फणीश्वरनाथ 'रेणु' – संवदिया – Class 12 Hindi Chapter 12 Notes & NCERT PDF
Notes and a simple summary of Chapter 12 of the NCERT Class 12 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.
🎧 Listen to the content
पाठ 12: फणीश्वरनाथ 'रेणु' – संवदिया
परिचय
'संवदिया' फणीश्वरनाथ 'रेणु' की प्रसिद्ध आंचलिक कहानी है। 'संवदिया' का अर्थ है संदेशवाहक, यानी वह व्यक्ति जो गाँव-गाँव जाकर लोगों का संवाद ज्यों-का-त्यों पहुँचाता है। कहानी में जलालगढ़ गाँव का संवदिया हरगोबिन बड़ी हवेली की विधवा बड़ी बहुरिया का दुख भरा संदेश उसके मायके ले जाता है, पर वहाँ पहुँचकर उसे सुना नहीं पाता। कहानी असहाय, सहनशील नारी के दुख, संयुक्त परिवार के बिखराव और गाँव की आत्मीयता का मार्मिक चित्र है। पाठ-परिचय के शब्दों में, लोकभाषा की नींव पर खड़ी यह कहानी "पहाड़ी झरने की तरह गतिमान" है।
लेखक परिचय
पाठ का सार
1. हरगोबिन की बुलाहट
डाकघर के ज़माने में भी संवदिया की ज़रूरत पड़ी, इस पर हरगोबिन को अचरज हुआ। उसने अंदाज़ लगाया कि कोई गुप्त संवाद है, जिसे "चाँद-सूरज को भी नहीं मालूम हो। परेवा-पंछी तक न जाने।"
2. बड़ी हवेली की दशा
बड़ी हवेली "अब नाममात्र को ही बड़ी हवेली है।" कभी वहाँ नौकर-नौकरानियों की भीड़ रहती थी; आज बड़ी बहुरिया स्वयं सूप में अनाज फटक रही है। बड़े भैया की एक घंटे की बीमारी में मृत्यु के बाद तीनों देवरों में झगड़ा हुआ, रैयतों ने ज़मीन दबा ली और भाई शहर जा बसे। बँटवारे में बड़ी बहुरिया की देह से ज़ेवर छीने गए, बनारसी साड़ी के तीन टुकड़े किए गए। हरगोबिन ने "अपनी आँखों से द्रौपदी चीर-हरण लीला" देखी थी।
3. मोदिआइन प्रसंग
उधार का तगादा करने बैठी मोदिआइन को हरगोबिन ने "काबुली-कायदा" कहकर छेड़ा। पाँच साल पहले गुल मुहम्मद आगा उधार कपड़ा बेचता था और वसूली में एक का दो लेता था; लोगों ने उसकी मरम्मत कर दी थी। तब से मोदिआइन 'काबुली' नाम से चिढ़ती है। यह प्रसंग हास्य के साथ बड़ी बहुरिया की कर्ज़दारी भी दिखाता है।
4. बड़ी बहुरिया का संवाद
सिसकते हुए बड़ी बहुरिया ने कहा कि माँ से कहना: वह भाई-भाभियों की नौकरी करके, बच्चों की जूठन खाकर एक कोने में पड़ी रहेगी, पर यहाँ नहीं रहेगी; माँ न ले गई तो "गले में घड़ा बाँधकर पोखरे में डूब मरूँगी"; "बथुआ-साग खाकर कब तक जीऊँ? किसलिए... किसके लिए?" देवर-देवरानियाँ केवल अगहनी धान और आम के मौसम में आकर अनाज-आम ले जाते हैं। बड़ी बहुरिया ने राह-खर्च के लिए पाँच रुपए का एक गंदा नोट दिया, पर हरगोबिन ने नहीं लिया।
5. संवदिया का धर्म
संवाद का हर शब्द याद रखना और उसी सुर-स्वर में सुनाना "सहज काम नहीं।" गाँव वाले संवदिया को निठल्ला, कामचोर, पेटू और "औरतों का गुलाम" समझते हैं ("न आगे नाथ, न पीछे पगहा"), पर हरगोबिन ने गाँव की हर माँ-बहू-बेटी का संवाद पहुँचाया है। ऐसा संवाद वह पहली बार ले जा रहा था।
6. यात्रा और मन का द्वंद्व
