सौहार्दं प्रकृतेः शोभा – Class 10 Sanskrit Chapter 6 Notes & NCERT PDF
Notes and a simple summary of Chapter 6 of the NCERT Class 10 Sanskrit book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.
🎧 Listen to the content
पाठ 6: सौहार्दं प्रकृतेः शोभा (मित्रता ही प्रकृति की शोभा है)
पाठ-परिचय
सौहार्दं प्रकृतेः शोभा (मित्रता ही प्रकृति की शोभा है) एक संवादात्मक नाटक है। आज समाज में लोग आत्माभिमानी होकर एक-दूसरे का तिरस्कार करते हैं और स्वार्थ-पूर्ति में लगे रहते हैं — मानो उनका सिद्धान्त हो:
"नीचैरनीचैरतिनीचनीचैः सर्वैः उपायैः फलमेव साध्यम्"
(नीच, अनीच, अति नीच — सभी उपायों से बस फल ही साधना है।)
इसी प्रवृत्ति के विरोध में इस पाठ में पशु-पक्षियों के माध्यम से आत्माभिमान दिखाया गया है और अन्त में प्रकृतिमाता के द्वारा निष्कर्ष स्थापित किया गया है कि समय के अनुसार सबका महत्त्व है, सब एक-दूसरे पर आश्रित हैं, अतः हमें स्नेह और मैत्रीपूर्ण व्यवहार से रहना चाहिए।
पाठ-सार (कथा-क्रम)
1. सिंह की दुर्दशा
वन में नदी के पास एक सिंह सुख से विश्राम कर रहा है। एक वानर आकर उसकी पूँछ हिला देता है, दूसरा उसके कान खींचकर पेड़ पर चढ़ जाता है। क्रुद्ध सिंह इधर-उधर दौड़ता, गरजता है पर कुछ नहीं कर पाता। पक्षी यह देखकर प्रसन्नता से कलरव करते हैं। सिंह पूछता है — "मैं वनराज हूँ, क्या तुम्हें भय नहीं? क्यों सब मिलकर मुझे तंग करते हो?"
वानर उत्तर देता है — राजा रक्षक होता है, पर तुम तो भक्षक हो; अपनी रक्षा में भी समर्थ नहीं, तो हमारी रक्षा कैसे करोगे? वह पञ्चतन्त्र की उक्ति सुनाता है:
यो न रक्षति वित्रस्तान् पीड्यमानान् परैः सदा।
जन्तून् पार्थिवरूपेण स कृतान्तो न संशयः॥
अर्थ: जो राजा दूसरों द्वारा सताए गए, डरे हुए प्राणियों की रक्षा नहीं करता, वह राजा के रूप में निःसन्देह यमराज (कृतान्त) है।
2. काक और पिक का विवाद
काक कहता है कि वनराज बनने योग्य तो वही है। पिक (कोयल) उपहास करती है — तुम "का-का" के कर्कश स्वर से वातावरण व्याकुल करते हो; न रूप है, न ध्वनि; काले रंग के, मेध्यामेध्यभक्षक (पवित्र-अपवित्र सब खाने वाले) को हम वनराज कैसे मानें? काक उत्तर देता है — तुम भी तो काली हो! मेरी सत्यप्रियता प्रसिद्ध है ("अनृतं वदसि चेत् काकः दशेत्"), हमारा परिश्रम और एकता विश्वविख्यात है, और काकचेष्टः विद्यार्थी ही आदर्श छात्र माना जाता है। कोयल कहती है:
काकः कृष्णः पिकः कृष्णः को भेदः पिककाकयोः।
वसन्तसमये प्राप्ते काकः काकः पिकः पिकः॥
अर्थ: कौआ भी काला है, कोयल भी काली; दोनों में क्या भेद? वसन्त आने पर (मधुर स्वर से पता चलता है कि) कौआ कौआ है और कोयल कोयल। काक उलटकर कहता है — हे परभृत् (दूसरों द्वारा पाली जाने वाली)! यदि मैं तुम्हारी सन्तान न पालूँ तो कोयलें कहाँ होंगी?
3. गज, बक और मयूर
यदि न स्यान्नरपतिः सम्यङ्नेता ततः प्रजा।
अकर्णधारा जलधौ विप्लवेतेह नौरिव॥
अर्थ: यदि राजा उचित नेता न हो तो प्रजा बिना कर्णधार (नाविक) वाली नौका की तरह समुद्र में डूब जाती है।
4. उलूक का चयन और काक का विरोध
सब पक्षी तय करते हैं कि कोई खग (पक्षी) ही वनराज बने। पर हर पक्षी स्वयं को ही योग्य मानता है। तब गहरी नींद में सोते उलूक को देखकर वे सोचते हैं — यह आत्मश्लाघा से रहित, पद-निर्लिप्त है, यही राजा बने। अभिषेक की तैयारी होती है, तभी काक अट्टहास करके विरोध करता है — मयूर, हंस, कोकिल आदि श्रेष्ठ पक्षियों के रहते इस दिवान्ध (दिन में अंधे), करालवक्त्र (भयंकर मुख वाले) का अभिषेक! जो दिन भर सोता है, वह रक्षा कैसे करेगा?
स्वभावरौद्रमत्युग्रं क्रूरमप्रियवादिनम्।
उलूकं नृपतिं कृत्वा का नु सिद्धिर्भविष्यति॥
अर्थ: स्वभाव से रौद्र, अत्यन्त उग्र, क्रूर और अप्रिय बोलने वाले उल्लू को राजा बनाकर कौन-सी सिद्धि होगी?
