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हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः – Class 7 Sanskrit Chapter 8 Notes & NCERT PDF

Class 7SanskritChapter 8NCERT book: दीपकम् (Deepakam) - Sanskrit Class 7

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पाठ 8: हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः (हितकारी और मनोहर वचन दुर्लभ है)

पाठ-परिचय

अष्टमः पाठः – हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः (हितकारी और मनोहर – दोनों गुणों वाली बात दुर्लभ होती है)

एक छात्र बताता है कि आज माता ने उसे एक सूक्ति पढ़ाई – "सत्यं वद, धर्मं चर" (सच बोलो, धर्म का आचरण करो)। आचार्य समझाते हैं:

सूक्तिः इत्युक्ते 'सुन्दरं वचनम्' । सूक्तिषु जीवनमूल्यानि निहितानि भवन्ति ।

सूक्तियाँ जीवन में मार्गदर्शन करती हैं; संस्कृत साहित्य सूक्तियों का भाण्डागार (भण्डार) है। छात्र संकल्प लेते हैं – न केवलं पठामः अपितु स्मरामः, जीवने आचरामः च।

पाठ में दस सूक्तियाँ हैं – हर एक का पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ दिया गया है।

पाठ-सार (दस सूक्तियाँ)

१. माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः ।

अन्वय: भूमिः माता (अस्ति), अहं पृथिव्याः पुत्रः (अस्मि)।

पृथ्वी हमें माँ की तरह पालती है; हम सब उसकी सन्तान हैं; वह सदा पूज्य है।

२. न रत्नमन्विष्यति, मृग्यते हि तत् ।

पदच्छेद: न रत्नम् अन्विष्यति मृग्यते हि तत्।

रत्न ग्राहक को नहीं ढूँढता, ग्राहक ही रत्न को ढूँढते हैं। वैसे ही यदि हममें गुण हैं तो गुणी लोग स्वयं हमें खोजते आएँगे।

३. शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् ।

शरीर ही धर्म (कर्तव्य) के पालन का पहला साधन है; इसलिए शरीर की रक्षा सब प्रकार से करनी चाहिए।

४. क्षणशः कणशश्चैव विद्यामर्थं च साधयेत् ।

अन्वय: क्षणशः (एव) विद्यां, कणशः एव अर्थं च साधयेत्।

विद्या क्षण-क्षण (एक भी पल व्यर्थ किए बिना) और धन कण-कण (थोड़ा-थोड़ा बचाकर) अर्जित करना चाहिए। – क्षणत्यागे कुतो विद्या, कणत्यागे कुतो धनम्।

५. सुखार्थिनः कुतो विद्या, कुतो विद्यार्थिनः सुखम् ।

सुख चाहने वाले (आलसी) को विद्या कहाँ, और विद्या चाहने वाले को सुख (आराम) कहाँ? ज्ञान चाहने वाला आलस्य और आराम छोड़कर निरन्तर पढ़े।

६. गुणाः पूजास्थानं गुणिषु न च लिङ्गं न च वयः ।

गुणवान् लोगों में गुण ही पूजा (आदर) के स्थान हैं – न लिङ्ग (पुरुष/स्त्री) और न आयु (बालक/वृद्ध)।

७. मा ब्रूहि दीनं वचः ।

दीनता भरे वचन मत बोलो। समाज में कुछ लोग सहायता करते हैं, कुछ केवल डींग मारते हैं; अतः स्वाभिमानी व्यक्ति हर किसी के आगे सहायता की याचना न करे।

८. यस्तु क्रियावान् पुरुषः स विद्वान् ।

जो क्रियावान् (ज्ञान को आचरण में लाने वाला) है, वही सच्चा विद्वान् है; केवल पढ़ने से नहीं। – ज्ञानं भारः क्रियां विना।

