राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद – Class 10 Hindi Chapter 2 Notes & NCERT PDF
Notes and a simple summary of Chapter 2 of the NCERT Class 10 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.
🎧 Listen to the content
पाठ 2: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
कवि-परिचय
तुलसीदास का जन्म उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के राजापुर गाँव में सन् 1532 में हुआ था (कुछ विद्वान जन्मस्थान सोरों, जिला एटा मानते हैं)। उनका बचपन बहुत संघर्षपूर्ण रहा; प्रारंभिक वर्षों में ही माता-पिता से बिछोह हो गया। गुरुकृपा से उन्हें रामभक्ति का मार्ग मिला। सन् 1623 में काशी में उनका देहावसान हुआ।
पाठ-प्रसंग
यह अंश रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है। सीता-स्वयंवर में राम द्वारा शिव-धनुष भंग के बाद मुनि परशुराम क्रोधित होकर वहाँ आते हैं। शिव-धनुष को खंडित देखकर वे आपे से बाहर हो जाते हैं। परशुराम के क्रोध भरे वाक्यों का उत्तर लक्ष्मण व्यंग्य-वचनों से देते हैं। इस प्रसंग की विशेषता है लक्ष्मण की वीर रस से पगी व्यंग्योक्तियाँ और व्यंजना शैली।
पाठ-सार और भावार्थ
राम की विनम्रता, परशुराम का क्रोध
नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥
आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥
राम विनम्रता से कहते हैं — हे नाथ! शिव-धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा; मुझे क्या आज्ञा है? यह सुनकर क्रोधी मुनि और भड़क उठे।
सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई॥
सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥
परशुराम कहते हैं — सेवक वह है जो सेवा करे; शत्रु जैसा काम करके तो लड़ाई ही होती है। जिसने शिव-धनुष तोड़ा है, वह सहस्रबाहु के समान मेरा शत्रु है। वह सभा से अलग हो जाए, नहीं तो सब राजा मारे जाएँगे।
लक्ष्मण का व्यंग्य
सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने॥
बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥
लक्ष्मण मुसकराकर परशुराम का अपमान करते हुए बोले — बचपन में हमने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब तो आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया; इसी धनुष पर इतनी ममता क्यों?
रे नृपबालक कालबस बोलत तोहि न सँभार।
धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार॥
परशुराम — "अरे राजकुमार! काल के वश होकर तुझे बोलने का होश नहीं। सारा संसार जानता है कि शिव का धनुष कोई साधारण धनुही नहीं है।"
लक्ष्मण के तर्क — हमारी समझ में तो सब धनुष एक समान हैं; पुराने धनुष के टूटने से क्या लाभ-हानि? राम ने तो इसे नया समझकर देखा था, यह छूते ही टूट गया — इसमें राम का कोई दोष नहीं; हे मुनि, आप बिना कारण क्रोध क्यों करते हैं?
परशुराम का आत्म-परिचय (दर्प)
बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही॥
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही॥
सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा॥
मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर॥
परशुराम स्वयं को बाल ब्रह्मचारी, अत्यंत क्रोधी, संसार-प्रसिद्ध क्षत्रिय-कुल-द्रोही बताते हैं; उन्होंने अपनी भुजाओं के बल से पृथ्वी को राजाओं से रहित करके कई बार ब्राह्मणों को दान कर दिया; सहस्रबाहु की भुजाएँ काटने वाला यह फरसा देख! हे राजकुमार, अपने माता-पिता को चिंता में मत डाल — मेरा फरसा गर्भ के बच्चों तक का नाश करने वाला है।
लक्ष्मण का उत्तर
बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥
इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥
देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना॥
लक्ष्मण हँसकर कोमल वाणी में बोले — अहो! मुनि तो अपने को बड़ा योद्धा मानते हैं; बार-बार फरसा दिखाकर फूँक से पहाड़ उड़ाना चाहते हैं। यहाँ कोई कुम्हड़बतिया (कुम्हड़े का छोटा कच्चा फल) नहीं है जो तर्जनी उँगली देखते ही मुरझा जाए। आपके हाथ में फरसा और धनुष-बाण देखकर ही मैंने कुछ अभिमान से कहा।
भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहौं रिस रोकी॥
सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरे कुल इन्ह पर न सुराई॥
