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नेताजी का चश्मा – Class 10 Hindi Chapter 7 Notes & NCERT PDF

Class 10HindiChapter 7NCERT book: क्षितिज भाग 2 (Kshitij) - Hindi Class 10

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पाठ 7: नेताजी का चश्मा

लेखक-परिचय

स्वयं प्रकाश (1947–2019) का जन्म इंदौर (मध्य प्रदेश) में हुआ। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में नौकरी की। उनका बचपन और नौकरी का बड़ा हिस्सा राजस्थान में बीता। वे वसुधा पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे।

  • प्रमुख कहानी-संग्रह: सूरज कब निकलेगा, आएँगे अच्छे दिन भी, आदमी जात का आदमी, संधान (कुल तेरह कहानी-संग्रह)
  • उपन्यास: बीच में विनय, ईंधन
  • सम्मान: पहल सम्मान, बनमाली पुरस्कार, राजस्थान साहित्य अकादेमी पुरस्कार
  • विशेषता: मध्यवर्गीय जीवन के कुशल चितेरे; वर्ग-शोषण, जाति, संप्रदाय और लिंग के आधार पर भेदभाव के विरुद्ध स्वर; रोचक किस्सागोई शैली, जो हिंदी की वाचिक परंपरा को समृद्ध करती है।
  • पाठ-प्रवेश

    चारों ओर सीमाओं से घिरे भूभाग का नाम ही देश नहीं होता। देश बनता है उसमें रहने वाले सभी नागरिकों, नदियों, पहाड़ों, पेड़-पौधों, वनस्पतियों, पशु-पक्षियों से और इन सबसे प्रेम करने तथा इनकी समृद्धि के लिए प्रयास करने का नाम देशभक्ति है।

    यह कहानी कैप्टन चश्मेवाले के माध्यम से उन करोड़ों साधारण नागरिकों के योगदान को रेखांकित करती है जो अपने-अपने ढंग से देश-निर्माण में सहयोग करते हैं — और बताती है कि इसमें बच्चे भी शामिल हैं।

    पाठ-सार

    कस्बा और मूर्ति

    हालदार साहब को कंपनी के काम से हर पंद्रहवें दिन एक छोटे कस्बे से गुज़रना पड़ता था। कस्बे में एक लड़कों का स्कूल, एक लड़कियों का स्कूल, सीमेंट का छोटा कारखाना, दो ओपन एयर सिनेमाघर और एक नगरपालिका थी। नगरपालिका के किसी उत्साही अधिकारी ने मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की संगमरमर की मूर्ति लगवा दी। लेखक अनुमान लगाता है कि बजट कम होने और बोर्ड की शासनावधि समाप्त होने के कारण यह काम कस्बे के इकलौते हाई स्कूल के ड्राइंग मास्टर मोतीलाल को सौंपा गया, जिन्होंने महीने-भर में मूर्ति "पटक देने" का विश्वास दिलाया।

    मूर्ति टोपी की नोक से कोट के दूसरे बटन तक लगभग दो फुट ऊँची (बस्ट) थी — सुंदर, फ़ौजी वर्दी में, जिसे देखते ही "दिल्ली चलो" और "तुम मुझे खून दो…" याद आते। कमी एक ही थी — नेताजी की आँखों पर संगमरमर का चश्मा नहीं था; उसकी जगह असली चश्मे का चौड़ा काला फ्रेम पहना दिया गया था।

    बदलते चश्मे का रहस्य

    हालदार साहब हर बार नया चश्मा देखते — कभी मोटे फ्रेम का चौकोर, कभी तार के फ्रेम का गोल। पानवाले ने बताया — कैप्टन चश्मेवाला ऐसा करता है। कोई ग्राहक मूर्ति वाला फ्रेम माँगता तो कैप्टन वह फ्रेम उतारकर ग्राहक को दे देता और मूर्ति पर दूसरा लगा देता। असली चश्मे के बारे में पानवाले ने हँसकर कहा:

    मास्टर बनाना भूल गया।

    हालदार साहब चश्मेवाले की देशभक्ति के समक्ष नतमस्तक हो गए। पूछा कि क्या कैप्टन नेताजी का साथी या आज़ाद हिंद फ़ौज का सिपाही है? पानवाले ने मज़ाक उड़ाया:

    वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!

