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शूराः वयं धीराः वयम् – Class 6 Sanskrit Chapter 7 Notes & NCERT PDF

Class 6SanskritChapter 7NCERT book: दीपकम् (Deepakam) - Sanskrit Class 6

Notes and a simple summary of Chapter 7 of the NCERT Class 6 Sanskrit book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

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पाठ 7: शूराः वयं धीराः वयम् (हम शूर हैं, हम धीर हैं – देशभक्ति गीत)

पाठ-परिचय

सप्तमः पाठः – शूराः वयं धीराः वयम् (हम शूरवीर हैं, हम धैर्यवान हैं)

पाठ शिक्षक और छात्रों के संवाद से आरम्भ होता है। छात्र बताते हैं कि उन्होंने "शूरा वयं धीरा वयम्" गीत सुना। शिक्षक पूछते हैं – "'वयम्' इति शब्दः केषां कृते प्रयुक्तः ?" छात्र उत्तर देते हैं – "वयं भारतीयाः शूराः वीराः च स्मः ।" फिर सब मिलकर यह प्रेरणादायक देशभक्ति गीत सस्वर गाते हैं। इसके रचनाकार नागपुर (महाराष्ट्र) के प्रसिद्ध आधुनिक कवि श्रीधर भास्कर वर्णेकर हैं, जिन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पाठ-सार (गीत और भावार्थ)

शूरा वयं धीरा वयं वीरा वयं सुतराम् ।
गुणशालिनो बलशालिनो जयगामिनो नितराम् ॥१॥

हम शूर, धीर और अत्यन्त वीर हैं; गुणवान, बलवान और सदा विजय की ओर जाने वाले हैं।

दृढमानसा गतलालसाः प्रियसाहसाः सततम् ।
जनसेवका अतिभावुकाः शुभचिन्तका नियतम् ॥२॥

हम दृढ़ मन वाले, लालच-रहित, सदा साहस-प्रिय हैं; जनता के सेवक, अत्यन्त भावुक और निश्चित रूप से सबका भला सोचने वाले हैं।

धनकामना सुखवासना न च वञ्चना हृदये ।
ऊर्जस्वला वर्चस्वला अतिनिश्चला विजये ॥३॥

हमारे हृदय में न धन की अधिक कामना है, न सुख की वासना, न छल-कपट। हम ऊर्जावान, तेजस्वी और विजय के लिए अडिग हैं।

गतभीतयो धृतनीतयो दृढशक्तयो निखिलाः ।
यामो वयं समराङ्गणं विजयार्थिनो बालाः ॥४॥

हम सब भय-रहित, नीति पर चलने वाले, दृढ़ शक्ति वाले हैं; विजय चाहने वाले हम बालक समराङ्गण (युद्धभूमि) में जाते हैं।

जगदीश हे ! परमेश हे ! सकलेश हे ! भगवन् ।
जयमङ्गलं परमोज्ज्वलं नो देहि परमात्मन् ॥५॥

हे जगदीश, हे परमेश्वर, हे सबके स्वामी भगवन्! हे परमात्मा! हमें परम उज्ज्वल और मंगलमय विजय दीजिए।

भाव: हम भारतीय वीर, धैर्यवान, लोभ-रहित, जनसेवक और नीतिपूर्वक विजय चाहने वाले हैं। गीत में वर्णित गुण शङ्कराचार्य, शिवाजी महाराज, रानी लक्ष्मीबाई, स्वामी विवेकानन्द, सुभाषचन्द्र बोस, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महापुरुषों के जीवन में दिखते हैं।

शब्दार्थ

  • शूराः – पराक्रमी
  • सुतराम् / नितराम् – अत्यधिक रूप से
  • दृढमानसाः – दृढ़ मन वाले
  • गतलालसाः – लालच-रहित
  • प्रियसाहसाः – साहसी
  • नियतम् – निश्चित रूप से
  • ऊर्जस्वलाः – फुर्तीले, ऊर्जावान
  • वर्चस्वलाः – तेजस्वी
  • अतिनिश्चलाः – अडिग, दृढ़ निश्चय वाले
  • गतभीतयः – भय-रहित
  • धृतनीतयः – नीति का पालन करने वाले
  • निखिलाः – सम्पूर्ण, सभी
  • यामः – (हम) जाते हैं
  • समराङ्गणम् – युद्ध का मैदान
  • नः – हमें; देहि – दीजिए
  • व्याकरण-बिन्दु

    १. प्रातिपदिक (मूल शब्द)

    'रामः' का मूल रूप राम है – नामपद के मूल रूप को प्रातिपदिकम् कहते हैं।

    २. सर्वनाम – प्रथमा विभक्ति

  • तद् (वह): पुं. – सः, तौ, ते | स्त्री. – सा, ते, ताः | नपुं. – तत्, ते, तानि
  • एतद् (यह): पुं. – एषः, एतौ, एते | स्त्री. – एषा, एते, एताः | नपुं. – एतत्, एते, एतानि
  • अस्मद् (मैं): अहम्, आवाम्, वयम् – तीनों लिङ्गों में समान
  • युष्मद् (तुम): त्वम्, युवाम्, यूयम् – तीनों लिङ्गों में समान
  • ३. पुरुष और वचन (पठ् धातु, लट् लकार)

