रामचंद्र शुक्ल – प्रेमघन की छाया-स्मृति – Class 12 Hindi Chapter 10 Notes & NCERT PDF
Notes and a simple summary of Chapter 10 of the NCERT Class 12 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.
🎧 Listen to the content
पाठ 10: रामचंद्र शुक्ल – प्रेमघन की छाया-स्मृति
परिचय
'प्रेमघन की छाया-स्मृति' अंतरा भाग 2 के गद्य खंड का पहला पाठ है। यह आचार्य रामचंद्र शुक्ल का संस्मरणात्मक निबंध है। इसमें शुक्ल जी ने अपने बचपन और किशोरावस्था की उन घटनाओं को याद किया है जिनसे उनके मन में हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति प्रेम जागा। इस प्रेम के केंद्र में हैं भारतेंदु हरिश्चंद्र के मित्र और प्रसिद्ध कवि उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन'। पाठ बताता है कि किसी रचनाकार का व्यक्तित्व कैसे बनता है: घर का साहित्यिक वातावरण, बड़े लेखकों का सान्निध्य और समवयस्क मित्रों की मंडली मिलकर एक बालक को लेखक बना देते हैं।
लेखक परिचय
पाठ का सार
1. घर का साहित्यिक वातावरण
लेखक के पिताजी फ़ारसी के अच्छे ज्ञाता और पुरानी हिंदी कविता के बड़े प्रेमी थे। उन्हें फ़ारसी कवियों की उक्तियों को हिंदी कवियों की उक्तियों से मिलाने में आनंद आता था। वे रात को घर के सब लोगों को एकत्र करके रामचरितमानस और रामचंद्रिका चित्ताकर्षक ढंग से पढ़ते थे। भारतेंदु जी के नाटक उन्हें बहुत प्रिय थे। जब उनकी बदली हमीरपुर ज़िले की राठ तहसील से मिर्ज़ापुर हुई, तब लेखक की अवस्था आठ वर्ष की थी।
2. भारतेंदु के प्रति बाल-मन की भावना
बालक के मन में भारतेंदु के प्रति "एक अपूर्व मधुर भावना" जगी रहती थी। 'सत्य हरिश्चंद्र' नाटक के नायक राजा हरिश्चंद्र और कवि हरिश्चंद्र में उसकी बाल-बुद्धि कोई भेद नहीं कर पाती थी; 'हरिश्चंद्र' शब्द से दोनों की मिली-जुली भावना मन में माधुर्य भर देती थी।
3. प्रेमघन की पहली झाँकी
मिर्ज़ापुर में पता चला कि भारतेंदु के एक मित्र, प्रसिद्ध कवि उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी, वहीं रहते हैं। बालकों की मंडली जोड़ी गई और डेढ़ मील का सफ़र तय करके वे पत्थर के एक बड़े मकान के सामने पहुँचे। ऊपर का बरामदा सघन लताओं से ढका था। कुछ देर बाद एक लड़के ने उँगली से इशारा किया: लता-प्रतान के बीच एक मूर्ति खड़ी थी, दोनों कंधों पर बाल बिखरे थे, एक हाथ खंभे पर था। देखते-ही-देखते वह ओझल हो गई। "बस, यही पहली झाँकी थी।"
4. हिंदी साहित्य की ओर बढ़ता झुकाव
उम्र के साथ नूतन हिंदी साहित्य की ओर झुकाव बढ़ता गया। भारत जीवन प्रेस की पुस्तकें घर आती थीं, पर पिताजी उन्हें छिपाकर रखने लगे ताकि बेटे का चित्त स्कूल की पढ़ाई से न हटे। लेखक पं. केदारनाथ पाठक के हिंदी पुस्तकालय से पुस्तकें ला-लाकर पढ़ता था। एक बार बारात के साथ काशी जाने पर चौखंभा में पाठक जी मिले और पता चला कि जिस मकान से वे निकले, वह भारतेंदु जी का घर था। लेखक भावुक होकर उसे देखता रहा। "भारतेंदु जी के मकान के नीचे का यह हृदय-परिचय बहुत शीघ्र गहरी मैत्री में परिणत हो गया।"
5. 'निस्संदेह' लोगों की मंडली
