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पेड़ की बात – Class 6 Hindi Chapter 13 Notes & NCERT PDF

Class 6HindiChapter 13NCERT book: मल्हार (Malhar) - Hindi Class 6

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पाठ 13: पेड़ की बात

पाठ-परिचय

'पेड़ की बात' एक वैज्ञानिक-साहित्यिक लेख है। इसके लेखक प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) हैं और बांग्ला से हिंदी में अनुवाद शंकर सेन ने किया है। बसु ने सिद्ध किया कि पौधों का निश्चित जीवनचक्र और प्रजनन-प्रणाली होती है और वे अपने परिवेश के प्रति जागरूक होते हैं। उन्होंने सबसे पहले रेडियो तरंगों से संचार स्थापित करने की खोज भी की थी।

इस लेख में विज्ञान को कहानी जैसी भाषा में कहा गया है – बीज को 'शिशु', फूल को 'हँसी' और पेड़ को 'संतान के लिए सब कुछ लुटा देने वाली माँ' जैसा बताया गया है।

पाठ-सार

1. बीज से अंकुर

बहुत दिनों तक मिट्टी के नीचे बीज पड़े रहे। सर्दी के बाद वसंत, फिर वर्षा आई। मानो कोई शिशु को पुकार रहा हो –

"और सोए मत रहो, ऊपर उठ जाओ, सूरज की रोशनी देखो।"

बीज का ढक्कन दरक गया (फट गया), दो सुकोमल पत्तियों के बीच अंकुर निकला – जैसे कोई शिशु नन्हा सिर उठाकर नई दुनिया देख रहा हो।

2. जड़ और तना

अंकुर का जो भाग मिट्टी में जाता है वह जड़, और जो ऊपर उठता है वह तना। पौधे को किसी भी तरह रखो – जड़ नीचे और तना ऊपर ही जाएगा। लेखक ने गमले को औंधा लटकाया; दो-एक दिन में पत्तियाँ-डालियाँ मुड़कर ऊपर उठ आईं और जड़ नीचे लटक गई – "जैसे पौधे को भी सब भेद मालूम हो गया हो।" कटी मूली बोने पर भी पत्ते-फूल कुछ दिन बाद ऊपर उठ आते हैं।

3. पेड़ का भोजन

  • पेड़ों के दाँत नहीं होते, इसलिए वे तरल द्रव्य या वायु से भोजन लेते हैं।
  • जड़ मिट्टी से रस-पान करती है; पानी न मिले तो पेड़ मर जाता है।
  • सूक्ष्मदर्शी से देखने पर पेड़ में हज़ारों-हज़ार नल दिखते हैं, जिनसे रस का संचार होता है।
  • पत्तों में अनगिनत छोटे-छोटे मुँह होते हैं जिन पर होंठ होते हैं; ज़रूरत न हो तो होंठ बंद हो जाते हैं।
  • 4. 'अंगारक' वायु और प्रकाश

    हम साँस छोड़ते हैं तो एक विषैली वायु निकलती है – 'अंगारक' वायु (कार्बन डाइऑक्साइड)। पेड़ उसी का सेवन करके हवा को शुद्ध करते हैं:

    "पत्ते सूर्य-ऊर्जा के सहारे 'अंगारक' वायु से अंगार निःशेष कर डालते हैं।"

    यह अंगार (कार्बन) पेड़ के शरीर में जाकर उसे बढ़ाता है। इसीलिए पेड़ प्रकाश की ओर बढ़ते हैं; खिड़की के पास रखे पौधे की डालियाँ प्रकाश की ओर मुड़ती हैं; बेलें पेड़ों से लिपटकर ऊपर जाती हैं।

    "प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है।"
    "पेड़-पौधों के रेशे-रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध हैं। ईंधन को जलाने पर जो प्रकाश व ताप बाहर प्रकट होता है, वह सूर्य की ही ऊर्जा है।"

    पशु और हम भी पेड़-पौधे-अनाज खाकर जीते हैं, यानी हम भी प्रकाश की खुराक पर जीवित हैं।

    5. फूल, मधुमक्खी और बीज

  • बीज पेड़ की संतान है; उसकी रक्षा के लिए पेड़ पंखुड़ियों से घिरा घर – फूल – बनाता है।
  • मटमैली मिट्टी और विषैली वायु से इतने सुंदर फूल कैसे बनते हैं? लेखक के अनुसार माँ की ममता ही वह पारस-मणि है।
  • रंग-बिरंगी पंखुड़ियाँ और सुगंध मधुमक्खी, तितली और पतंगों को बुलाने के निशान हैं; रात में निकलने वाले पतंगों के लिए फूल शाम को सुगंध फैलाते हैं।
  • मधुमक्खियाँ पराग-कण एक फूल से दूसरे पर ले जाती हैं; पराग-कण के बिना बीज नहीं पकता।
  • 6. पेड़ का त्याग

    बीजों को अपना रस पिलाकर पेड़ सूखने लगता है, हवा का थपेड़ा सह नहीं पाता, डालियाँ टूटती हैं और एक दिन जड़ सहित गिर पड़ता है –

    "इस तरह संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।"

    जीवन-चक्र: बीज → अंकुर → पौधा → पेड़ → फूल → फल → बीज

    शब्दार्थ

  • अंकुर – बीज से निकला नया भाग
  • दरक – दरार, फटना
  • आहिस्ता – धीरे-से
  • द्रव्य – तरल पदार्थ
  • सूक्ष्मदर्शी – बहुत छोटी चीज़ें देखने का यंत्र
  • श्वास-प्रश्वास – साँस लेना और छोड़ना
  • विषाक्त – विष मिला हुआ
  • अंगारक – कार्बन; अंगारक वायु = कार्बन डाइऑक्साइड
  • आबद्ध – बँधा हुआ
  • सचेष्ट – प्रयास में लगा
  • अपरूप उपादान – भद्दी/साधारण सामग्री
  • पराग-कण – फूल के भीतर की धूल (पुष्प-रज)
  • व्यग्र – व्याकुल
  • क्षीण – दुर्बल
  • न्योछावर – समर्पित करना
  • भाषा-बिन्दु

