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रीढ़ की हड्डी – Class 9 Hindi Chapter 6 Notes & NCERT PDF

Class 9HindiChapter 6NCERT book: गंगा (Ganga) - Hindi Class 9

Notes and a simple summary of Chapter 6 of the NCERT Class 9 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

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पाठ 6: रीढ़ की हड्डी

पाठ-परिचय

'रीढ़ की हड्डी' एक एकांकी है, जिसके लेखक जगदीशचंद्र माथुर हैं। उनका जन्म सन् 1917 में शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ और शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई। वे इंडियन सिविल सर्विस में चयनित हुए और बिहार के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक आदि पदों पर रहे। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं— भोर का तारा, कोणार्क, ओ मेरे सपने, शारदीया, पहला राजा, दस तस्वीरें। कोणार्क उनका सबसे चर्चित नाटक है। सन् 1978 में उनका निधन हुआ।

यह एकांकी 1939 में लिखी गई। यह परंपरागत विवाह-व्यवस्था और स्त्री-शिक्षा के प्रति रूढ़िगत सोच पर चोट करती है। मुख्य पात्र उमा पढ़ी-लिखी, सशक्त स्त्री का प्रतिनिधित्व करती है।

पात्र

  • उमा — लड़की; बी.ए. पास, गायन, सितार, पेंटिंग, सिलाई में निपुण; स्वाभिमानी।
  • रामस्वरूप (बाबू) — उमा के पिता; बेटी को पढ़ाया, पर विवाह के लिए उसकी पढ़ाई छिपाते हैं।
  • प्रेमा — उमा की माँ; पुरानी सोच— 'स्त्री-सुबोधिनी' पढ़ लेना काफ़ी मानती हैं।
  • गोपालप्रसाद — लड़के के पिता; वकील, पढ़े-लिखे, पर लड़कियों की ऊँची शिक्षा के विरोधी।
  • शंकर — लड़का; मेडिकल कॉलेज, लखनऊ का छात्र; झुकी कमर, कमज़ोर चरित्र।
  • रतन — रामस्वरूप का घरेलू सहायक।
  • पाठ-सार

    तैयारी का दृश्य

    एक मामूली कमरे में रामस्वरूप और रतन तख्त सजा रहे हैं। रामस्वरूप रतन को डाँटते हैं— "परमात्मा के यहाँ अक्ल बँट रही थी तो तू देर से पहुँचा था क्या?" प्रेमा बताती हैं कि उमा मुँह फुलाए पड़ी है; उसने पाउडर लगाने से इनकार कर दिया। प्रेमा की राय में "इंट्रेंस ही पास करा लेते— लड़की अपने हाथ रहती।" पता चलता है कि घर में मक्खन नहीं है और रतन को लेने भेजना पड़ता है।

    रामस्वरूप बताते हैं कि गोपालप्रसाद वकील हैं, पर ऐसी लड़की चाहते हैं जो ज़्यादा पढ़ी-लिखी न हो। उनका बेटा भी वैसा ही है— "बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।"

    मेहमानों का आगमन

    गोपालप्रसाद और शंकर आते हैं। रामस्वरूप 'हँ-हँ-हँ' करते हुए चापलूसी करते हैं। गोपालप्रसाद अपने ज़माने की बड़ाई करते हैं— दर्जनों कचौड़ियाँ, बारह घंटे की पढ़ाई। फिर वे कहते हैं— "अच्छा तो साहब, फिर 'बिजनेस' की बातचीत हो जाए।" विवाह को वे व्यापार की तरह देखते हैं।

  • वे 'खूबसूरती पर टैक्स' का मज़ाक करते हैं।
  • वे कहते हैं कि लड़की का खूबसूरत होना निहायत ज़रूरी है।
  • वे साफ़ कहते हैं— "हद से हद मैट्रिक-पास होनी चाहिए।" उनका तर्क है— "मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।"
  • गोपालप्रसाद शंकर से कहते हैं— "झुककर क्यों बैठते हो? कमर सीधी करके बैठो।" यहीं से 'बैकबोन' की बात का संकेत मिलता है।
  • उमा का आना

    उमा पान की तश्तरी लेकर आती है। उसके चश्मे को देखकर बाप-बेटे चौंकते हैं; रामस्वरूप झूठ बोलते हैं कि आँखें दुखने आई थीं। उमा सितार पर मीरा का गीत 'मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई' गाती है, पर शंकर से आँखें मिलते ही रुक जाती है। गोपालप्रसाद पेंटिंग, सिलाई और इनाम के बारे में पूछते हैं, पर उमा चुप रहती है।

    उमा का विद्रोह

    "जब कुर्सी-मेज बिकती है तब दुकानदार कुर्सी-मेज से कुछ नहीं पूछता, सिर्फ खरीदार को दिखला देता है।"
    "क्या लड़कियों के दिल नहीं होता? क्या उनके चोट नहीं लगती? क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर खरीदते हैं?"

    उमा बताती है कि शंकर पिछली फरवरी में लड़कियों के होस्टल के आसपास घूमते हुए पकड़ा गया और भगाया गया था। वह गर्व से कहती है— "जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है। कोई पाप नहीं किया।" गोपालप्रसाद इसे धोखा कहकर जाने लगते हैं। तब उमा कहती है—

    "घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं— यानी बैकबोन, बैकबोन!"

