पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी – सुमिरिनी के मनके – Class 12 Hindi Chapter 11 Notes & NCERT PDF
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पाठ 11: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी – सुमिरिनी के मनके
परिचय
'सुमिरिनी के मनके' पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी के तीन लघु निबंधों का संकलन है: (क) बालक बच गया, (ख) घड़ी के पुर्ज़े, (ग) ढेले चुन लो। 'सुमिरिनी' जप की छोटी माला को कहते हैं और 'मनके' उसके दाने हैं। जैसे माला का हर मनका अलग होकर भी एक धागे में पिरोया होता है, वैसे ही ये तीनों निबंध अलग विषयों पर हैं, पर तीनों समाज की मूल समस्याओं (शिक्षा, धर्म और अंधविश्वास) पर विचार करते हैं। तीनों में व्यंग्य है और तीनों पाठक को स्वयं सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
लेखक परिचय
पाठ का सार
(क) बालक बच गया: शिक्षा ग्रहण की सही उम्र
एक पाठशाला के वार्षिकोत्सव में प्रधान अध्यापक का आठ वर्ष का इकलौता पुत्र "नुमाइश में मिस्टर हादी के कोल्हू की तरह" दिखाया जा रहा था। उसका मुँह पीला था, आँखें सफ़ेद थीं और दृष्टि भूमि से उठती नहीं थी। उससे उम्र से बहुत ऊपर के प्रश्न पूछे गए: धर्म के दस लक्षण, नौ रसों के उदाहरण, चार डिग्री से नीचे पानी के फैलने से मछलियों की प्राणरक्षा, चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक समाधान, अभाव को पदार्थ मानने का शास्त्रार्थ, इंग्लैंड के राजा आठवें हेनरी की स्त्रियों के नाम और पेशवाओं का कुर्सीनामा। "तू क्या करेगा?" पूछने पर उसने रटा हुआ उत्तर दिया: "मैं यावज्जन्म लोकसेवा करूँगा।"
एक वृद्ध महाशय ने कहा कि जो इनाम माँगे, वही मिलेगा। बालक के चेहरे पर "कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई" दिखी और अंत में उसने धीरे से कहा, "लड्डू"। पिता और अध्यापक निराश हो गए, पर लेखक ने सुख की साँस ली, क्योंकि बालक की स्वाभाविक प्रवृत्ति अभी जीवित थी: "वह 'लड्डू' की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।"
मूल भाव: शिक्षा व्यक्ति के मानस के विकास के लिए है, मनुष्य शिक्षा के लिए नहीं। शिक्षा बच्चे पर लादनी नहीं चाहिए, बल्कि उसके मन में रुचि के बीज डालने चाहिए: "सहज पके सो मीठा होय।"
(ख) घड़ी के पुर्ज़े: धर्म के रहस्य पर एकाधिकार
धर्मोपदेशक कहते हैं कि धर्म के रहस्य हर कोई न जाने; जो कहा जाए, उसे "कान ढलकाकर" सुन लो। इसके लिए घड़ी का दृष्टांत दिया जाता है: समय पूछ लो या घड़ी देखना सीख लो, पर घड़ी का पीछा खोलकर पुर्ज़े देखना तुम्हारा काम नहीं; यह "वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है।"
लेखक इसी दृष्टांत को आगे बढ़ाकर उसे उलट देते हैं:
मूल भाव: धर्म पर मुट्ठीभर लोगों का एकाधिकार उसे संकुचित करता है। जिज्ञासा और विवेक पर रोक लगाना उचित नहीं।
(ग) ढेले चुन लो: अंधविश्वास पर चोट
लेखक शेक्सपियर के नाटक 'मर्चेंट ऑफ़ वेनिस' और उसके भारतेंदु-कृत रूपांतर 'दुर्लभ बंधु' से आरंभ करते हैं। पुरश्री (पोर्शिया) के सामने तीन पेटियाँ हैं (सोने, चाँदी और लोहे की) और एक में उसकी प्रतिमूर्ति है। अकड़बाज़ सोना चुनकर लौटता है, लोभी को चाँदी की पिटारी अँगूठा दिखाती है और सच्चा प्रेमी लोहे को छूकर "पहिला इनाम" पाता है।
ऐसी ही "लाटरी" वैदिक काल में चलती थी। स्नातक कन्या के पिता के यहाँ जाकर गौ भेंट करता और कन्या के सामने कुछ मिट्टी के ढेले रख देता। कहीं सात होते, कहीं कम, कहीं ज़्यादा। कन्या को एक उठाना होता:
