रा उदाहरण से जोड़कर स्पष्ट करें।
    • →अमीर खुसरो की 'अनमेली' को कक्षा में पढ़वाकर विद्यार्थियों से ऐसी ही मज़ेदार पंक्ति बनवाएँ।
    • →पाठ में आए सामासिक शब्द (निबंधशास्त्र, समाज-सुधार, विवाहोत्सव) ढूँढ़ने की प्रतियोगिता कराएँ।
    • →'तरुण क्रांति के समर्थक, वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक' पर भाव-विस्तार लिखवाएँ।
    • →पाठ में आए सुधारकों (बुद्ध, कबीर, राममोहन राय आदि) पर छोटी परियोजना दें।
    • →विद्यार्थियों से किसी ऐसे अनुभव पर डायरी लिखवाएँ जब दूर से कुछ और लगा और पास से कुछ और।

    📋 Assessment Questions

    1. निबंध लेखन के विषय में गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
    2. लेखक ने दो विषयों को एक निबंध में कैसे जोड़ा? अमीर खुसरो की कहानी का क्या योगदान है?
    3. तरुण और वृद्ध दोनों वर्तमान से असंतुष्ट क्यों रहते हैं?
    4. 'पीतांबर', 'तिरंगा', 'यथाशक्ति' का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए।
    5. 'दुर्बोध' और 'सुधारक' में उपसर्ग/प्रत्यय पहचानिए।

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