बधें पापु अपकीरति हारें। मारतहू पा परिअ तुम्हारें॥
कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। ब्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा॥
जो बिलोकि अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर।
सुनि सरोष भृगुबंसमनि बोले गिरा गंभीर॥
भृगुवंशी और जनेऊ देखकर (ब्राह्मण मानकर) आप जो कुछ कहते हैं, मैं क्रोध रोककर सह लेता हूँ। हमारे कुल में देवता, ब्राह्मण, भगवान के भक्त और गाय पर वीरता नहीं दिखाई जाती — इन्हें मारने से पाप लगता है और इनसे हारने पर अपकीर्ति होती है; इसलिए आप मारें तब भी आपके पैर ही पड़ना चाहिए। आपका वचन ही करोड़ों वज्रों के समान कठोर है, फिर धनुष-बाण और कुठार व्यर्थ ही धारण करते हैं। यह सुनकर परशुराम क्रोध सहित गंभीर वाणी में बोले।
राम और लक्ष्मण के स्वभाव
शब्दार्थ
काव्य-सौन्दर्य
- "बालकु बोलि बधौं नहि तोही" — अनुप्रास (ब वर्ण की आवृत्ति)
- "कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा" — उपमा (वचन की तुलना वज्र से; 'सम' वाचक) — साथ में अतिशयोक्ति
- "चहत उड़ावन फूँकि पहारू" — लोकोक्ति/अतिशयोक्ति
- "पुनि पुनि" — पुनरुक्ति प्रकाश
बोर्ड परीक्षा हेतु
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓रामचरितमानस के बालकांड का शिव-धनुष भंग प्रसंग और तीनों पात्रों का स्वभाव
- ✓लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण तर्क और परशुराम का आत्म-परिचय (दर्प)
- ✓वीर योद्धा की मर्यादा — देवता, ब्राह्मण, भक्त, गाय पर वीरता नहीं
- ✓अवधी भाषा, चौपाई-दोहा छंद, वीर रस और व्यंजना शैली
- ✓अनुप्रास (बालकु बोलि बधौं) और उपमा (कोटि कुलिस सम) अलंकारों की पहचान
👨🏫 Teaching Tips
- →प्रसंग की पृष्ठभूमि (सीता-स्वयंवर, शिव-धनुष, परशुराम-सहस्रबाहु कथा) पहले कहानी की तरह सुनाएँ
- →कक्षा में इस संवाद की नाट्य प्रस्तुति कराएँ — राम, लक्ष्मण, परशुराम की भूमिकाएँ बाँटें
- →चौपाई और दोहे का लयपूर्ण वाचन कराएँ और मात्राएँ गिनवाकर छंद पहचान सिखाएँ
- →हर व्यंग्योक्ति के लिए 'कहा क्या, अर्थ क्या' — दो कॉलम में सूची बनवाएँ (कॉपी में)
- →राम और लक्ष्मण के स्वभाव की तुलना पर जोड़ी-चर्चा कराएँ
- →'साहस और शक्ति के साथ विनम्रता' विषय पर छोटा वाद-विवाद कराएँ
- →अलंकार वाले प्रश्नों का अभ्यास पंक्ति पढ़कर तुरंत अलंकार बताने के खेल से कराएँ
📋 Assessment Questions
- परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष टूटने के कौन-कौन से तर्क दिए?
- राम और लक्ष्मण की प्रतिक्रियाओं के आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ लिखिए।
- परशुराम ने सभा में अपने विषय में क्या-क्या कहा?
- 'कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा' और 'बालकु बोलि बधौं नहि तोही' में अलंकार पहचानिए।
- इस प्रसंग में व्यंग्य का सौंदर्य उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Ask the AI tutor about Class 10 Hindi Chapter 2
Get question answers, important questions, a quick MCQ quiz or a simple explanation of “राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद”. Free — sign in with Google.
- Explain राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद in simple words
- Answer the NCERT exercise questions of Class 10 Hindi Chapter 2 step by step
- Give me 5 important questions with answers from राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
- Quiz me with 5 MCQs on राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
- Make last-minute revision notes for Class 10 Hindi Chapter 2
- Explain राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद with an everyday example
👩🏫 Class 10 Hindi classes near you — online or at home
Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.
- Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
- Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
- At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.
Keep learning
- Maharashtra Board Class 10 SolutionsState board textbook solutions
- TalentJR FlashcardsQuick revision cards
- Coding for KidsLearn to code with TalentJR