नौबतखाने में इबादत – Class 10 Hindi Chapter 11 Notes & NCERT PDF
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पाठ 11: नौबतखाने में इबादत
लेखक-परिचय
यतींद्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। वे अर्द्धवार्षिक पत्रिका 'सहित' का संपादन करते हैं और सन् 1999 से साहित्य-कलाओं के लिए 'विमला देवी फाउंडेशन' का संचालन कर रहे हैं।
पाठ-परिचय
'नौबतखाने में इबादत' प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर लिखा गया व्यक्ति-चित्र है। इसमें उनकी रुचियों, अंतर्मन की बुनावट, संगीत-साधना और लगन को संवेदनशील भाषा में व्यक्त किया गया है। लेखक बताते हैं कि संगीत एक आराधना है — इसका शास्त्र है, अभ्यास ज़रूरी है, गुरु-शिष्य परंपरा, पूर्ण तन्मयता, धैर्य और मंथन ज़रूरी है। बिस्मिल्ला खाँ में यही लगन थी; इसीलिए 80 वर्ष की उम्र में भी उनकी साधना चलती रही।
पाठ-सार
बचपन और काशी
डुमराँव और शहनाई
शहनाई में रीड लगती है जो नरकट (एक प्रकार की घास) से बनती है; यह नरकट डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारे मिलता है। इसलिए शहनाई की दुनिया में डुमराँव याद किया जाता है — और इसलिए भी कि बिस्मिल्ला खाँ का जन्म वहीं हुआ।
रसूलनबाई और बतूलनबाई
चौदह साल की उम्र में बालाजी मंदिर रियाज़ के लिए जाते समय अमीरुद्दीन रसूलनबाई और बतूलनबाई के घर वाले रास्ते से जाना पसंद करते थे, जहाँ ठुमरी, टप्पे, दादरा सुनाई देते। खाँ साहब ने माना कि संगीत के प्रति आरंभिक आसक्ति इन्हीं गायिका बहिनों से मिली।
शहनाई: 'सुषिर वाद्यों में शाह'
सुर की इबादत
अस्सी बरस से वे खुदा से सच्चा सुर माँगते रहे:
"मेरे मालिक एक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।"
लेखक कहते हैं — जैसे हिरन अपनी ही महक (कस्तूरी) खोजता फिरता है, वैसे ही खाँ साहब सोचते रहे कि सातों सुरों को बरतने की तमीज़ उन्हें अभी तक क्यों नहीं आई। यह उनकी विनम्रता है।
मुहर्रम से जुड़ाव
मुहर्रम के दस दिन उनके खानदान में न शहनाई बजती, न किसी कार्यक्रम में भाग लिया जाता। आठवीं तारीख को खाँ साहब खड़े होकर शहनाई बजाते और दालमंडी में फातमान के करीब आठ किलोमीटर पैदल रोते हुए नौहा बजाते। उस दिन कोई राग नहीं बजता।
जवानी की यादें और बालसुलभ हँसी
गंगा-जमुनी संस्कृति के प्रतीक
फटी तहमद
भारतरत्न मिलने के बाद एक शिष्या ने फटी तहमद पर टोका, तो बोले:
"धत्! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं... मालिक से यही दुआ है, फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।"
बदलती काशी का दुख
सन् 2000 तक पक्का महाल से मलाई बरफ़ बेचने वाले चले गए; देशी घी, कचौड़ी-जलेबी का स्वाद, संगतियों के प्रति आदर, घंटों का रियाज़, कजली-चैती का ज़माना — सब खो रहा था। यह उन्हें व्यथित करता था।
सम्मान और विदा
भारतरत्न, पद्मविभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और अनेक मानद उपाधियाँ मिलीं। 21 अगस्त 2006 को नब्बे वर्ष की आयु में वे विदा हुए। उनकी सबसे बड़ी देन — पूरे अस्सी बरस संगीत को संपूर्णता से सीखने की जिजीविषा।
व्यक्ति-चित्रण: बिस्मिल्ला खाँ
शब्दार्थ
भाषा-बिन्दु
केन्द्रीय भाव
कला साधना है, दिखावा नहीं। सच्चा कलाकार विनम्र रहता है और जीवन भर सीखता है। बिस्मिल्ला खाँ हिंदू-मुस्लिम एकता और काशी की गंगा-जमुनी संस्कृति के जीवंत प्रतीक थे।
बोर्ड परीक्षा हेतु
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓व्यक्ति-चित्र विधा और बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ समझना
- ✓शहनाई, सुषिर-वाद्य, रीड-नरकट और डुमराँव के संबंध को जानना
- ✓संगीत को साधना और इबादत के रूप में देखने की दृष्टि विकसित करना
- ✓बिस्मिल्ला खाँ को गंगा-जमुनी (मिली-जुली) संस्कृति के प्रतीक के रूप में पहचानना
- ✓मिश्र वाक्यों के उपवाक्य पहचानना और उर्दू-बनारसी मिश्रित भाषा की विशेषता समझना
👨🏫 Teaching Tips
- →कक्षा में बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई की कोई रिकॉर्डिंग सुनाकर पाठ आरंभ करें
- →भारत के मानचित्र पर डुमराँव, सोन नदी और काशी चिह्नित करवाएँ
- →वाद्यों की चार श्रेणियों (तत, सुषिर, घन, अवनद्ध) का चार्ट बनवाएँ
- →'मिली-जुली संस्कृति' के प्रसंग विद्यार्थियों से पाठ में खोजकर सूचीबद्ध करवाएँ
- →फटी तहमद वाले संवाद का अभिनय करवाकर उनकी सादगी पर चर्चा करें
- →किसी प्रिय संगीतकार पर अनुच्छेद और शहनाई कार्यक्रम का नोटिस लिखवाएँ
- →मिश्र वाक्यों के उपवाक्य छाँटने का अभ्यास पाठ के वाक्यों से करवाएँ
📋 Assessment Questions
- शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
- बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?
- किन प्रसंगों से पता चलता है कि बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे?
- काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?
- 'फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है...' — आशय स्पष्ट कीजिए
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