    विशेषण (शब्दों के रूप)

    पाठ में 'मिट्टी' की विशेषताएँ दी गई हैं – चिकनी, उपजाऊ, नम, काली, भुरभुरी, रेतीली। इसी तरह पेड़, सर्दी, सूर्य के लिए विशेषण-बॉक्स बनाने हैं, जैसे – हरा-भरा पेड़, कड़ाके की सर्दी, तेजस्वी सूर्य।

    मानवीकरण

    लेखक पेड़ को मनुष्य जैसा दिखाते हैं – बीज 'शिशु', फूल से 'हँसता' पेड़, 'बंधु-बांधवों' को बुलाता पेड़। निर्जीव या पेड़-पौधों में मनुष्य जैसे भाव दिखाना मानवीकरण है।

    लेख की रचना

    लेखक विचारों को क्रम से रखते हैं और उदाहरण देते हैं (औंधा गमला, कटी मूली, खिड़की के पास पौधा) – तथ्य को व्यावहारिकता से जोड़ना इस लेख की विशेषता है।

    केन्द्रीय भाव / सीख

  • पेड़-पौधे सजीव हैं; वे भोजन करते, साँस लेते, प्रकाश की ओर बढ़ते और संतान के लिए त्याग करते हैं।
  • पेड़ हवा शुद्ध करके सभी जीवों के मित्र हैं; इसलिए उनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
  • विज्ञान को ध्यान से अवलोकन करके समझा जा सकता है – जैसे बसु ने किया।
  • अभ्यास-संकेत

  • पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे? – हवा को शुद्ध करके।
  • बीज के अंकुरित होने में सहयोग – मिट्टी, पानी (वर्षा), उचित मौसम (वसंत के बाद वर्षा) और प्रकाश।
  • पौधे भोजन कैसे पाते हैं? – जड़ से मिट्टी का रस और पत्तों से वायु (अंगारक) व सूर्य-प्रकाश की सहायता से।
  • अंकुरण प्रयोग: मिट्टी में राजमा/चने के 4–5 बीज बोकर 3–4 दिन पानी दें और लंबाई, पत्ते, प्रकाश की ओर मुड़ना लिखें।
  • आज की पहेली (शब्द-सीढ़ी): रात, तमाम, ममता, ताप, पल्लव, वसंत, तना, नाम, मज़बूत, तरल, लटक, कम।
  • सामान्य भूलें

  • 'अंगारक वायु' को ऑक्सीजन समझना – यह कार्बन डाइऑक्साइड (साँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु) है।
  • लेखक को केवल साहित्यकार मानना – जगदीशचंद्र बसु वैज्ञानिक थे; लेख का अनुवाद शंकर सेन ने किया।
  • यह सोचना कि औंधा लटकाने पर पौधा वैसा ही रहता है – पत्तियाँ-डालियाँ मुड़कर ऊपर और जड़ नीचे हो जाती है।
  • 'पराग-कण' और 'बीज' को एक समझना – पराग-कण से बीज पकता है, दोनों अलग हैं।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓जगदीशचंद्र बसु के लेख से बीज से बीज तक पेड़ का जीवन-चक्र समझना
    • ✓जड़ नीचे और तना ऊपर क्यों जाता है, और पौधे प्रकाश की ओर क्यों मुड़ते हैं – उदाहरणों से जानना
    • ✓'अंगारक' वायु (कार्बन डाइऑक्साइड) को शुद्ध करके पेड़ हमारे मित्र कैसे हैं, यह समझना
    • ✓फूल, पराग-कण और मधुमक्खी की भूमिका तथा पेड़ के त्याग का भाव समझना
    • ✓मानवीकरण और विशेषण (मिट्टी – चिकनी, उपजाऊ, नम) जैसे भाषा-बिन्दु पहचानना

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →कक्षा में राजमा या चने बोकर 'अंकुरण डायरी' रखवाएँ – रोज़ लंबाई और पत्तों की गिनती लिखवाएँ
    • →एक पौधे को खिड़की के पास रखकर कुछ दिनों में प्रकाश की ओर मुड़ना दिखाएँ
    • →सूक्ष्मदर्शी उपलब्ध हो तो पत्ती की झिल्ली दिखाएँ और 'अनगिनत मुँह' (रंध्र) वाली बात जोड़ें
    • →बीज → अंकुर → पौधा → पेड़ → फूल → फल → बीज का प्रवाह-चार्ट दीवार पर बनवाएँ
    • →विज्ञान की कक्षा से जोड़ें: 'अंगारक वायु' = कार्बन डाइऑक्साइड, 'अंगार' = कार्बन
    • →लेख की शैली पर चर्चा करें और बच्चों से 'गेहूँ की बात' जैसा छोटा लेख लिखवाएँ
    • →पाठ में मानवीकरण वाले वाक्य (पेड़ का हँसना, बंधु-बांधवों को बुलाना) रेखांकित कराएँ

    📋 Assessment Questions

    1. गमले को औंधा लटकाने पर पौधे में क्या परिवर्तन हुआ?
    2. पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं? पाठ के आधार पर समझाइए
    3. 'प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है' – इस कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए
    4. फूलों में रंग और सुगंध किसके लिए होते हैं और पराग-कण का क्या महत्व है?
    5. 'मिट्टी' की तरह 'पेड़' के लिए चार विशेषण लिखिए

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