TalentJR

मित्राय नमः – Class 7 Sanskrit Chapter 3 Notes & NCERT PDF

Class 7SanskritChapter 3NCERT book: दीपकम् (Deepakam) - Sanskrit Class 7

Notes and a simple summary of Chapter 3 of the NCERT Class 7 Sanskrit book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

🎧 Listen to the content

पाठ 3: मित्राय नमः (सूर्य को नमस्कार – सूर्यनमस्कार)

पाठ-परिचय

तृतीयः पाठः – मित्राय नमः (सूर्य को नमस्कार)

यह पाठ योग और सूर्यनमस्कार पर आधारित एक संवाद है। योगिता बताती है कि वह प्रतिदिन सुबह पिता के साथ उद्यान जाती है, जहाँ लोग व्यायाम और योगासन करते हैं। सब बच्चे उत्साह से योगशिक्षिका (आचार्या) के पास जाते हैं। आचार्या उन्हें सूर्यनमस्कार सिखाती हैं और उसके बारह मन्त्र तथा लाभ बताती हैं। पाठ का व्याकरण-केन्द्र है – चतुर्थी विभक्ति (‘नमः’ के योग में और ‘देने’ के अर्थ में)।

पाठ-सार

संवाद

  • योगिता: ‘अहं प्रतिदिनं प्रातः पित्रा सह उद्यानं गच्छामि।’
  • बच्चे आचार्या को प्रणाम करते हैं – ‘नमो नमः आचार्ये!’ आचार्या आशीर्वाद देती हैं – ‘शुभं भवतु।’
  • योगिता कहती है – ‘आचार्ये! अद्य सूर्यनमस्कारं शिक्षयतु।’
  • आचार्या: सूर्यनमस्कारः द्वादशानाम् आसनानां समाहारः अस्ति – सूर्यनमस्कार बारह आसनों का समूह है। हर आसन से पहले एक मन्त्र बोला जाता है।
  • सूर्यनमस्कार के बारह मन्त्र

    १. ॐ मित्राय नमः

    २. ॐ रवये नमः

    ३. ॐ सूर्याय नमः

    ४. ॐ भानवे नमः

    ५. ॐ खगाय नमः

    ६. ॐ पूष्णे नमः

    ७. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः

    ८. ॐ मरीचये नमः

    ९. ॐ आदित्याय नमः

    १०. ॐ सवित्रे नमः

    ११. ॐ अर्काय नमः

    १२. ॐ भास्कराय नमः

    अन्त में – ॐ सवितृसूर्यनारायणाय नमः। ये सब सूर्य के ही नाम हैं – मित्र, रवि, सूर्य, भानु, खग, पूषा, हिरण्यगर्भ, मरीचि, आदित्य, सविता, अर्क, भास्कर।

    सूर्यनमस्कार का लाभ

    आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।
    आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥

    अर्थ: जो प्रतिदिन सूर्य को नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, बुद्धि (प्रज्ञा), बल, पराक्रम (वीर्य) और तेज बढ़ते हैं।

  • सूर्यनमस्कार योगासनों में श्रेष्ठ आसनक्रम है।
  • इससे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बल बढ़ता है।
  • संकल्प: ‘वयं प्रतिदिनं सूर्यनमस्कारं करवाम। स्वस्थं शरीरं स्वस्थं मनः च प्राप्नवाम।’
  • योग्यताविस्तर (अतिरिक्त जानकारी)

  • विश्वयोगदिवसः – प्रतिवर्ष २१ जून।
  • योगसूत्रम् – प्रणेता महर्षि पतञ्जलि; इसमें १९६ सूत्र हैं।
  • हठयोगप्रदीपिका – रचयिता स्वामी स्वात्माराम; इसमें अनेक आसनों का वर्णन है – वज्रासन, पद्मासन, पश्चिमोत्तानासन, हलासन, ताडासन।
  • शब्दार्थ

  • अनुवदन्तु – दोहराइए
  • अग्रिमकक्षायाम् – अगली कक्षा में
  • समाहारः – समूह
  • प्रज्ञा – बुद्धि, मेधा
  • वीर्यम् – पराक्रम, वीरता
  • तेजः – कान्ति, दीप्ति
  • आध्यात्मिकम् – आत्मा से सम्बन्धित
  • स्वस्थम् – नीरोग
  • दिने दिने – प्रतिदिन
  • खगः, पूषा, मरीचिः, सविता, अर्कः – सूर्य के नाम
  • व्याकरण-बिन्दु

    नियम १ – ‘नमः’ के योग में चतुर्थी

    ‘नमः’ शब्दस्य योगे चतुर्थी विभक्तिः भवति । यथा – भास्कराय नमः ।
  • अग्नि → अग्नये नमः; आचार्या → आचार्यायै नमः; देवी → देव्यै नमः; भगिनी → भगिन्यै नमः; जननी → जनन्यै नमः; पृथिवी → पृथिव्यै नमः; नदी → नद्यै नमः; वृक्ष → वृक्षाय नमः; जनक → जनकाय नमः।
  • नियम २ – दान के अर्थ में चतुर्थी (दा, यच्छ् धातु)