    अंत

    मेहमानों के जाने के बाद उमा की खामोशी सिसकियों में बदल जाती है। तभी रतन आकर कहता है— "बाबूजी, मक्खन!" और परदा गिरता है। यह अंत हास्य और व्यंग्य से भरा है— जिस दिखावे के लिए मक्खन मँगाया गया था, उसका अब कोई अर्थ नहीं रहा।

    शब्दार्थ

  • अधेड़ — ढलती उम्र का
  • तख्त — लकड़ी की बड़ी चौकी
  • गंदुमी — गेहुएँ रंग का
  • जंजाल — झंझट, झमेला
  • ठठोली — हँसी, परिहास
  • दकियानूसी — पुराने विचार का
  • तालीम — शिक्षा
  • चौपट — नष्ट
  • फितरती — चालबाज़
  • खीस निपोरना — बेढंगी हँसी हँसना
  • तकल्लुफ़ — शिष्टाचार, बनावट
  • जायचा — जन्मपत्री
  • निहायत — अत्यंत
  • अधीर — उतावला
  • भाषा-बिन्दु — मुहावरे

  • भीगी बिल्ली बनना — डरकर दबना ("भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है")
  • मुँह फुलाना — रूठना
  • किस मर्ज़ की दवा होना — किसी काम का न होना
  • सिर चढ़ाना — अधिक लाड़ से बिगाड़ना
  • सब कुछ उगल देना — भेद खोल देना
  • काँटों में घसीटना — संकोच में डालना
  • इज़्ज़त उतारना — अपमान करना
  • मुँह छिपाकर भागना — लज्जित होकर भागना
  • कहावत — 'बाप सेर तो बेटा सवा सेर' (बेटा पिता से भी बढ़कर)
  • एकांकी के तत्व: नाम, लेखक, पात्र, परिवेश/देश-काल, रंग-निर्देश/मंच-निर्देश, संवाद-निर्देश, समस्या, संवाद, मुख्य विचार, समाधान/परिणाम।

    केन्द्रीय भाव / सीख

  • 'रीढ़ की हड्डी' आत्मसम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है। शंकर में यह नहीं है, जबकि उमा में भरपूर है।
  • एकांकी दहेज, स्त्री को वस्तु समझने और लड़कियों की शिक्षा के विरोध जैसी कुरीतियों पर व्यंग्य करती है।
  • शिक्षा का सच्चा अर्थ आत्मबल और स्वतंत्र विचार है, केवल डिग्री नहीं।
  • अभ्यास के उत्तर-संकेत (बहुविकल्पीय)

  • शीर्षक प्रतीक है — आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
  • व्यंग्य — समाज की अनुचित मान्यताओं पर
  • शंकर की छवि — नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
  • उमा की दृष्टि में शिक्षा — आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
  • गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में समानता — दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं
  • संवाद-शैली — स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
  • सामान्य भूलें

  • 'रीढ़ की हड्डी' को शरीर का अंग समझना— यहाँ यह प्रतीक है।
  • रामस्वरूप को पूरी तरह प्रगतिशील मान लेना— उन्होंने उमा को पढ़ाया, पर विवाह के लिए उसकी पढ़ाई छिपाई।
  • उमा बी.ए. पास है; रामस्वरूप ने गोपालप्रसाद से उसे मैट्रिक तक पढ़ी बताया था।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓एकांकी विधा के तत्वों— पात्र, रंग-निर्देश, संवाद, समस्या, परिणाम— को पहचानना
    • ✓'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक का प्रतीकात्मक अर्थ— आत्मसम्मान और नैतिक दृढ़ता— समझना
    • ✓विवाह में लड़की को वस्तु समझने और स्त्री-शिक्षा के विरोध जैसी कुरीतियों पर लेखक के व्यंग्य को पहचानना
    • ✓उमा के चरित्र से शिक्षा के सच्चे अर्थ— आत्मबल और स्वतंत्र विचार— को समझना
    • ✓पाठ में आए मुहावरों और 'बाप सेर तो बेटा सवा सेर' जैसी कहावतों का अर्थ और प्रयोग सीखना

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →समूहों में पात्र बाँटकर एकांकी के मुख्य दृश्य (उमा का विद्रोह) का कक्षा में मंचन कराएँ
    • →रंग-निर्देश वाले अंशों को अलग रंग से रेखांकित करवाकर उनकी भूमिका पर चर्चा करें
    • →'कुर्सी-मेज बिकती है...' संवाद पर 'स्त्री का सम्मान' विषय पर बहस आयोजित करें
    • →अंतिम संवाद 'बाबूजी, मक्खन!' के हास्य-व्यंग्य पर विद्यार्थियों से विचार लिखवाएँ
    • →एकांकी के दस तत्वों की तालिका बनवाकर हर तत्व का उदाहरण खोजवाएँ
    • →मुहावरों पर वाक्य-निर्माण और 'बाप सेर तो बेटा सवा सेर' के सकारात्मक प्रयोग का अभ्यास कराएँ
    • →1939 के समाज और आज की स्त्री-शिक्षा की तुलना पर चर्चा कराएँ

    📋 Assessment Questions

    1. एकांकी का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' किसका प्रतीक है और यह किन दो पात्रों पर लागू होता है?
    2. रामस्वरूप के चरित्र में आधुनिकता के दिखावे और रूढ़िवादी विचारों का अंतर्द्वंद्व कैसे दिखाई देता है?
    3. गोपालप्रसाद के 'मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं' वाले तर्क की समीक्षा कीजिए।
    4. एकांकी का अंत 'बाबूजी, मक्खन!' से क्यों किया गया होगा?
    5. उमा के व्यक्तित्व की तीन विशेषताएँ पाठ से उदाहरण सहित लिखिए।

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