रहीम के दोहे – Class 6 Hindi Chapter 5 Notes & NCERT PDF
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पाठ 5: रहीम के दोहे
पाठ-परिचय
पाठ 5: रहीम के दोहे — इस पाठ में भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि अब्दुर्रहीम खानखाना के सात नीति-दोहे हैं। रहीम का जन्म 16वीं शताब्दी में और मृत्यु 17वीं शताब्दी में मानी जाती है। उन्होंने नीति, भक्ति और प्रेम पर रचनाएँ कीं और अवधी तथा ब्रजभाषा दोनों में लिखा। वे रामायण-महाभारत के अच्छे जानकार थे। आज भी उनके दोहे आम बोलचाल में कहावतों की तरह प्रयोग होते हैं।
विधा: दोहा — दो पंक्तियों का छंद, जिसमें थोड़े शब्दों में गहरी बात कही जाती है। दोहे की हर पंक्ति के दो भाग होते हैं और पंक्तियों के अंत में तुक मिलती है (डारि–तलवारि, पान–सुजान)।
पाठ-सार: सातों दोहे और उनका भावार्थ
दोहा 1 — छोटे का भी महत्व
रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि ।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि ।।
बड़ी चीज़ या बड़े व्यक्ति को देखकर छोटे को फेंकना या अनदेखा नहीं करना चाहिए। जहाँ सुई का काम है (सिलाई, जोड़ना), वहाँ तलवार कुछ नहीं कर सकती। हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व है।
दोहा 2 — परोपकार
तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान ।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान ।।
पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते, तालाब अपना पानी स्वयं नहीं पीते। उसी प्रकार सज्जन लोग दूसरों की भलाई के लिए ही धन इकट्ठा करते हैं। प्रकृति के माध्यम से परोपकार का गुण सिखाया गया है।
दोहा 3 — प्रेम का धागा
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय ।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय ।।
प्रेम का रिश्ता एक नाज़ुक धागे जैसा है, उसे झटके से मत तोड़ो। टूटा धागा फिर नहीं जुड़ता, और जुड़ भी जाए तो बीच में गाँठ पड़ जाती है — यानी मन में खटास रह जाती है। रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।
दोहा 4 — पानी (एक शब्द, तीन अर्थ)
रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून ।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून ।।
यहाँ 'पानी' के तीन अर्थ हैं — मोती के लिए चमक, मानुष (मनुष्य) के लिए सम्मान/इज़्ज़त, और चून (आटा) के लिए जल। पानी के बिना सब सूना है; इनका पानी चला जाए तो ये फिर नहीं उबरते।
दोहा 5 — विपत्ति भी अच्छी
रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय ।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय ।।
थोड़े दिनों की विपत्ति भी अच्छी है, क्योंकि उसी समय पता चलता है कि संसार में कौन हमारा हितैषी है और कौन अहितैषी।
दोहा 6 — सोच-समझकर बोलना
रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल ।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल ।।
जीभ पागल है — स्वर्ग-पाताल की उल्टी-सीधी बातें कह देती है और स्वयं तो मुँह के भीतर छिप जाती है, पर जूते सिर (कपाल) को खाने पड़ते हैं। सोच-समझकर बोलना चाहिए।
दोहा 7 — सच्चा मित्र
कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत ।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत ।।
धन-संपत्ति होने पर बहुत-से लोग तरह-तरह से सगे बन जाते हैं, पर जो विपत्ति की कसौटी पर खरे उतरें, वही सच्चे मित्र हैं।
शब्दार्थ
भाषा-बिन्दु
- कल – बीता/आने वाला दिन, मशीन, चैन
- पत्र – चिट्ठी, पत्ता, पन्ना
- कर – हाथ, टैक्स, (सूर्य की) किरण
- फल – खाने का फल, परिणाम, (हथियार की) धार
केन्द्रीय भाव / सीख
छोटे-बड़े सबका सम्मान, परोपकार, रिश्तों की रक्षा, आत्मसम्मान, सोच-समझकर बोलना, और सच्चे मित्र की पहचान — ये सात जीवन-मूल्य इन दोहों का सार हैं।
अभ्यास-संकेत
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓सातों दोहों को लय के साथ पढ़ना और हर दोहे का भावार्थ अपने शब्दों में बताना
- ✓दोहों में छिपे जीवन-मूल्य पहचानना — छोटे का महत्व, परोपकार, प्रेम, आत्मसम्मान, वाणी-संयम, सच्ची मित्रता
- ✓'पानी' जैसे अनेकार्थी शब्दों को समझना और कल, पत्र, कर, फल के कई अर्थ लिखना
- ✓अवधी/ब्रज के शब्दों (बिपति, सरग, मीत, थोरे) को आज की हिंदी से जोड़ना
- ✓लोक में प्रचलित पाठ-भेद (छिटकाय/चटकाय) का कारण — मौखिक परंपरा — समझना
👨🏫 Teaching Tips
- →हर दोहे को पहले लय में गाकर सुनाएँ, फिर बच्चों से समूह में दोहराएँ; ताली से ताल दें
- →कक्षा में एक सुई और (चित्र में) तलवार दिखाकर पूछें — कपड़ा किससे सिलेगा? फिर पहला दोहा खोलें
- →एक धागा तोड़कर गाँठ लगाएँ और बच्चों को गाँठ छूने दें — 'धागा प्रेम का' का भाव अपने-आप समझ आएगा
- →बोर्ड पर 'पानी' लिखकर तीन कॉलम बनाएँ — मोती / मानुष / चून — बच्चे सही अर्थ भरें
- →'जिह्वा बावरी' पर रोल-प्ले: एक बच्चा बिना सोचे कुछ कह देता है, दूसरा परिणाम दिखाता है
- →दोहा-अंत्याक्षरी खेलें — रहीम, कबीर, तुलसी, वृंद के दोहे इकट्ठे करवाएँ
- →मोबाइल से दोहों की ऑडियो रिकॉर्डिंग करवाएँ (पाठ की 'सरगम' गतिविधि) और कक्षा में सुनें
📋 Assessment Questions
- 'रहिमन पानी राखिये' में 'पानी' के तीनों अर्थ किस-किस शब्द से जुड़े हैं?
- 'तरुवर फल नहिं खात हैं' दोहे में प्रकृति से मनुष्य का कौन-सा गुण सिखाया गया है?
- सच्चे मित्र की पहचान कवि ने किस कसौटी से बताई है?
- 'कल' और 'पत्र' के तीन-तीन अर्थ लिखिए।
- अपने प्रिय दोहे का भाव पाठ में दिए उदाहरण की शैली में लिखिए।
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