    शिक्षकः छात्राय पुस्तकं ददाति / यच्छति ।
  • माता याचकाय वस्त्रं ददाति; पौत्रः पितामह्यै औषधं ददाति; अहं भगिन्यै उपायनं ददामि; पिता सेविकायै वेतनं ददाति; त्वं मित्राय पुष्पं ददासि; देवः भक्ताय आशीर्वादं ददाति; आरक्षकः चोराय दण्डं ददाति।
  • चतुर्थी विभक्ति के रूप

  • अकारान्त पुंलिङ्ग (छात्र): छात्राय – छात्राभ्याम् – छात्रेभ्यः
  • आकारान्त स्त्रीलिङ्ग (बालिका): बालिकायै – बालिकाभ्याम् – बालिकाभ्यः
  • ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग (नदी): नद्यै – नदीभ्याम् – नदीभ्यः
  • अकारान्त नपुंसकलिङ्ग (फल): फलाय – फलाभ्याम् – फलेभ्यः
  • मन्त्रों के विशेष रूप: रवि → रवये, भानु → भानवे, पूषन् → पूष्णे, मरीचि → मरीचये, सवितृ → सवित्रे
  • ‘दा’ धातु (परस्मैपद)

  • लट्-लकार: ददाति – दत्तः – ददति / ददासि – दत्थः – दत्थ / ददामि – दद्वः – दद्मः
  • लोट्-लकार: ददातु – दत्ताम् – ददतु / देहि – दत्तम् – दत्त / ददानि – ददाव – ददाम
  • अभ्यास-संकेत

  • एक-पद उत्तर: ‘शुभं भवतु’ – आचार्या कहती है; योगिता सूर्यनमस्कारं सिखाने को कहती है; सूर्यनमस्कार द्वादशानाम् आसनों का समाहार है; योगासनेषु श्रेष्ठ है; लोग स्वस्थं शरीर पाते हैं।
  • प्रथम मन्त्र: ॐ मित्राय नमः।
  • रिक्त स्थान: प्रत्येकस्मात् सूर्यनमस्कारात् पूर्वम्…; एकेन श्लोकेन…; आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति…
  • परियोजना-श्लोक ‘विद्या विवादाय धनं मदाय…’ में चतुर्थी पद: विवादाय, मदाय, परिपीडनाय, ज्ञानाय, दानाय, रक्षणाय।
  • सामान्य भूलें

  • ‘नमः’ के साथ द्वितीया लिखना (‘सूर्यं नमः’) – सही है सूर्याय नमः।
  • स्त्रीलिङ्ग चतुर्थी में ‘-आय’ लगाना (‘बालिकाय’) – सही बालिकायै, नद्यै।
  • ‘रवि’ का चतुर्थी ‘रवाय’ या ‘रविये’ लिखना – सही रूप रवये; भानु → भानवे।
  • सूर्यनमस्कार के आसनों की संख्या १० या १२ से अधिक बताना – सही संख्या १२ (द्वादश)।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓सूर्यनमस्कार बारह आसनों का समाहार है – इसके बारह मन्त्र क्रम से बोलना
    • ✓सूर्यनमस्कार के लाभ वाला श्लोक (आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजः) और उसका अर्थ जानना
    • ✓‘नमः’ के योग में तथा ‘दा/यच्छ्’ (देने) के अर्थ में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग करना
    • ✓पुं., स्त्री. (आकारान्त, ईकारान्त) और नपुं. शब्दों के चतुर्थी रूप लिखना
    • ✓‘दा’ धातु के लट् और लोट् लकार के रूप तथा योग से जुड़े तथ्य (२१ जून, पतञ्जलि) जानना

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →कक्षा में बारह मन्त्रों के साथ सूर्यनमस्कार के आसनों का सरल प्रदर्शन करवाएँ
    • →प्रत्येक मन्त्र के शब्द (रवये, भानवे, पूष्णे) का मूल शब्द बोर्ड पर लिखकर चतुर्थी रूप समझाएँ
    • →‘कस्मै/कस्यै ददाति?’ खेल – एक विद्यार्थी वस्तु देता है, कक्षा चतुर्थी वाला वाक्य बोलती है
    • →आसनों के चित्रों पर मन्त्र लिखकर भित्तिपत्र बनवाएँ (परियोजना)
    • →‘दा’ धातु के लट् और लोट् रूपों को ताली-लय में दोहरवाएँ
    • →विश्वयोगदिवस पर विद्यार्थियों से संस्कृत में पाँच वाक्य लिखवाएँ
    • →संवाद को पात्रों में बाँटकर अभिनय कराएँ

    📋 Assessment Questions

    1. सूर्यनमस्कार कितने आसनों का समाहार है और उसका प्रथम मन्त्र क्या है?
    2. ‘आदित्यस्य नमस्कारान्…’ श्लोक के अनुसार सूर्यनमस्कार से क्या-क्या बढ़ता है?
    3. ‘नमः’ के योग में कौन-सी विभक्ति होती है? दो उदाहरण दीजिए।
    4. ‘भगिनी’ और ‘फल’ शब्दों के चतुर्थी विभक्ति के तीनों रूप लिखिए।
    5. ‘दा’ धातु लोट्-लकार मध्यमपुरुष एकवचन का रूप क्या है?

    👩‍🏫 Class 7 Sanskrit classes near you — online or at home

    Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.

    • Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
    • Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
    • At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.