  • प्रथम पुरुष: छात्रः पठति, छात्रौ पठतः, छात्राः पठन्ति
  • मध्यम पुरुष: त्वं पठसि, युवां पठथः, यूयं पठथ
  • उत्तम पुरुष: अहं पठामि, आवां पठावः, वयं पठामः
  • ४. वचन-परिवर्तन (अकारान्त पुंलिङ्ग)

  • शूरः – शूरौ – शूराः; बालः – बालौ – बालाः; जनसेवकः – जनसेवकौ – जनसेवकाः
  • स्त्रीलिङ्ग: कामना – कामने – कामनाः; नपुं.: समराङ्गणम् – समराङ्गणे – समराङ्गणानि
  • अतः शूरः अहम् → शूराः वयम्।
  • अभ्यास-संकेत

  • गीत को सस्वर गाएँ, लिखें और कण्ठस्थ करें।
  • एकपद उत्तर: शूराः के ? – भारतीयाः; वयं कुत्र अतिनिश्चलाः स्मः ? – विजये; विजयार्थिनः कुत्र यामः ? – समराङ्गणम्।
  • कर्ता-क्रिया मिलान: अहम् – पठामि, आवाम् – पठावः, यूयम् – पठथ।
  • सामान्य भूलें

  • 'वयं पठति' लिखना – वयं पठामः सही है।
  • 'अहम्' और 'वयम्' के रूप लिङ्ग के अनुसार बदलना – ये तीनों लिङ्गों में समान रहते हैं।
  • 'ते' का भ्रम – ते तद् का पुं. बहुवचन भी है और स्त्री./नपुं. द्विवचन भी।
  • गीत में 'शूरा वयं' (सन्धि से विसर्ग लोप) और गद्य में 'शूराः वयम्' – दोनों सही हैं।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓श्रीधर भास्कर वर्णेकर द्वारा रचित देशभक्ति गीत 'शूरा वयं धीरा वयम्' को सस्वर गाना और उसका भावार्थ समझना
    • ✓गीत के गुणवाचक शब्द (दृढमानसाः, गतलालसाः, गतभीतयः, धृतनीतयः, ऊर्जस्वलाः) के अर्थ जानना
    • ✓तद्, एतद्, अस्मद्, युष्मद् सर्वनामों के प्रथमा विभक्ति के रूप तीनों वचनों में पहचानना
    • ✓लट् लकार में तीनों पुरुष और तीनों वचन (पठति–पठतः–पठन्ति, पठसि–पठथः–पठथ, पठामि–पठावः–पठामः) के अनुसार कर्ता-क्रिया मेल करना
    • ✓अकारान्त शब्दों का वचन-परिवर्तन (शूरः – शूरौ – शूराः) और 'प्रातिपदिक' की अवधारणा समझना

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →गीत को मार्चिंग लय में ताली/ढोल के साथ गवाएँ; प्रार्थना सभा में भी प्रस्तुत करवाएँ
    • →हर अन्तरे के बाद पूछें – 'यह गुण किस महापुरुष में दिखता है?' – और पाठ के महापुरुषों के चित्र दिखाएँ
    • →सर्वनाम-तालिका का बड़ा चार्ट बनवाएँ; तद्/एतद् के लिङ्ग-रंग अलग रखें (पुं. नीला, स्त्री. गुलाबी, नपुं. हरा)
    • →'पुरुष-वचन' खेल: शिक्षक कर्ता बोलें (यूयम्!), बच्चे तुरन्त क्रिया बोलें (पठथ!)
    • →कर्ता और क्रिया के अलग-अलग कार्ड बाँटें; बच्चे सही जोड़ी खोजकर वाक्य बनाएँ
    • →एकवचन से बहुवचन बदलने की प्रतियोगिता: 'शूरः अहम्' → 'शूराः वयम्'
    • →प्रत्येक छात्र गीत का एक गुण चुनकर उस पर अपने जीवन का उदाहरण हिन्दी में बताए

    📋 Assessment Questions

    1. क्या छात्र गीत को शुद्ध उच्चारण और लय के साथ गा सकते हैं और किसी अन्तरे का भाव बता सकते हैं?
    2. क्या छात्र गीत के कठिन शब्दों (गतलालसाः, वर्चस्वलाः, समराङ्गणम्) का अर्थ बताते हैं?
    3. क्या छात्र तद्/एतद्/अस्मद्/युष्मद् के प्रथमा रूप लिङ्ग-वचन के अनुसार सही चुनते हैं?
    4. क्या छात्र कर्ता के अनुसार सही क्रिया लगाते हैं (वयं पठामः, युवां पठथः)?
    5. क्या छात्र शब्दों का वचन-परिवर्तन सही करते हैं?

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