    हालदार साहब को एक देशभक्त का यह मज़ाक अच्छा नहीं लगा। कैप्टन एक बेहद बूढ़ा, मरियल-सा लँगड़ा आदमी था — सिर पर गांधी टोपी, आँखों पर काला चश्मा, एक हाथ में छोटी संदूकची और दूसरे हाथ में बाँस पर टँगे बहुत-से चश्मे। उसकी दुकान भी नहीं थी; वह फेरी लगाता था।

    कैप्टन की मृत्यु और अंत

    दो साल तक हालदार साहब बदलते चश्मे देखते रहे। फिर एक दिन मूर्ति पर कोई चश्मा नहीं था। पानवाले ने उदास होकर, आँखें पोंछते हुए कहा — "साहब! कैप्टन मर गया।" हालदार साहब सोचते रहे:

    क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-जिंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।

    पंद्रह दिन बाद उन्होंने ड्राइवर से कहा कि चौराहे पर नहीं रुकना। पर आदत से मजबूर आँखें मूर्ति की ओर उठ गईं — मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। हालदार साहब जीप से कूदकर मूर्ति के सामने अटेंशन में खड़े हो गए और उनकी आँखें भर आईं।

    पात्र-चित्रण

  • हालदार साहब: संवेदनशील, देशभक्त, भावुक; छोटी-सी बात में बड़ा अर्थ देखने वाले। मूर्ति को नियमित निहारना उनकी देश के प्रति श्रद्धा दिखाता है।
  • कैप्टन चश्मेवाला: गरीब, बूढ़ा, लँगड़ा फेरीवाला, पर सच्चा देशभक्त। नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति उसे आहत करती थी। सेनानी न होते हुए भी उसकी देशभक्ति के कारण लोग उसे "कैप्टन" कहते थे।
  • पानवाला: काला, मोटा, खुशमिज़ाज; पहले कैप्टन का मज़ाक उड़ाता है, पर उसकी मृत्यु पर दुखी होकर रो पड़ता है — भीतर से संवेदनशील।
  • मास्टर मोतीलाल: कस्बे के ड्राइंग मास्टर; सीमित साधनों में सराहनीय प्रयास किया, पर चश्मा बनाना भूल गए।
  • शब्दार्थ

  • कस्बा — छोटा नगर
  • बस्ट — सिर से छाती तक की मूर्ति
  • कौतुक / कौतूहल — जिज्ञासा, उत्सुकता
  • दुर्दमनीय — जिसे दबाना कठिन हो
  • ऊहापोह — असमंजस, सोच-विचार
  • शासनावधि — शासन का समय
  • खुशमिज़ाज — प्रसन्नचित्त
  • दरकार — आवश्यकता
  • नतमस्तक — सिर झुकाए हुए, आदर से भरा
  • अवाक् — चकित, मौन
  • संदूकची — छोटा संदूक
  • होम देना — न्योछावर कर देना
  • हृदयस्थली — बीच का मुख्य स्थान
  • सरकंडा — एक प्रकार की पतली, पोली घास/डंडी
  • भाषा-बिन्दु

  • स्थानीय बोली का प्रभाव — "कोई गिराक आ गया समझो… कैप्टन किदर से लाएगा?… उदर दूसरा बिठा दिया।" मानक हिंदी: कोई ग्राहक आ गया समझो। उसे चौड़ा फ्रेम चाहिए। तो कैप्टन कहाँ से लाएगा? तो उसे मूर्तिवाला दे दिया और उधर दूसरा लगा दिया।
  • अंग्रेज़ी शब्दों का सहज मेल — "भई खूब! क्या आइडिया है।", "चश्मा चेंज कर देता है" — भाषा को जीवंत और बोलचाल के निकट बनाते हैं।
  • निपात — तो, ही, भी (जैसे "नगरपालिका थी तो कुछ-न-कुछ करती भी रहती थी", "स्थानीय कलाकार को ही अवसर…")।
  • वाच्य-परिवर्तन — कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य: "पानवाला नया पान खा रहा था" → पानवाले द्वारा नया पान खाया जा रहा था। भाववाच्य: "माँ बैठ नहीं सकती" → माँ से बैठा नहीं जाता।
  • केन्द्रीय भाव / संदेश

    देशभक्ति केवल सीमा पर लड़ने वाले सैनिकों तक सीमित नहीं है। एक गरीब, अपंग फेरीवाला भी अपने छोटे-से प्रयास से देश-प्रेम प्रकट कर सकता है। कहानी यह आशा जगाती है कि नई पीढ़ी (बच्चे) देशभक्ति की इस भावना को आगे बढ़ाएगी — सरकंडे का चश्मा इसी उम्मीद का प्रतीक है।

