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मैया मैं नहिं माखन खायो – Class 6 Hindi Chapter 9 Notes & NCERT PDF

Class 6HindiChapter 9NCERT book: मल्हार (Malhar) - Hindi Class 6

Notes and a simple summary of Chapter 9 of the NCERT Class 6 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

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पाठ 9: मैया मैं नहिं माखन खायो

पाठ-परिचय

मैया मैं नहिं माखन खायो महाकवि सूरदास का प्रसिद्ध पद है। माना जाता है कि सूरदास का जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ और मृत्यु 16वीं शताब्दी में। उन्होंने अधिकांश जीवन मथुरा, गोवर्धन सहित ब्रज क्षेत्र में श्रीकृष्ण के भजन गाते हुए बिताया। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में हैं और अधिकतर में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का मनोहारी वर्णन है। सूरदास दृष्टिबाधित थे; उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना-शक्ति और काव्य-कौशल।

पूरा पद

मैया मैं नहिं माखन खायो।
भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥
तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो॥
ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।
सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥

पाठ-सार (भावार्थ)

बालक कृष्ण के मुँह पर माखन लगा है, पर वे माँ यशोदा के सामने एक के बाद एक तर्क देकर सिद्ध करना चाहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया:

  • समय का तर्क — "सुबह होते ही तुमने मुझे गायों के पीछे मधुबन भेज दिया। मैं चार पहर (लगभग 12 घंटे) बंसीवट में भटकता रहा और साँझ होने पर घर आया।" — तो माखन कब खाता?
  • शरीर का तर्क — "मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं; छीके तक कैसे पहुँचता?"
  • दोष दूसरों पर — "ये सब ग्वाल-बाल मुझसे बैर रखते हैं; इन्होंने ज़बरदस्ती मेरे मुँह पर माखन लिपटा दिया।"
  • भावनात्मक तर्क — "माँ, तुम मन की बहुत भोली हो, इनकी बातों में आ गईं। ज़रूर तुम्हारे मन में कोई भेद है, जो मुझे पराया जाया (दूसरे का बेटा) समझती हो।"
  • रूठना — "ये लो अपनी लाठी और कंबल (लकुटि-कमरिया), तुमने मुझे बहुत नाच नचाया।"
  • अंत में — "सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो" — बालक की भोली, चतुर बातें सुनकर यशोदा मुस्कुरा उठीं और कृष्ण को हृदय से, गले से लगा लिया। यहाँ माँ का क्रोध वात्सल्य (ममता) में बदल जाता है।

    शब्दार्थ

  • भोर – सुबह
  • गैयन के पाछे – गायों के पीछे
  • मधुबन – मथुरा के पास यमुना किनारे का एक वन
  • पठायो – भेज दिया
  • पहर – समय की इकाई (एक पहर = तीन घंटे; दिन-रात में आठ पहर)
  • बंसीवट – वह वट वृक्ष जिस पर चढ़कर कृष्ण बाँसुरी से गायों को बुलाते थे
  • साँझ – शाम
  • बहियन – बाँहें, भुजाएँ
  • छीको / छीका – छत से लटका रस्सियों का जाल, जिसमें दूध-दही रखते थे
  • केहि बिधि – किस प्रकार
  • बरबस – ज़बरदस्ती
  • लपटायो – लिपटा दिया, पोत दिया
  • भोरी – भोली
  • पतियायो – विश्वास कर लिया
  • जिय – मन, जी
  • उपजि – उत्पन्न होना
  • परायो जायो – पराए का जन्मा (दूसरे का बेटा)
  • लकुटि कमरिया – लाठी और छोटा कंबल
  • बिहँसि – मुस्कुराकर
  • उर – हृदय
  • भाषा-बिन्दु

  • ब्रजभाषा के शब्दरूप और उनके आज के रूप: पाछे → पीछे, परे → पड़े, कछु → कुछ, छोटो → छोटा, लै → लेकर, बिधि → विधि, नहिं → नहीं, भोरी → भोली।
  • वर्ण-परिवर्तन: 'भोरी' में ल → र बदला है (भोली → भोरी)। इसी तरह परे (पड़े) में ड़ → र।
  • तुक: पंक्तियों के अंतिम शब्दों की अंतिम ध्वनि मिलती है — पठायो / आयो, पायो / लपटायो, पतियायो / जायो, नचायो / लगायो। इसे तुक कहते हैं; पूरे पद में हर पंक्ति का तुक मिलता है।
  • छाप: अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम (सूरदास) दिया है — यह पद की विशेषता है।
  • समय-सूचक शब्द: भोर, पहर, साँझ, दोपहर (= दो पहर, लगभग 12 बजे)।
  • केन्द्रीय भाव / सीख

