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भूकम्पविभीषिका – Class 10 Sanskrit Chapter 9 Notes & NCERT PDF

Class 10SanskritChapter 9NCERT book: शेमुषी भाग 2 (Shemushi) - Sanskrit Class 10

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पाठ 9: भूकम्पविभीषिका (भूकम्प की भयानकता)

पाठ-परिचय

भूकम्पविभीषिका (भूकम्प की भयानकता) — यह पाठ हमारे वातावरण में सम्भावित प्राकृतिक प्रकोपों में से एक, भूकम्प की विभीषिका को दिखाता है। प्रकृति में होने वाली आपदाएँ — झञ्झावात (तूफ़ान), भूकम्पन, जलोप्लव (बाढ़), अतिवृष्टि, अनावृष्टि, शिलास्खलन (भूस्खलन), भूविदारण, ज्वालामुखी-विस्फोट — मानव-जीवन को दुःखमय बना देती हैं। पाठ का सन्देश है कि आपत्काल में घबराहट छोड़कर साहस से प्रयत्न करें तो भयंकर विभीषिका से भी हमारी रक्षा हो सकती है।

पाठ-सार

1. 2001 का कच्छ (गुजरात) भूकम्प

एकोत्तरद्विसहस्रतमे ख्रीष्टाब्दे (2001 ई.) में गणतन्त्र-दिवस के पर्व पर, जब सम्पूर्ण भारत नृत्य-गीत-वादित्र के उल्लास में मग्न था, तभी अचानक गुर्जर-राज्य (गुजरात) व्याकुल, अस्त-व्यस्त और क्रन्दन से भर गया। भूकम्प की भयंकर विभीषिका ने पूरे गुजरात को, विशेषकर कच्छ जनपद को खण्डहरों (ध्वंसावशेषों) में बदल दिया।

  • भूकम्प का केन्द्र — भुज नगर — मिट्टी के खिलौने की तरह टुकड़े-टुकड़े हो गया।
  • बहुमंज़िली इमारतें क्षण भर में धराशायी हो गईं; बिजली के खम्भे उखड़ गए; घरों की सीढ़ियाँ बिखर गईं।
  • भूमि दो भागों में फट गई; भूमि के गर्भ से निकलती जलधाराओं से बाढ़ का दृश्य उपस्थित हुआ।
  • हज़ारों प्राणी क्षण भर में मर गए; ध्वस्त भवनों में दबे हज़ारों लोग सहायता के लिए करुण क्रन्दन करते रहे।
  • भूख से दुर्बल कण्ठ वाले कुछ शिशु ईश्वर-कृपा से ही दो-तीन दिन जीवित रहे।
  • 2. 2005 का कश्मीर भूकम्प

    पञ्चोत्तरद्विसहस्रतमे ख्रीष्टाब्दे (2005 ई.) में कश्मीर प्रान्त और पाकिस्तान में भी धरती का महान् कम्पन हुआ, जिसमें लाखों लोग अकाल मृत्यु के ग्रास बने।

    3. भूकम्प के कारण (वैज्ञानिक मत)

  • पृथ्वी के अन्तर्गर्भ में स्थित बड़ी-बड़ी पाषाण-शिलाएँ जब संघर्षण (रगड़) से टूटती हैं, तब भीषण संस्खलन और उससे उत्पन्न कम्पन होता है; यही कम्पन धरती की ऊपरी सतह पर आकर महाविनाश करता है।
  • ज्वालामुखी-विस्फोट से भी भूकम्प होता है। पृथ्वी के गर्भ की अग्नि जब खनिज, मिट्टी, शिलाओं को खौलाती है, तब वह लावारस बनकर धरती या पर्वत फाड़कर बाहर निकलता है; आकाश धुएँ-राख से ढँक जाता है। 800 डिग्री सेल्सियस तक गर्म यह लावा नदी-वेग से बहता है और पास के गाँव-नगर उसके पेट में समा जाते हैं।
  • 4. उपाय और निष्कर्ष