    बोर्ड परीक्षा हेतु

  • सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को कैप्टन क्यों कहते थे? — उसकी नेताजी के प्रति सच्ची श्रद्धा और देशभक्ति के कारण; यह सम्मान व व्यंग्य दोनों का मिला-जुला संबोधन था।
  • हालदार साहब पहले मायूस क्यों हुए? — कैप्टन की मृत्यु के बाद उन्हें लगा कि अब मूर्ति पर कोई चश्मा नहीं लगाएगा।
  • सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है? — बच्चों में देशभक्ति की भावना जीवित है; नई पीढ़ी देश-प्रेम को आगे ले जाएगी।
  • "वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में…" पर प्रतिक्रिया — किसी की शारीरिक अक्षमता का मज़ाक उड़ाना अनुचित है; देशभक्ति शरीर से नहीं, भावना से होती है।
  • आशय स्पष्ट कीजिए ("क्या होगा उस कौम का…") — जो समाज देश के लिए बलिदान करने वालों का उपहास करता है और स्वार्थ में बिकने को तैयार रहता है, उसका भविष्य अंधकारमय है।
  • सामान्य भूलें

  • "मास्टर बनाना भूल गया" का अर्थ है — मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल संगमरमर का चश्मा बनाना भूल गए; "मास्टर" किसी व्यक्ति का नाम नहीं।
  • कैप्टन सचमुच सेना का कैप्टन नहीं था, न ही आज़ाद हिंद फ़ौज का सिपाही।
  • अंत में मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा था, असली चश्मा नहीं।
  • मूर्ति संगमरमर की थी और लगभग दो फुट ऊँची (बस्ट) थी — पूरी मूर्ति नहीं।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓देशभक्ति केवल सैनिकों तक सीमित नहीं — साधारण नागरिक (कैप्टन चश्मेवाला) भी अपने ढंग से देश-प्रेम प्रकट करते हैं।
    • ✓मूर्ति पर बदलते चश्मों का रहस्य: कैप्टन ग्राहक की माँग पर फ्रेम बदल देता था, क्योंकि 'मास्टर बनाना भूल गया'।
    • ✓पानवाले का व्यंग्य और बाद की संवेदना — मनुष्य के दोहरे पक्ष की पहचान।
    • ✓सरकंडे का चश्मा नई पीढ़ी में देशभक्ति की निरंतरता का प्रतीक है।
    • ✓स्थानीय बोली, अंग्रेज़ी शब्दों का प्रयोग, निपात और वाच्य-परिवर्तन जैसे भाषा-बिन्दु।

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →कहानी शुरू करने से पहले पूछें — 'देशभक्ति दिखाने के लिए क्या सैनिक होना ज़रूरी है?' — उत्तर बोर्ड पर लिखें।
    • →कहानी को चार दृश्यों (मूर्ति-स्थापना, बदलते चश्मे, कैप्टन की मृत्यु, सरकंडे का चश्मा) में बाँटकर क्रम-चार्ट बनवाएँ।
    • →पानवाले के संवादों को बोली से मानक हिंदी में बदलने का अभ्यास कराएँ।
    • →कक्षा में चर्चा करें कि अपने इलाके के चौराहे पर वे किसकी मूर्ति लगवाना चाहेंगे और क्यों।
    • →'सेनानी न होते हुए भी कैप्टन' शीर्षक से 80–100 शब्दों का अनुच्छेद लिखवाएँ।
    • →शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण लोगों के सम्मान पर संवेदनशील चर्चा कराएँ — पानवाले की टिप्पणी को आधार बनाकर।
    • →निपात (तो, ही, भी) पहचानने के लिए पाठ के वाक्यों पर रंगीन रेखांकन गतिविधि कराएँ।

    📋 Assessment Questions

    1. कैप्टन चश्मेवाला मूर्ति पर बार-बार चश्मा क्यों बदलता था?
    2. हालदार साहब ने चौराहे पर गाड़ी न रोकने का निर्णय क्यों लिया और फिर अचानक क्यों रुकवाई?
    3. सरकंडे का चश्मा किस बात का प्रतीक है?
    4. पानवाले के चरित्र की दो विशेषताएँ पाठ से उदाहरण सहित बताइए।
    5. 'कोई गिराक आ गया समझो…' वाक्य को मानक हिंदी में लिखिए।

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