इस प्रथा का उल्लेख आश्वलायन, गोभिल, भारद्वाज आदि गृह्यसूत्रों में है। लेखक व्यंग्य करते हैं: जीवनसाथी का चुनाव मिट्टी के ढेलों पर छोड़ना बुद्धिमानी नहीं, पर लाखों कोस दूर के "मिट्टी और आग के ढेलों" (मंगल, शनैश्चर, बृहस्पति) की "कल्पित चाल के कल्पित हिसाब" पर भरोसा करना कैसे अच्छा है? वात्स्यायन के अनुसार "आज का कबूतर अच्छा है कल के मोर से", और कबीर का दोहा:
पत्थर पूजे हरि मिलें तो तू पूज पहार।
इससे तो चक्की भली, पीस खाय संसार।।
मूल भाव: ज्योतिष और लोक-विश्वासों में छिपे अंधविश्वास पर व्यंग्य, और विवेक तथा प्रत्यक्ष अनुभव का समर्थन।
विषय-विश्लेषण
भाषा-शैली
बोर्ड परीक्षा फोकस
कठिन शब्द
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓'सुमिरिनी के मनके' में तीन लघु निबंध हैं: बालक बच गया (शिक्षा), घड़ी के पुर्ज़े (धर्म) और ढेले चुन लो (अंधविश्वास)।
- ✓'बालक बच गया' बताता है कि शिक्षा बच्चे पर लादी न जाए; 'लड्डू' की माँग बालक की स्वाभाविकता के बचे रहने का प्रमाण है।
- ✓'घड़ी के पुर्ज़े' में लेखक धर्माचार्यों के ही दृष्टांत को उलटकर धर्म पर एकाधिकार और जिज्ञासा पर प्रतिबंध का विरोध करते हैं।
- ✓'ढेले चुन लो' वैदिक काल की ढेलों वाली 'लाटरी' के सहारे ज्योतिष और लोक-अंधविश्वासों पर व्यंग्य करता है।
- ✓गुलेरी जी की शैली दृष्टांत, व्यंग्य और उद्धरणों (शेक्सपियर, भारतेंदु, गृह्यसूत्र, वात्स्यायन, कबीर) से समृद्ध है।
👨🏫 Teaching Tips
- →कक्षा में एक असली सुमिरिनी या माला दिखाकर शीर्षक की सार्थकता समझाएँ: अलग मनके, एक धागा।
- →'बालक बच गया' पढ़ाते समय बालक से पूछे गए प्रश्नों की सूची बोर्ड पर लिखकर विद्यार्थियों से पूछें कि आठ वर्ष के बच्चे के लिए इनमें से कौन-से उचित हैं।
- →रटने बनाम समझने पर कक्षा-संवाद कराएँ (योग्यता-विस्तार का प्रश्न); 'लर्निंग आउटकम' की अवधारणा जोड़ें।
- →एक पुरानी घड़ी खोलकर या उसका चित्र दिखाकर 'घड़ी के पुर्ज़े' का दृष्टांत और उसका उलटा जाना चरणबद्ध समझाएँ।
- →'मर्चेंट ऑफ़ वेनिस' की पेटियों वाली कथा संक्षेप में सुनाएँ और तुलना कराएँ कि पेटियों और ढेलों में क्या समानता है।
- →कबीर की साखी और 'आज का कबूतर...' वाली उक्ति पर व्याख्या-लेखन का अभ्यास कराएँ।
- →विद्यार्थियों से अपने आस-पास के किसी अंधविश्वास पर छोटा लेख लिखवाएँ और तर्क से उसकी जाँच करवाएँ।
📋 Assessment Questions
- क्या विद्यार्थी तीनों निबंधों के नाम और उनके मूल प्रतिपाद्य अलग-अलग बता सकता है?
- क्या वह 'हरे पत्तों का मधुर मर्मर' और 'मरे काठ की खड़खड़ाहट' के प्रतीकार्थ की व्याख्या कर सकता है?
- क्या वह घड़ी के दृष्टांत के दोनों पक्ष (धर्माचार्यों का तर्क और लेखक का प्रत्युत्तर) स्पष्ट कर सकता है?
- क्या वह ढेलों के प्रकार और उनसे जुड़ी मान्यताएँ क्रम से लिख सकता है और लेखक के व्यंग्य को पहचान सकता है?
- क्या वह पाठ के विचारों को आज की शिक्षा और समाज से जोड़कर अपनी राय तर्कसहित दे सकता है?
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All chapters in अंतरा भाग 2 (Antra) - Hindi Class 12
- 1. जयशंकर प्रसाद – देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
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- 11. पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी – सुमिरिनी के मनके
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- 13. भीष्म साहनी – गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
- 14. असगर वजाहत – शेर, पहचान, चार हाथ, साझा
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- 16. ममता कालिया – दूसरा देवदास
- 17. हजारी प्रसाद द्विवेदी – कुटज