    यह पद वात्सल्य रस का सुंदर उदाहरण है। इसमें बालक की चतुराई, मासूमियत और तर्क-शक्ति और माँ की ममता दोनों दिखती हैं। माँ बच्चे की बातों का झूठ समझती है, फिर भी उसके भोलेपन पर रीझकर उसे गले लगा लेती है।

    अभ्यास-संकेत

  • "मैं माखन कैसे खा सकता हूँ?" — कृष्ण का तर्क: "मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?"
  • माँ के आने से पहले कृष्ण क्या कर रहे थे? — माखन खा रहे थे (इसीलिए मुँह पर माखन लगा था; गाय चराने की बात तो उनका बहाना है)।
  • कितने घंटे गाय चराई? — चार पहर × 3 घंटे = 12 घंटे। शाम छह बजे लौटे तो सुबह छह बजे निकले होंगे।
  • पहला पहर — दोपहर (12 बजे) दूसरे पहर का अंत है, तो पहला पहर लगभग सुबह 6 बजे शुरू होगा।
  • यशोदा ने हँसकर गले क्यों लगाया? — बालक की भोली-चतुर बातों और रूठने पर उनका मन ममता से भर गया।
  • सामान्य भूलें

  • 'भोरी' को 'भोर' (सुबह) समझ लेना — यहाँ भोरी = भोली।
  • 'पहर' को एक घंटा मानना — एक पहर = तीन घंटे।
  • 'मधुबन' को कोई शहर समझना — यह वन है।
  • 'परायो जायो' का अर्थ 'पराया चला गया' करना — सही अर्थ दूसरे का जन्मा (बेटा)।
  • यह मान लेना कि कृष्ण सच बोल रहे हैं — पद का आनंद इसी में है कि वे बहाने बना रहे हैं।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓सूरदास के पद में बालक कृष्ण माँ यशोदा को तर्क देकर सिद्ध करना चाहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया
    • ✓ब्रजभाषा के शब्दों (पाछे, कछु, भोरी, पठायो) को आज की हिंदी में बदलना और उनका अर्थ समझना
    • ✓तुक (अंतिम ध्वनि का मेल) और वर्ण-परिवर्तन (भोली → भोरी) जैसी काव्य/भाषा विशेषताएँ पहचानना
    • ✓पहर जैसी पारंपरिक समय-इकाई को समझना (एक पहर = तीन घंटे, दिन-रात में आठ पहर)
    • ✓पद में वात्सल्य (माँ की ममता) और बालक की चतुराई व भोलेपन का भाव अनुभव करना

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →पद को लय और हाव-भाव के साथ गाकर सुनाएँ; फिर बच्चों से समूह में गवाएँ
    • →एक बच्चा कृष्ण और एक यशोदा बनकर पद का अभिनय करे — हर तर्क पर यशोदा की प्रतिक्रिया दिखाएँ
    • →बोर्ड पर दो कॉलम बनाएँ — 'ब्रजभाषा रूप' और 'आज का रूप' — और बच्चों से भरवाएँ
    • →कृष्ण के पाँचों तर्कों को क्रम से कार्ड पर लिखवाकर 'तर्क-सीढ़ी' बनवाएँ
    • →पहर का गणित करवाएँ: चार पहर कितने घंटे, शाम 6 बजे लौटे तो कितने बजे निकले
    • →छीका जैसी पुरानी घरेलू वस्तुओं के चित्र दिखाकर उनके स्थानीय नाम पूछें
    • →'आपकी बात' — जब आपको कुछ न करने को सिद्ध करना पड़ा हो — अनुभव साझा करवाएँ

    📋 Assessment Questions

    1. पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या तर्क दिए? क्रम से लिखिए।
    2. यशोदा ने कृष्ण को हँसकर गले से क्यों लगा लिया?
    3. पाछे, कछु, भोरी, लै को आज की हिंदी में लिखिए और 'भोरी' में हुआ वर्ण-परिवर्तन बताइए।
    4. कृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे? गणना सहित उत्तर दीजिए।
    5. पद की दो काव्य-विशेषताएँ (तुक, कवि-छाप) उदाहरण सहित लिखिए।

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