९. शीलं परं भूषणम् ।

शील (आचरण/चरित्र) ही सबसे श्रेष्ठ आभूषण है; सदाचार के बिना अन्य गुण निरर्थक हैं।

१०. हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः ।

कुछ लोग हित की बात कठोरता से कहते हैं, कुछ मनोरंजक बात कहते हैं पर वह हितकारी नहीं होती। जो वचन हितकारी भी हो और मनोहर भी – वह दुर्लभ है।

सूक्तियों के स्रोत-ग्रन्थ (योग्यताविस्तर)

पाठ बताता है कि ये सूक्तियाँ विविध ग्रन्थों से ली गई हैं:

  • अथर्ववेदः – चार वेदों में एक; स्तुतियाँ, चिकित्साशास्त्र, विज्ञान, दर्शन आदि।
  • कुमारसम्भवम् – महाकवि कालिदास; शिव-पार्वती विवाह और कार्तिकेय-जन्म की कथा।
  • पञ्चतन्त्रम् – विष्णुशर्मा; पाँच प्रकरण, पशु-पक्षियों की कथाओं से नीति-शिक्षा।
  • उत्तररामचरितम् – महाकवि भवभूति; श्रीराम के राज्याभिषेक के बाद का जीवन।
  • नीतिशतकम् – उज्जयिनी के राजा भर्तृहरि (तीन शतक-काव्यों के रचयिता)।
  • किरातार्जुनीयम् – महाकवि भारवि; किरात-वेशधारी शिव और अर्जुन की कथा।
  • शब्दार्थ

  • चर – आचरण करो
  • इत्युक्ते – अर्थात्
  • कुतूहलम् – उत्सुकता
  • भाण्डागारः – भण्डार, खज़ाना
  • अन्विष्यति – ढूँढता है; मृग्यते – ढूँढा जाता है
  • आद्यम् – पहला (प्रथमम्)
  • धर्मसाधनम् – धर्म-सिद्धि का साधन
  • क्षणशः – प्रत्येक पल में; कणशः – प्रत्येक कण में
  • साधयेत् – अर्जित करना चाहिए
  • सुखार्थिनः – सुख चाहने वाले का
  • वयः – आयु, अवस्था
  • मा ब्रूहि – मत बोलो; दीनम् – दयनीय
  • विकत्थनम् – डींग, झूठी आत्म-प्रशंसा
  • क्रियावान् – सक्रिय, आचरण करने वाला
  • शीलम् – चरित्र, आचरण
  • व्याकरण-बिन्दु

    (क) मकार-लेखन (म् और अनुस्वार)

  • 'म्' के बाद व्यञ्जन हो तो 'म्' के स्थान पर अनुस्वार लिखें: पुस्तकम् पठति = पुस्तकं पठति।
  • 'म्' के बाद स्वर हो तो म् ही लिखें: पुस्तकम् अपठत्।
  • अभ्यास: न रत्नं अन्विष्यति → न रत्नम् अन्विष्यति; वयं अद्यतनं पाठं पठामः → वयम् अद्यतनं पाठं पठामः; त्वं अस्माकं गृहं आगच्छ → त्वम् अस्माकं गृहम् आगच्छ।
  • (ख) सूक्ति शब्द का निर्माण

  • सु + उक्तिः = सूक्तिः (शोभना उक्तिः – सुन्दर कथन); उ + उ = ऊ (दीर्घ सन्धि)।
  • (ग) पाठ के आधार पर समानार्थक शब्द

  • सुतः = पुत्रः; प्रथमम् = आद्यम्; धनम् = अर्थम्; अवस्था = वयः; वचनम् = वचः; आचरणम् = शीलम्
  • अभ्यास-संकेत

