नित्यं पिबामः सुभाषितरसम् – Class 7 Sanskrit Chapter 2 Notes & NCERT PDF
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पाठ 2: नित्यं पिबामः सुभाषितरसम् (हम प्रतिदिन सुभाषितों का रस पिएँ)
पाठ-परिचय
द्वितीयः पाठः – नित्यं पिबामः सुभाषितरसम् (हम प्रतिदिन सुभाषितों का रस पिएँ)
पाठ का आरम्भ विद्यालय की दीवार पर लिखी पंक्ति से होता है – ‘अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः’ (कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं है, पर उसे सही काम में लगाने वाला मार्गदर्शक दुर्लभ है)। शिक्षक बताते हैं कि श्रेष्ठ लोगों द्वारा कहे गए सुवचन ही सुभाषित हैं, जो हमारे नैतिक और सामाजिक विकास के लिए हैं और बताते हैं कि क्या करना चाहिए, क्या नहीं। इसके बाद नौ सुभाषित पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ के साथ दिए गए हैं।
पाठ-सार – नौ सुभाषित
१. पाँच ‘व’कार
वस्त्रेण वपुषा वाचा विद्यया विनयेन च ।
वकारैः पञ्चभिर्युक्तो नरो भवति पूजितः ॥
अर्थ: उचित वस्त्र, स्वस्थ वपु (शरीर), मधुर वाणी, विद्या और विनय – इन पाँच ‘व’कारों से युक्त मनुष्य समाज में सम्मान पाता है।
२. छह दोष
षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता ।
निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता ॥
अर्थ: जो ऐश्वर्य (भूति) चाहता है, उसे छह दोष छोड़ने चाहिए – अधिक नींद, तन्द्रा (सुस्ती), भय, क्रोध, आलस्य और दीर्घसूत्रता (काम टालने की आदत)।
३. शुद्धि के साधन
अद्भिर्गात्राणि शुध्यन्ति मनः सत्येन शुध्यति ।
विद्यातपोभ्यां भूतात्मा बुद्धिर्ज्ञानेन शुध्यति ॥
अर्थ: जल से शरीर, सत्य से मन, विद्या और तप (परिश्रम) से आत्मा, और ज्ञान से बुद्धि शुद्ध होती है।
४. भारतवर्ष की सीमा
उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् ।
वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः ॥
अर्थ: जो भूभाग समुद्र के उत्तर और हिमालय के दक्षिण में है, उसका नाम भारतवर्ष है; वहाँ की सन्तान भारतीय कहलाती है।
५. बूँद-बूँद से घड़ा
जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः ।
स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च ॥
अर्थ: जैसे जल की बूँदें गिरते-गिरते घड़ा भर जाता है, वैसे ही निरन्तर अभ्यास ही सब विद्याओं, धर्म और धन की प्राप्ति का कारण है।
६. बुद्धि का विकास
यः पठति लिखति पश्यति परिपृच्छति पण्डितानुपाश्रयति ।
तस्य दिवाकरकिरणैः नलिनीदलमिव विस्तारिता बुद्धिः ॥
अर्थ: जो पढ़ता है, लिखता है, देखता है, विनम्रता से पूछता है और विद्वानों के पास रहता है, उसकी बुद्धि वैसे ही खिलती है जैसे सूर्य की किरणों से कमल की पंखुड़ी।
७. मधुर वाणी
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः ।
तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता ॥
अर्थ: प्रिय वचन से सभी प्राणी प्रसन्न होते हैं, इसलिए प्रिय ही बोलना चाहिए – मीठा बोलने में कैसी कंजूसी?
८. आलस्य शत्रु, उद्यम मित्र
आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः ।
नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ॥
अर्थ: आलस्य मनुष्य के शरीर में रहने वाला सबसे बड़ा शत्रु है; उद्यम (परिश्रम) के समान कोई मित्र नहीं, जिसे करके मनुष्य दुःखी नहीं होता।
९. व्यास के दो वचन
अष्टादशपुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम् ।
परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ॥
अर्थ: अठारह पुराणों में व्यास के दो ही वचन (सार) हैं – परोपकार से पुण्य और दूसरों को पीड़ा देने से पाप होता है।
शब्दार्थ
व्याकरण-बिन्दु
तृतीया विभक्ति (साधन – ‘से/के द्वारा’)
सुभाषितों में तृतीया के अनेक रूप हैं – वस्त्रेण, वपुषा, वाचा, विद्यया, विनयेन, सत्येन, ज्ञानेन, पुरुषेण, निपातेन।
‘शुध्’ धातु – लट्-लकार (परियोजना)
पर्यायवाची (अमरकोश से)
अभ्यास-संकेत
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓सुभाषित का अर्थ और उसका लाभ – नैतिक व सामाजिक विकास, कर्तव्य-अकर्तव्य का बोध
- ✓नौ सुभाषितों का शुद्ध पाठ और सरल हिन्दी अर्थ (पाँच वकार, छह दोष, शुद्धि के साधन, भारतवर्ष, बूँद-बूँद से घड़ा आदि)
- ✓पदच्छेद और अन्वय की सहायता से श्लोक का अर्थ निकालना
- ✓तृतीया विभक्ति के रूप (छात्रेण, विद्यया, सत्येन, केन) पहचानना और प्रयोग करना
- ✓अमरकोश से पर्यायवाची शब्द तथा ‘शुध्’ धातु के लट्-लकार रूप जानना
👨🏫 Teaching Tips
- →प्रत्येक सुभाषित को पहले लय में गवाएँ, फिर पदच्छेद और अन्वय बोर्ड पर लिखकर अर्थ निकलवाएँ
- →‘पाँच वकार’ और ‘छह दोष’ के लिए विद्यार्थियों से उँगलियों पर गिनती वाला स्मरण-खेल कराएँ
- →‘जलबिन्दुनिपातेन’ के लिए कक्षा में बूँद-बूँद से गिलास भरने का छोटा प्रदर्शन करें
- →कक्षा में सुभाषित-कण्ठपाठ प्रतियोगिता आयोजित करें (पुस्तक का कार्यकलाप)
- →सुभाषितों से तृतीया विभक्ति वाले पद ढूँढ़ने की प्रतियोगिता कराएँ और उनसे नए वाक्य बनवाएँ
- →प्रत्येक विद्यार्थी को एक सुभाषित चुनकर उसका जीवन से जुड़ा उदाहरण सुनाने को कहें
- →विद्यालय की दीवार के लिए सुभाषित-पट्टिकाएँ बनवाएँ
📋 Assessment Questions
- पाँच वकार कौन-से हैं जिनसे मनुष्य पूजित होता है?
- ऐश्वर्य चाहने वाले को कौन-से छह दोष छोड़ने चाहिए?
- मन, बुद्धि और शरीर किन-किन से शुद्ध होते हैं?
- ‘विद्या’ और ‘छात्र’ शब्दों के तृतीया विभक्ति के तीनों वचनों के रूप लिखिए।
- ‘आलस्यं हि मनुष्याणां…’ सुभाषित का भाव अपने शब्दों में लिखिए।
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- 1. वन्दे भारतमातरम्
- 2. नित्यं पिबामः सुभाषितरसम्
- 3. मित्राय नमः
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- 5. सेवा हि परमो धर्मः
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- 10. दशमः कः ?
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- 12. वीराङ्गना पन्नाधाया
- 13. अतिरिक्तम् अध्ययनम्: वर्णमात्रा-परिचयः
- 14. परिशिष्टम् १: शब्दरूपाणि
- 15. परिशिष्टम् २: धातुरूपाणि