    भूकम्प दैवी प्रकोप है, उसके शमन का कोई स्थिर उपाय नहीं दिखता; प्रकृति के सामने विज्ञान-गर्वित मानव भी बौना (वामनकल्प) है। फिर भी भूकम्प-विशेषज्ञ कहते हैं —

  • बहुमंज़िले भवन नहीं बनाने चाहिए।
  • तटबन्ध बनाकर बहुत अधिक नदी-जल एक ही स्थान पर इकट्ठा नहीं करना चाहिए, अन्यथा असन्तुलन से भूकम्प सम्भव है।
  • शान्तानि एव पञ्चतत्त्वानि क्षितिजलपावकसमीरगगनानि भूतलस्य योगक्षेमाभ्यां कल्पन्ते। अशान्तानि खलु तान्येव महाविनाशम् उपस्थापयन्ति।

    अर्थ: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — ये पाँचों तत्त्व शान्त रहें तो धरती के योग (अप्राप्त की प्राप्ति) और क्षेम (प्राप्त की रक्षा) के लिए होते हैं; अशान्त होने पर यही महाविनाश उपस्थित करते हैं।

    शब्दार्थ

  • पर्याकुलम् — परितः व्याकुलम् — चारों ओर से बेचैन
  • विपर्यस्तम् — अस्तव्यस्तम् — अस्त-व्यस्त
  • विपन्नम् — विपत्ति से ग्रस्त
  • दारुणविभीषिका — भयंकर त्रास — अत्यधिक भय
  • ध्वंसावशेषेषु — विनाश के बाद बची वस्तुओं (खण्डहरों) में
  • मृत्तिकाक्रीडनकमिव — मिट्टी के खिलौने के समान
  • बहुभूमिकानि भवनानि — बहुमंज़िले मकान
  • उत्खाताः — उत्पाटिताः — उखाड़े गए
  • फालद्वये — दो खण्डों में
  • क्षुत्क्षामकण्ठाः — भूख से दुर्बल कण्ठ वाले
  • क्वथयति — उबालती/तपाती है
  • वामनकल्पः — बौने के समान
  • पुञ्जीकरणीयम् — इकट्ठा करना चाहिए
  • योगक्षेमाभ्याम् — योग (अप्राप्त की प्राप्ति) और क्षेम (प्राप्त की रक्षा) के लिए
  • व्याकरण-बिन्दु

    परसवर्ण सन्धि (अभ्यास से):

  • किञ्च = किम् + च; नगरन्तु = नगरम् + तु; विपन्नञ्च = विपन्नम् + च
  • किन्नु = किम् + नु; भुजनगरन्तु = भुजनगरम् + तु; सञ्चयः = सम् + चयः
  • विसर्ग सन्धि (अभ्यास से):

  • शिशवस्तु = शिशवः + तु; विस्फोटैरपि = विस्फोटैः + अपि
  • सहस्रशोऽन्ये = सहस्रशः + अन्ये; विचित्रोऽयम् = विचित्रः + अयम्
  • भूकम्पो जायते = भूकम्पः + जायते; वामनकल्प एव = वामनकल्पः + एव
  • प्रकृति-प्रत्यय:

  • परिवर्तितवती = परि + वृत् + क्तवतु + ङीप् (पाठ का उदाहरण)
  • धृतवान् = धृ + क्तवतु; हसन् = हस् + शतृ; हतः = हन् + क्त
  • विशीर्णा = वि + शॄ + क्त + टाप्; प्रचलन्ती = प्र + चल् + शतृ + ङीप्
  • धातु-रूप (अभ्यास से): आसीत् (अस्, लङ्); अभवन् (भू, लङ्, प्र.पु. बहु.); भवन्ति (भू, लट्, प्र.पु. बहु.); पृच्छन्ति (प्रच्छ्, लट्, प्र.पु. बहु.); समाविशेयुः (सम् + आ + विश्, विधिलिङ्, प्र.पु. बहु.)।