5. प्रकृतिमाता का सन्देश
तभी प्रकृतिमाता आती हैं — "तुम सब मेरी सन्तान हो, आपस में क्यों लड़ते हो? सभी वन्यजीव अन्योन्याश्रित हैं।"
ददाति प्रतिगृह्णाति गुह्यमाख्याति पृच्छति।
भुङ्क्ते भोजयते चैव षड्विधं प्रीतिलक्षणम्॥
अर्थ: देना, लेना, रहस्य बताना, पूछना, खाना और खिलाना — ये प्रेम (मित्रता) के छह लक्षण हैं।
प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्।
नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्॥
अर्थ: प्रजा के सुख में राजा का सुख है, प्रजा के हित में उसका हित; राजा के लिए अपना प्रिय हितकर नहीं, प्रजा का प्रिय ही हितकर है।
अगाधजलसञ्चारी न गर्वं याति रोहितः।
अङ्गुष्ठोदकमात्रेण शफरी फुर्फुरायते॥
अर्थ: अथाह जल में घूमने वाली रोहित (रोहू) बड़ी मछली घमण्ड नहीं करती, पर अँगूठे भर जल में शफरी (छोटी मछली) फुदकती (इतराती) है।
अतः सब लोग शफरी की तरह केवल अपने गुणों की चर्चा छोड़कर, मिलकर प्रकृति-सौन्दर्य और वन-रक्षा का प्रयत्न करें। सब प्रणाम करके संकल्प लेते हैं:
प्राणिनां जायते हानिः परस्परविवादतः।
अन्योन्यसहयोगेन लाभस्तेषां प्रजायते॥
अर्थ: आपसी विवाद से प्राणियों की हानि होती है, परस्पर सहयोग से उनका लाभ होता है।
शब्दार्थ
व्याकरण-बिन्दु
समास (पाठ के अभ्यास से):
वाच्य-परिवर्तन (कर्तृवाच्य → कर्मवाच्य):
सन्धि-उदाहरण: सन्नपि = सन् + अपि; शृण्वन्नेवाहम् = शृण्वन् + एव + अहम्; कर्णमाकृष्य = कर्णम् + आकृष्य; नौरिव = नौः + इव।
अभ्यास-संकेत
बोर्ड परीक्षा हेतु
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓पशु-पक्षियों के संवाद से आत्माभिमान और स्वार्थ की निरर्थकता समझना।
- ✓राजा का धर्म रक्षा है, भक्षण नहीं — 'यो न रक्षति...' श्लोक का भाव।
- ✓प्रकृतिमाता का सन्देश: सब अन्योन्याश्रित हैं, समयानुसार सबका महत्त्व है।
- ✓प्रीति के छह लक्षण और परस्पर-सहयोग से लाभ का सिद्धान्त।
- ✓वाच्य-परिवर्तन, समास-विग्रह और सन्धि का अभ्यास।
👨🏫 Teaching Tips
- →कक्षा में पात्र बाँटकर (सिंह, वानर, काक, पिक, गज, बक, मयूर, उलूक, प्रकृतिमाता) नाट्य-वाचन कराएँ।
- →हर पात्र के 'दावे' और उसके 'खण्डन' की दो-स्तम्भ सूची बोर्ड पर बनवाएँ।
- →सभी श्लोकों का अन्वय पहले बोलकर, फिर लिखवाकर अर्थ स्पष्ट करें।
- →'काकचेष्टः बकध्यानी...' जैसे पूरक श्लोक सुनाकर पाठ को विद्यार्थी-जीवन से जोड़ें।
- →वाच्य-परिवर्तन के लिए पाठ का उदाहरण (क्रुद्धः सिंहः...) आधार बनाकर 5 वाक्य बदलवाएँ।
- →कक्षा-चर्चा: विद्यालय या समाज में 'सौहार्द' क्यों आवश्यक है — एक-एक उदाहरण।
- →रोहित-शफरी की तुलना से विनम्रता पर लघु निबन्ध (संस्कृत/हिन्दी) लिखवाएँ।
📋 Assessment Questions
- वनराज की दुर्दशा किसने की और क्यों? (पूर्ण वाक्य में)
- बक और मयूर के दावों का खण्डन किस प्रकार हुआ?
- प्रीति के छह लक्षण वाला श्लोक लिखकर अर्थ बताइए।
- तीन वाक्यों का वाच्य-परिवर्तन कीजिए।
- पाठ का सन्देश अपने शब्दों में लिखिए।
Ask the AI tutor about Class 10 Sanskrit Chapter 6
Get question answers, important questions, a quick MCQ quiz or a simple explanation of “सौहार्दं प्रकृतेः शोभा”. Free — sign in with Google.
- Explain सौहार्दं प्रकृतेः शोभा in simple words
- Answer the NCERT exercise questions of Class 10 Sanskrit Chapter 6 step by step
- Give me 5 important questions with answers from सौहार्दं प्रकृतेः शोभा
- Quiz me with 5 MCQs on सौहार्दं प्रकृतेः शोभा
- Make last-minute revision notes for Class 10 Sanskrit Chapter 6
- Explain सौहार्दं प्रकृतेः शोभा with an everyday example
👩🏫 Class 10 Sanskrit classes near you — online or at home
Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.
- Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
- Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
- At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.
Keep learning
- Maharashtra Board Class 10 SolutionsState board textbook solutions
- TalentJR FlashcardsQuick revision cards
- Coding for KidsLearn to code with TalentJR