  • आम्/न: किं रत्नम् अन्विष्यति? – न; किं शीलं श्रेष्ठम् आभूषणम्? – आम्; यः सदा सुखम् इच्छति, किं सः विद्यां प्राप्नोति? – न।
  • एकपद उत्तर: आद्यं धर्मसाधनम् – शरीरम्; कीदृशं वचः मा ब्रूहि – दीनम्; सर्वेषां माता – भूमिः; रत्नानाम् अन्वेषणं के कुर्वन्ति – ग्राहकाः।
  • मिलान: क्षणशः कणशः साधयेत् – विद्याम् अर्थं च; सर्वश्रेष्ठम् आभूषणम् – शीलम्; रत्नं न अन्विष्यति, तत् – मृग्यते; आद्यं धर्मसाधनम् – शरीरम्; हितं मनोहारि च वचः – दुर्लभम्; पूजास्थानम् – गुणाः।
  • सामान्य भूलें

  • 'मा ब्रूहि' को 'माँ से कहो' समझना – यहाँ 'मा' निषेध-सूचक अव्यय है = मत।
  • 'क्षणशः' को धन से और 'कणशः' को विद्या से जोड़ना – क्षण-क्षण विद्या, कण-कण धन।
  • स्वर से पहले भी अनुस्वार लिखना – गृहं आगच्छ ग़लत, गृहम् आगच्छ सही।
  • 'विद्वान्' का अर्थ केवल बहुत पढ़ा-लिखा मानना – पाठ के अनुसार विद्वान् वह है जो ज्ञान को क्रिया में लाए।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓सूक्ति = सु + उक्ति (सुन्दर कथन); सूक्तियों में जीवन-मूल्य निहित होते हैं – उन्हें पढ़ें, याद करें, आचरण में लाएँ
    • ✓दस सूक्तियों के भाव – भूमि माता है, शरीर पहला धर्मसाधन है, क्षण-क्षण विद्या और कण-कण धन, शील परम भूषण है
    • ✓सच्चा विद्वान् वही जो क्रियावान् हो; गुणियों में गुण ही पूज्य हैं, लिङ्ग या आयु नहीं
    • ✓मकार-लेखन का नियम – व्यञ्जन से पहले अनुस्वार, स्वर से पहले म्
    • ✓सूक्तियों के स्रोत-ग्रन्थ और उनके रचयिता – कालिदास, भवभूति, भर्तृहरि, भारवि, विष्णुशर्मा

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →पाठ की शुरुआत बच्चों से अपनी माँ/दादी से सुनी कहावतें पूछकर करें और 'सत्यं वद, धर्मं चर' से जोड़ें
    • →हर दिन एक सूक्ति 'आज का विचार' के रूप में बोर्ड पर लिखें और उसका भाव छात्रों से बुलवाएँ
    • →सूक्ति २ (रत्न) को नाटकीय ढंग से समझाएँ – एक छात्र 'रत्न' बनकर बैठे, बाकी उसे खोजें
    • →मकार-लेखन के लिए वाक्य-पट्टियाँ दें जिनमें अनुस्वार/म् की गलतियाँ ढूँढकर सुधारनी हों
    • →सूक्तियों को कंठस्थ कराकर कक्षा में 'सूक्ति-पाठ प्रतियोगिता' आयोजित करें
    • →परियोजना: दस प्रेरक सूक्तियों का भित्तिपत्र बनवाएँ और मातृभाषा की कहावतों से तुलना कराएँ
    • →सूक्ति ८ पर चर्चा – 'ज्ञान को व्यवहार में लाने' के अपने जीवन से उदाहरण दिलवाएँ

    📋 Assessment Questions

    1. 'न रत्नमन्विष्यति, मृग्यते हि तत्' का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए।
    2. पाठ के अनुसार सच्चा विद्वान् कौन है?
    3. 'अहं एकं प्रश्नं प्रष्टुं इच्छामि' को मकार-नियम से शुद्ध कीजिए।
    4. विद्या और धन कैसे अर्जित करने चाहिए?
    5. किरातार्जुनीयम् और उत्तररामचरितम् के रचयिता कौन हैं?

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