    अभ्यास-संकेत

  • कस्य दारुणविभीषिका — भूकम्पस्य; बहुभूमिकानि भवनानि धराशायीनि; दुर्वारजलधाराभिः महाप्लावनदृश्यम्; भूकम्पस्य उपशमनस्य स्थिरोपायः नास्ति; विवशाः प्राणिनः निहन्यन्ते।
  • भूकम्पस्य केन्द्रबिन्दुः — कच्छजनपदः (भुजनगरम्); केषां विस्फोटैरपि भूकम्पः — ज्वालामुखपर्वतानाम्।
  • बोर्ड परीक्षा हेतु

  • अनुच्छेद-लेखन: 'भूकम्पविषये पञ्चवाक्यानि' — कारण, प्रभाव, उपाय को सरल संस्कृत में।
  • सन्धि (परसवर्ण/विसर्ग), प्रकृति-प्रत्यय और धातु-रूप पूर्ति — निश्चित प्रश्न-प्रकार।
  • 2001 (गणतन्त्र-दिवस, कच्छ-भुज) और 2005 (कश्मीर-पाकिस्तान) के तथ्य सही याद रखें।
  • सामान्य भूलें

  • 2001 का भूकम्प गणतन्त्र-दिवस (26 जनवरी) पर आया था, स्वतन्त्रता-दिवस पर नहीं।
  • भूकम्प का केन्द्र भुज नगर था — अहमदाबाद नहीं।
  • 'किञ्च' परसवर्ण सन्धि है, अनुस्वार नहीं लिखें जहाँ पाठ ञ्/न् का प्रयोग करता है।
  • 'योगक्षेम' को एक शब्द न समझें — योग = अप्राप्त की प्राप्ति, क्षेम = प्राप्त की रक्षा।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓2001 (गणतन्त्र-दिवस, कच्छ, भुज केन्द्र) और 2005 (कश्मीर-पाकिस्तान) भूकम्पों के तथ्य।
    • ✓भूकम्प के कारण: शिलाओं का संघर्षण-जन्य संस्खलन और ज्वालामुखी-विस्फोट।
    • ✓विशेषज्ञों के उपाय तथा पञ्चतत्त्वों के सन्तुलन का सन्देश।
    • ✓परसवर्ण और विसर्ग सन्धि, शतृ/क्त/क्तवतु प्रत्यय तथा धातु-रूपों का अभ्यास।
    • ✓आपदा में घबराहट छोड़कर साहस से प्रयत्न करने का जीवन-मूल्य।

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →भारत के मानचित्र पर कच्छ, भुज और कश्मीर दिखाकर पाठ आरम्भ करें।
    • →भूकम्प के समय 'रुको, ढको, पकड़ो' (Drop-Cover-Hold) का अभ्यास-सत्र जोड़ें।
    • →पाठ की आपदाओं की सूची (झञ्झावात, जलोप्लव आदि) के संस्कृत-हिन्दी नाम मिलवाएँ।
    • →सन्धि के लिए दो स्तम्भ (परसवर्ण/विसर्ग) बनाकर अभ्यास के 12 पद छँटवाएँ।
    • →'भूकम्पविषये पञ्चवाक्यानि' संस्कृत अनुच्छेद समूहों में लिखवाकर पढ़वाएँ।
    • →पञ्चतत्त्वों के सन्तुलन को पर्यावरण-संरक्षण से जोड़कर चर्चा करें।

    📋 Assessment Questions

    1. 2001 के भूकम्प से हुई क्षति का वर्णन कीजिए।
    2. भूकम्प के दो वैज्ञानिक कारण लिखिए।
    3. विशेषज्ञों के दो उपाय बताइए।
    4. चार पदों का सन्धि-विच्छेद और दो पदों का प्रकृति-प्रत्यय विभाग कीजिए।

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