सोलह वर्ष की अवस्था तक समवयस्क हिंदी-प्रेमियों की मंडली बन गई: काशीप्रसाद जायसवाल, बा. भगवानदास हालना, पं. बदरीनाथ गौड़, पं. उमाशंकर द्विवेदी। ये लोग लिखने-पढ़ने की हिंदी में बात करते, जिसमें 'निस्संदेह' जैसे शब्द आते। उर्दू-भाषी वकीलों, मुख़्तारों और अमलों की बस्ती में यह बोली अनोखी लगती थी, इसलिए उन्होंने इस मंडली का नाम ही 'निस्संदेह' लोग रख दिया। एक मुसलमान सब-जज ने तो सूरत देखते ही कह दिया कि वे लेखक के हिंदी-प्रेम से "वाकिफ़" हो गए।
6. चौधरी साहब का व्यक्तित्व
अब लेखक एक लेखक की हैसियत से चौधरी साहब के यहाँ जाता था। मंडली उन्हें "एक पुरानी चीज़" समझती थी और "इस पुरातत्व की दृष्टि में प्रेम और कुतूहल का एक अद्भुत मिश्रण" रहता था। वे खासे हिंदुस्तानी रईस थे: वसंत पंचमी, होली पर नाच-रंग और उत्सव; कंधों तक लटकते बाल; पीछे पान की तश्तरी लिए छोटा लड़का; बातों में विलक्षण वक्रता; प्रश्नों से पहले अकसर "क्यों साहब"; बातचीत का ढंग लेखों से एकदम निराला।
7. रोचक प्रसंग
8. भाषा संबंधी मान्यताएँ
उपाध्याय जी 'नागरी' को भाषा मानते थे: नागर अपभ्रंश से विकसित शिष्ट भाषा ही नागरी है। वे 'मिर्ज़ापुर' के स्थान पर 'मीरजापुर' लिखते और इसका अर्थ 'लक्ष्मीपुर' करते: मीर (समुद्र) + जा (पुत्री) + पुर।
विषय और पात्र विश्लेषण
भाषा-शैली
बोर्ड परीक्षा फोकस
कठिन शब्द
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓'प्रेमघन की छाया-स्मृति' आचार्य रामचंद्र शुक्ल का संस्मरणात्मक निबंध है, जिसमें उनके हिंदी-प्रेम के आरंभ का चित्रण है।
- ✓पिताजी का साहित्य-प्रेम (रामचरितमानस, रामचंद्रिका, भारतेंदु के नाटक) लेखक के साहित्यिक संस्कार की पहली नींव था।
- ✓भारतेंदु के मित्र बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' की पहली झाँकी लताओं से ढके बरामदे में खंभे पर हाथ रखे, कंधों पर बाल बिखराए खड़ी मूर्ति के रूप में मिली।
- ✓सोलह वर्ष तक बनी समवयस्क हिंदी-प्रेमी मंडली को उर्दू-भाषी पड़ोसियों ने 'निस्संदेह' लोग कहना शुरू कर दिया।
- ✓चौधरी साहब का रईसी ठाठ, बातों की वक्रता, विनोदप्रियता और 'नागरी', 'मीरजापुर' जैसी भाषा संबंधी मान्यताएँ पाठ के मुख्य आकर्षण हैं।
👨🏫 Teaching Tips
- →कक्षा शुरू करने से पहले विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी रुचि (खेल, संगीत, पढ़ना) किसकी संगति से जागी; फिर बताएँ कि शुक्ल जी का हिंदी-प्रेम कैसे जागा।
- →'संस्मरण' विधा की पहचान कराएँ: लेखक स्वयं उपस्थित है, स्मृति पर आधारित है और किसी व्यक्ति का शब्द-चित्र है। इसे कहानी और जीवनी से अलग करें।
- →प्रेमघन की पहली झाँकी वाला अनुच्छेद ज़ोर से पढ़वाकर विद्यार्थियों से उसका चित्र बनवाएँ, ताकि चित्रात्मक भाषा समझ आए।
- →चार रोचक प्रसंगों (वामनाचार्य का कवित्त, एकादशी, घनचक्कर, लैम्प) को चार समूहों में बाँटकर छोटे अभिनय करवाएँ।
- →'निस्संदेह' प्रसंग के सहारे हिंदी-उर्दू संबंध पर संतुलित चर्चा कराएँ। यह भाषा-शिल्प का प्रश्न भी है।
- →भारतेंदु-मंडल के लेखकों (प्रेमघन, प्रतापनारायण मिश्र, बालकृष्ण भट्ट आदि) की सूची बनवाकर योग्यता-विस्तार का कार्य करवाएँ।
- →'मीरजापुर' की व्युत्पत्ति (मीर + जा + पुर) को ब्लैकबोर्ड पर तोड़कर दिखाएँ।
📋 Assessment Questions
- क्या विद्यार्थी प्रेमघन की पहली झलक का क्रमबद्ध वर्णन कर सकता है?
