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जलाते चलो – Class 6 Hindi Chapter 7 Notes & NCERT PDF

Class 6HindiChapter 7NCERT book: मल्हार (Malhar) - Hindi Class 6

Notes and a simple summary of Chapter 7 of the NCERT Class 6 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

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पाठ 7: जलाते चलो

पाठ-परिचय

पाठ 7: जलाते चलो — यह आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है, जिसके कवि हैं द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (1916–1998)। वे बाल साहित्य के प्रमुख रचनाकार थे; उनका गीत 'हम सब सुमन एक उपवन के' आज भी बहुत लोकप्रिय है।

विधा: गीत/कविता — हर पंक्ति गाने-बोलने में लगभग समान समय लेती है, इसलिए कविता लयबद्ध और प्रभावशाली है। हर बंद के अंत में 'मिलेगा' पर तुक मिलती है।

पाठ-सार

कवि मनुष्य से कहते हैं कि प्रेम (स्नेह) से भरे दीपक जलाते चलो — एक दिन धरती का अँधेरा अवश्य मिटेगा।

बंद 1 — बिना स्नेह का प्रकाश

जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर
कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।

विज्ञान में इतनी शक्ति है कि अमावस को पूर्णिमा-सा उजला बना दे, फिर भी आज दिन में भी विश्व पर अमावस की रात-सा अँधेरा घिर रहा है। कारण — "बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो, बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।" यानी प्रेम और मानवता के बिना केवल तकनीकी प्रगति से रास्ता नहीं मिलेगा।

बंद 2 — पहला दीप मनुष्य ने जलाया

जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी

यह बात मनुष्यों से कही गई है। मनुष्य ने ही सबसे पहले अँधेरे (तिमिर) की चुनौती स्वीकार की और दीप की नाव बनाकर तिमिर की नदी पार करने की तैयारी की। कवि कहते हैं — नाव बहाते चलो, कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।

बंद 3 — बुझे दीपों की ज्योति

युगों से मनुष्य ने तिमिर की शिला पर अनगिनत दीये जलाए; हवा (पवन) ने अनगिनत दीये बुझाए भी। पर जो दीप बुझ गए, वे भी अपनी ज्योति दे गए — उसी से अँधेरे को उजाला मिलेगा। (भलाई करने वाले चले जाते हैं, पर उनका प्रकाश रह जाता है।)

बंद 4 — दिये और तूफ़ान की कहानी

रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।।

दिये और तूफ़ान का संघर्ष सदा से चल रहा है और चलता रहेगा। जो पहली लौ जली, वह सोने-सी जल रही है और जलती रहेगी। धरती पर एक भी दीया रहा तो रात को सवेरा अवश्य मिलेगा।

प्रतीक

  • दिया/दीप – भलाई, प्रेम, ज्ञान, अच्छे कार्य
  • अँधेरा / तिमिर / निशा / अमावस – दुख, अज्ञान, बुराई, विश्व की समस्याएँ
  • सवेरा / उजेला / पूर्णिमा – सुख, शांति, आशा
  • तूफ़ान / पवन – बाधाएँ, कठिनाइयाँ
  • स्नेह – दो अर्थ: दीये का तेल और मनुष्य का प्रेम
  • शब्दार्थ

  • स्नेह – तेल; प्रेम
  • धरा – धरती
  • निहित – छिपा हुआ, समाया हुआ
  • अमावस – अमावस्या, जिस रात चंद्रमा नहीं दिखता
  • पूर्णिमा – जिस रात पूरा चंद्रमा दिखता है
  • निशा – रात
  • विद्युत-दिये – बिजली से जलने वाले बल्ब आदि
  • तिमिर – अंधकार
  • सरित – नदी
  • युग – काल (सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग)
  • शिला – पत्थर, चट्टान
  • साक्षी – गवाह
  • पवन – हवा (अनिल, समीर, वायु, मारुत)
  • उजेला – उजाला
  • स्वर्ण – सोना
  • भाषा-बिन्दु

  • सा/सी/से से समानता: निशा-सी, पूर्णिमा-सी, स्वर्ण-सी — समानता दिखाने के लिए 'सा/सी/से' से पहले योजक चिह्न (-) लगता है।
  • शब्दों के रूप: अमावस–अमावस्या, दिया–दीप/दीया, उजेला–उजाला, अनगिन–अनगिनत।
  • पंक्ति से वाक्य: "जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी" → "तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।"
  • शब्द-चयन का महत्व: 'जलाते चलो' में 'चलो' की जगह 'रहो' रखने पर आगे बढ़ते हुए करने का भाव निकल जाता है।
  • पवन के पर्यायवाची: अनिल, समीर, वायु, मारुत, हवा।
  • विज्ञान से जुड़ाव — चंद्रमा की कलाएँ

    चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है और सूर्य के प्रकाश से चमकता है। कलाएँ घटने वाले दिन — कृष्ण पक्ष ('कृष्ण' = काला), बढ़ने वाले दिन — शुक्ल पक्ष ('शुक्ल' = उजला)। पूर्णिमा पर चंद्रमा पूरा दिखता है, अमावस्या पर नहीं दिखता।

    केन्द्रीय भाव / सीख

    निराश न हों, चुनौतियों का सामना करें और सबके सुख के लिए भलाई के कार्य करते रहें। विज्ञान की प्रगति तभी सार्थक है जब उसमें प्रेम और मानवता हो।

    अभ्यास-संकेत

  • 'मेरी समझ से': कविता में मुख्य बात — भलाई के कार्य करते रहना; "जला दीप पहला तुम्हीं ने" — मनुष्यों से कहा गया।
  • मिलान: विद्युत-दिये वाली पंक्ति → विश्व की भलाई के बिना प्रगति व्यर्थ; अमावस निशा-सी → सुख-शांति क्यों कम हो रही है; तिमिर का किनारा → समस्याओं से छुटकारा मिलेगा; दिये स्नेह भर-भर → दूसरों के सुख के लिए प्रयास।
  • शब्द-चयन में लय और तुक देखें: नाव, किनारा, धरा, सवेरा, तिमिर, प्रथम।
  • सामान्य भूलें

  • 'स्नेह' का केवल एक अर्थ (प्रेम) लेना — यहाँ तेल और प्रेम दोनों अर्थ हैं।
  • कविता को दीपावली की कविता समझ लेना — दीप यहाँ प्रतीक है।
  • 'निशा-सी' में योजक चिह्न छोड़ देना।
  • कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष उलट देना (कृष्ण = घटना, शुक्ल = बढ़ना)।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓कविता को लय में पढ़ना और यह समझना कि हर पंक्ति लगभग समान समय में बोली जाती है
    • ✓दिया, तिमिर, निशा, सवेरा, तूफ़ान जैसे प्रतीकों का अर्थ समझना और 'स्नेह' के दो अर्थ (तेल/प्रेम) पहचानना
    • ✓कविता का केंद्रीय भाव बताना — निराश न होकर भलाई के कार्य करते रहना; प्रेम-रहित प्रगति व्यर्थ है
    • ✓'सा/सी/से' से समानता दिखाना और योजक चिह्न का सही प्रयोग करना; कविता-पंक्ति को गद्य-वाक्य में बदलना
    • ✓अमावस्या-पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष-शुक्ल पक्ष को चंद्रमा की कलाओं से जोड़ना

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →कक्षा में (सुरक्षित रूप से) एक दीया और एक बल्ब का चित्र दिखाकर पूछें — दोनों में क्या अंतर है? 'बिना स्नेह विद्युत-दिये' की बात यहीं से खोलें
    • →मुखड़े को ताली की ताल पर सामूहिक गान करवाएँ, फिर हर बंद अलग-अलग समूह गाए
    • →बोर्ड पर दो कॉलम — 'अँधेरे से जुड़े शब्द' / 'उजाले से जुड़े शब्द' — बच्चे कविता से शब्द छाँटकर लिखें
    • →'स्नेह' शब्द पर रुककर पूछें — दीये में स्नेह क्या है? मनुष्य में स्नेह क्या है?
    • →चंद्रमा की कलाओं के लिए गेंद और टॉर्च से मॉडल बनाएँ; फिर कैलेंडर में पूर्णिमा-अमावस्या ढूँढवाएँ
    • →'आपकी बात': हर बच्चा एक ऐसा अच्छा काम बताए जो उसने किसी के लिए किया — उसे 'एक दीया' कहें
    • →'पवन' के पर्यायवाची वाली अक्षर-जाल पहेली समूहों में प्रतियोगिता की तरह करवाएँ

    📋 Assessment Questions

    1. कविता में 'स्नेह' शब्द के कौन-से दो अर्थ हैं? उदाहरण सहित बताइए।
    2. 'बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो, बुझाओ इन्हें' — कवि किसे बुझाने को कहते हैं और क्यों?
    3. कविता में 'निशा' और 'सवेरा' किसके प्रतीक हैं?
    4. 'सा/सी/से' का प्रयोग करते हुए समानता वाले तीन वाक्य बनाइए।
    5. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में क्या अंतर है?

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