सेवा हि परमो धर्मः – Class 7 Sanskrit Chapter 5 Notes & NCERT PDF
Notes and a simple summary of Chapter 5 of the NCERT Class 7 Sanskrit book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.
🎧 Listen to the content
पाठ 5: सेवा हि परमो धर्मः (सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है)
पाठ-परिचय
पञ्चमः पाठः – सेवा हि परमो धर्मः (सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है)
पाठ की शुरुआत कक्षा के एक संवाद से होती है। अध्यापिका पूछती हैं – "जीवने सफलतायै मानवः किं किम् अर्जयेत्?" (जीवन में सफलता के लिए मनुष्य क्या-क्या कमाए?) छात्र उत्तर देते हैं – विद्याम्, उपाधिम् (डिग्री), पदवीम् (पद), धनम्। अध्यापिका समझाती हैं कि इतना ही पर्याप्त नहीं, मानवीयाः गुणाः अपि आवश्यकाः – मानवीय गुण भी ज़रूरी हैं।
सत्यं, करुणा, उदारता, सेवा, परोपकारः, अक्रोधः इत्यादयः मानवीयाः गुणाः सन्ति ।
उदाहरण दिया गया है – सिद्धार्थ के जीवन में विद्या, धन और पद सब कुछ था, किन्तु मानवीय गुणों से ही वे महात्मा बुद्ध बने। इसके बाद इन्हीं गुणों से जुड़ी नागार्जुन की कथा पढ़ाई गई है।
पाठ-सार (कथा)
नागार्जुन को सहायक चाहिए
परीक्षा
दो युवकों का व्यवहार
नागार्जुन का निर्णय
सेवाभावनां विना चिकित्सकः कथं भवेत् ?
(सेवा-भावना के बिना कोई चिकित्सक कैसे हो सकता है?)
सीख: योग्यता (विद्या) के साथ सेवा-भावना और करुणा ही किसी व्यक्ति को सच्चा चिकित्सक और सच्चा मनुष्य बनाती है।
शब्दार्थ
ध्यान दें: आयुर्वेद में 'रसायनम्' शब्द 'औषधम्' (दवा) के अर्थ में प्रयुक्त होता है।
व्याकरण-बिन्दु
(क) क्तवतु प्रत्यय – भूतकाल का अर्थ
धातु + क्तवतु से भूतकाल के अर्थ वाले पद बनते हैं। ये लिङ्ग के अनुसार बदलते हैं (पुरुष के अनुसार नहीं):
उदाहरण – सः पठितवान्। छात्राः पठितवन्तः। सा पठितवती। बालिकाः पठितवत्यः। त्वं/अहं पठितवान् (बालक) या पठितवती (बालिका)।
(ख) 'स्म' अव्यय से भूतकाल
वर्तमानकाल की क्रिया के साथ स्म जोड़ने पर भूतकाल का अर्थ होता है – सः बाल्ये पुस्तकानि पठति स्म (= अपठत्)।
(ग) भूतकाल बताने के तीन तरीके (पाठ की सारणी से)
योग्यताविस्तर – स्वास्थ्य-रक्षा के नियम
ब्राह्मे मुहूर्ते उत्तिष्ठेत् स्वस्थो रक्षार्थमायुषः ।
सर्वमेव परित्यज्य शरीरमनुपालयेत् ॥
(आयु की रक्षा के लिए स्वस्थ व्यक्ति ब्राह्म मुहूर्त में उठे; सब कुछ छोड़कर भी शरीर की रक्षा करे।)
भोजनान्ते पिबेत् तक्रं वासरान्ते पिबेत्पयः ।
निशान्ते च पिबेत् वारि त्रिभी रोगो न जायते ॥
(भोजन के अंत में छाछ, दिन के अंत में दूध और रात के अंत में (सुबह) पानी पीने से रोग नहीं होता।)
अभ्यास-संकेत
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓सफलता के लिए विद्या, उपाधि, पद और धन के साथ सत्य, करुणा, सेवा, परोपकार जैसे मानवीय गुण भी आवश्यक हैं
- ✓नागार्जुन ने औषध न ला सकने वाले पर रोगी की सेवा करने वाले युवक को सहायक चुना – सेवा-भावना के बिना चिकित्सक नहीं
- ✓धातु + क्तवतु से भूतकाल: पठितवान्/पठितवन्तः (पुं.), पठितवती/पठितवत्यः (स्त्री.)