- क्या वह 'निस्संदेह' प्रसंग और सब-जज की टिप्पणी को सही संदर्भ में समझा सकता है?
- क्या वह चौधरी साहब के व्यक्तित्व के कम से कम चार पहलू पाठ के उदाहरणों सहित बता सकता है?
- क्या वह 'पुरातत्व की दृष्टि में प्रेम और कुतूहल' जैसे कथनों की सप्रसंग व्याख्या कर सकता है?
- क्या वह संस्मरण विधा की विशेषताएँ पाठ के उदाहरणों से स्पष्ट कर सकता है?
Ask the AI tutor about Class 12 Hindi Chapter 10
Get question answers, important questions, a quick MCQ quiz or a simple explanation of “रामचंद्र शुक्ल – प्रेमघन की छाया-स्मृति”. Free — sign in with Google.
- Explain रामचंद्र शुक्ल – प्रेमघन की छाया-स्मृति in simple words
- Answer the NCERT exercise questions of Class 12 Hindi Chapter 10 step by step
- Give me 5 important questions with answers from रामचंद्र शुक्ल – प्रेमघन की छाया-स्मृति
- Quiz me with 5 MCQs on रामचंद्र शुक्ल – प्रेमघन की छाया-स्मृति
- Make last-minute revision notes for Class 12 Hindi Chapter 10
- Explain रामचंद्र शुक्ल – प्रेमघन की छाया-स्मृति with an everyday example
👩🏫 Class 12 Hindi classes near you — online or at home
Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.
- Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
- Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
- At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.
Keep learning
- Maharashtra Board Class 12 SolutionsState board textbook solutions
- TalentJR FlashcardsQuick revision cards
- Coding for KidsLearn to code with TalentJR
All chapters in अंतरा भाग 2 (Antra) - Hindi Class 12
- 1. जयशंकर प्रसाद – देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
- 2. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – सरोज स्मृति
- 3. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' – यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
- 4. केदारनाथ सिंह – बनारस, दिशा
- 5. रघुवीर सहाय – वसंत आया, तोड़ो
- 6. तुलसीदास – भरत-राम का प्रेम, पद
- 7. मलिक मुहम्मद जायसी – बारहमासा
- 8. विद्यापति – पद
- 9. घनानंद – कवित्त
- 10. रामचंद्र शुक्ल – प्रेमघन की छाया-स्मृति
- 11. पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी – सुमिरिनी के मनके
- 12. फणीश्वरनाथ 'रेणु' – संवदिया
- 13. भीष्म साहनी – गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
- 14. असगर वजाहत – शेर, पहचान, चार हाथ, साझा
- 15. निर्मल वर्मा – जहाँ कोई वापसी नहीं
- 16. ममता कालिया – दूसरा देवदास
- 17. हजारी प्रसाद द्विवेदी – कुटज