परिशिष्टम् ५: धातुरूपाणि – Class 9 Sanskrit Chapter 16 Notes & NCERT PDF
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परिशिष्टम् ५: धातुरूपाणि (क्रिया-रूप: परस्मैपद, आत्मनेपद, णिच्)
परिचय
इस परिशिष्ट में धातुओं के रूप पाँच लकारों में दिए गए हैं — लट् (वर्तमान), लृट् (भविष्यत्), लङ् (भूत), लोट् (आज्ञा), विधिलिङ् (चाहिए/विधि)। रूप पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और वचन (एक, द्वि, बहु) के क्रम में हैं। पुस्तक में ये भाग हैं —
लकारों के अर्थ और उदाहरण
पुरुष-नियम — कर्ता सः/सा/बालकः आदि हो तो प्रथमपुरुष; त्वं/युवां/यूयं हो तो मध्यमपुरुष; अहम्/आवां/वयं हो तो उत्तमपुरुष। क्रिया का वचन कर्ता के वचन के अनुसार होता है।
१. 'पठ्' धातु (परस्मैपद) — क्रम: प्रथम / मध्यम / उत्तम पुरुष
२. णिच्-प्रत्यय (प्रेरणार्थ)
'पठ्' + णिच् = पाठि → लट्: पाठयति, पाठयतः, पाठयन्ति / पाठयसि, पाठयथः, पाठयथ / पाठयामि, पाठयावः, पाठयामः (पढ़वाता है/पढ़ाता है)।
इसी प्रकार — लेखयति, खादयति, हासयति, चालयति, स्मारयति (स्मृ), पाययति (पा), क्रीडयति, नाययति (नी), दर्शयति, गमयति, भोजयति, दापयति, श्रावयति, ज्ञापयति।
३. 'वृध्' धातु (आत्मनेपद)
वाक्य-प्रयोग: वृक्षः वर्धते । वृक्षौ वर्धेते । वृक्षाः वर्धन्ते । त्वं वर्धसे । अहं वर्धे । वयं वर्धामहे ।
इसी प्रकार — भाषते, वर्तते, कम्पते, स्पर्धते, लभते, सेवते, यतते, रोचते, मोदते, वन्दते, रमते, शोभते, सहते, ईक्षते, शिक्षते।
४. 'लभ्' धातु (आत्मनेपद)
५. विशिष्ट धातु
'शीङ्' (सोना)
'भुज्' (खाना)
पढ़ने के संकेत
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓पाँच लकार — लट्, लृट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ् — और उनके अर्थ
- ✓परस्मैपदी पठ् धातु के पाँचों लकारों के रूप
- ✓आत्मनेपदी वृध् और लभ् धातु के रूप तथा परस्मैपद से अन्तर
- ✓णिच् (प्रेरणार्थक) प्रत्यय — पाठयति आदि
- ✓विशिष्ट धातु शीङ् और भुज् के रूप
👨🏫 Teaching Tips
- →एक ही वाक्य को पाँच लकारों में बोलने का अभ्यास करवाएँ (सः पठति → पठिष्यति → अपठत् → पठतु → पठेत्)
- →परस्मैपद और आत्मनेपद के अन्त (ति/ते) को दो रंगों में बोर्ड पर दिखाएँ
- →णिच् रूपों को 'करना → करवाना' के हिन्दी उदाहरणों से जोड़ें
- →धातुरूप-पत्तों से 'लकार-पुरुष-वचन पहचानो' खेल करवाएँ
- →वृध् धातु के वाक्य-प्रयोग (वृक्षः वर्धते…) पुरुष बदलकर बनवाएँ
- →सामान्य भूलों की सूची से त्रुटि-सुधार अभ्यास करवाएँ
📋 Assessment Questions
- किसी धातु का दिया गया लकार-पुरुष-वचन रूप लिख सकता है?
- दिए गए रूप का लकार, पुरुष और वचन पहचान सकता है?
- परस्मैपद और आत्मनेपद रूपों में अन्तर बता सकता है?
- णिच् (प्रेरणार्थक) रूप बना सकता है?
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- 1. सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
- 2. सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः
- 3. आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
- 4. न खलु वयस्तेजसो हेतुः
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- 6. मनःपूतं समाचरेत्
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- 8. अन्नाद् आनन्दं प्रति
- 9. कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
- 10. णमो अरिहन्ताणम्
- 11. वर्णोच्चारण-शिक्षा २
- 12. परिशिष्टम् १: अन्वयः
- 13. परिशिष्टम् २: समासः
- 14. परिशिष्टम् ३: वाच्यम्
- 15. परिशिष्टम् ४: शब्दरूपाणि
- 16. परिशिष्टम् ५: धातुरूपाणि