- ✓वर्तमान क्रिया + 'स्म' से भी भूतकाल का अर्थ – पठति स्म = अपठत्
- ✓लङ् लकार, क्तवतु और 'स्म' – भूतकाल बताने के तीनों तरीकों का अभ्यास (गम्, पा, दृश्, दा आदि)
👨🏫 Teaching Tips
- →पाठ से पहले पूछें – 'सफल व्यक्ति में क्या-क्या होना चाहिए?' – उत्तरों को विद्या/धन और मानवीय गुणों के दो कॉलम में लिखें
- →नागार्जुन की कथा का तीन पात्रों (नागार्जुन, पहला युवक, दूसरा युवक) वाला छोटा नाट्य-रूपांतरण कराएँ
- →कथा के अंत से पहले रुककर पूछें – 'आप नागार्जुन होते तो किसे चुनते और क्यों?'
- →क्तवतु रूपों के लिए लड़के-लड़कियों से स्वयं के बारे में बुलवाएँ – 'अहं भोजनं कृतवान्/कृतवती'
- →बोर्ड पर लट् → लङ् → क्तवतु → स्म की चार-खाने वाली सूची बनाकर दस धातुओं से भरवाएँ
- →योग्यताविस्तर के स्वास्थ्य-श्लोकों का सस्वर पाठ कराएँ और आयुर्वेदीय पौधों (बिल्व, लवङ्ग) की सूची बनवाएँ
- →परियोजना: परिवार या समाज में सेवा करने वाले दो लोगों का परिचय लिखवाएँ
📋 Assessment Questions
- नागार्जुन ने दोनों युवकों को राजमार्ग से जाने को क्यों कहा था?
- पहले युवक को सहायक क्यों नहीं चुना गया? पाठ के शब्दों में बताइए।
- 'बालिका पुस्तकं पठति' को क्तवतु प्रत्यय से भूतकाल में बदलिए।
- 'गच्छति स्म' का लङ् लकार और क्तवतु (पुंलिङ्ग) रूप लिखिए।
- पाठ में बताए गए कोई चार मानवीय गुण संस्कृत में लिखिए।
Ask the AI tutor about Class 7 Sanskrit Chapter 5
Get question answers, important questions, a quick MCQ quiz or a simple explanation of “सेवा हि परमो धर्मः”. Free — sign in with Google.
- Explain सेवा हि परमो धर्मः in simple words
- Answer the NCERT exercise questions of Class 7 Sanskrit Chapter 5 step by step
- Give me 5 important questions with answers from सेवा हि परमो धर्मः
- Quiz me with 5 MCQs on सेवा हि परमो धर्मः
- Make last-minute revision notes for Class 7 Sanskrit Chapter 5
- Explain सेवा हि परमो धर्मः with an everyday example
👩🏫 Class 7 Sanskrit classes near you — online or at home
Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.
- Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
- Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
- At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.
Keep learning
- Maharashtra Board Class 7 SolutionsState board textbook solutions
- TalentJR FlashcardsQuick revision cards
- Coding for KidsLearn to code with TalentJR
All chapters in दीपकम् (Deepakam) - Sanskrit Class 7
- 1. वन्दे भारतमातरम्
- 2. नित्यं पिबामः सुभाषितरसम्
- 3. मित्राय नमः
- 4. न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम्
- 5. सेवा हि परमो धर्मः
- 6. क्रीडाम वयं श्लोकान्त्याक्षरीम्
- 7. ईशावास्यम् इदं सर्वम्
- 8. हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः
- 9. अन्नाद् भवन्ति भूतानि
- 10. दशमः कः ?
- 11. द्वीपेषु रम्यः द्वीपोऽण्डमानः
- 12. वीराङ्गना पन्नाधाया
- 13. अतिरिक्तम् अध्ययनम्: वर्णमात्रा-परिचयः
- 14. परिशिष्टम् १: शब्दरूपाणि
- 15. परिशिष्टम् २: धातुरूपाणि