रेलगाड़ी में संवाद के शब्द "काँटे की तरह" चुभते रहे। कटिहार में भोंपे की घोषणा सुनकर उसे लगा कि "सचमुच सुराज हुआ है।" थाना बिंहपुर पहुँचकर उसके पैर गाँव की ओर बढ़ ही नहीं रहे थे: "गाँव की लक्ष्मी ही गाँव छोड़कर जावेगी!" लोग उसके गाँव का नाम लेकर थूकेंगे।
7. मायके में झूठ
बूढ़ी माता के पूछने पर हरगोबिन ने कहा कि कोई संवाद नहीं है; वह सिरसिया आया था, इसलिए दर्शन करने चला आया। उसने यह भी गढ़ दिया कि बड़ी बहुरिया दशहरे पर गंगाजी के मेले में आकर मिलेगी और सारी गृहस्थी उसी पर है। थाली में दाल-भात, तीन किस्म की भाजी, घी, पापड़ और अचार देखकर उसे बथुआ-साग खाती बड़ी बहुरिया याद आई और वह खा नहीं सका। रातभर नींद नहीं आई। सुबह सच बताने का निश्चय किया, पर फिर भी नहीं कह सका और लौटने की अनुमति माँगी। माँ ने बेटी के लिए बासमती धान का चूड़ा भेजा।
8. बीस कोस की पैदल यात्रा
पैसे केवल कटिहार तक के टिकट के थे। रास्ते में निरगुन गाने वाले सूरदास के गीत ("भाई रोओ मति, यही करम की गति") से उसका मन स्थिर हुआ। कटिहार से जलालगढ़ बीस कोस वह भूखा-प्यासा पैदल चला। चूड़े की पोटली से उसने एक मुट्ठी भी नहीं खाई। अंत में वह बेहोश होकर गिर पड़ा।
9. अंत: संकल्प
होश आने पर उसने बड़ी बहुरिया के पैर पकड़ लिए: "मुझे माफ़ करो। मैं तुम्हारा संवाद नहीं कह सका... तुम गाँव छोड़कर मत जाओ... मैं तुम्हारा बेटा! ... तुम मेरी माँ, सारे गाँव की माँ हो! मैं अब निठल्ला बैठा नहीं रहूँगा।" बड़ी बहुरिया गरम दूध में बासमती चूड़ा मसकने लगी; संवाद भेजने के बाद से ही वह अपनी गलती पर पछता रही थी।
पात्र-विश्लेषण
भाषा-शैली
बोर्ड परीक्षा फोकस
कठिन शब्द
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓'संवदिया' रेणु की आंचलिक कहानी है, जिसमें संदेशवाहक हरगोबिन विधवा बड़ी बहुरिया का दुख भरा संवाद उसके मायके ले जाता है।
- ✓बड़े भैया की मृत्यु, भाइयों के झगड़े और बँटवारे ने बड़ी हवेली को 'नाममात्र की' बना दिया; बड़ी बहुरिया बथुआ-साग खाकर जी रही है।
- ✓गाँव की लक्ष्मी को गाँव छोड़ते देखने और गाँव की बदनामी के डर से हरगोबिन मायके में संवाद नहीं सुना पाता और झूठ बोल देता है।
- ✓टिकट के पैसे न होने पर वह कटिहार से जलालगढ़ बीस कोस भूखा-प्यासा पैदल चलता है और बेहोश हो जाता है।
- ✓अंत में वह बड़ी बहुरिया को 'सारे गाँव की माँ' कहकर उनकी सेवा का संकल्प लेता है; कहानी गाँव की आत्मीयता और मानवीय संवेदना का चित्र है।
👨🏫 Teaching Tips
- →शुरुआत में पूछें कि मोबाइल-डाक से पहले संदेश कैसे पहुँचते थे; फिर 'संवदिया' शब्द और उसकी भूमिका समझाएँ।
- →कहानी को तीन दृश्यों (हवेली, मायका, वापसी-यात्रा) में बाँटकर पढ़ाएँ और हर दृश्य में हरगोबिन की मनःस्थिति बोर्ड पर लिखें।
- →बड़ी बहुरिया के संवाद और हरगोबिन के झूठ वाले अंश का नाट्य-पाठ कराएँ (योग्यता-विस्तार में नाट्य रूपांतरण भी सुझाया गया है)।
- →आंचलिक शब्दों की एक सूची बनवाकर उनके मानक हिंदी रूप लिखवाएँ; रेणु की आंचलिकता की विशेषता स्पष्ट करें।
- →नैतिक चर्चा कराएँ: क्या हरगोबिन का झूठ उचित था? विद्यार्थियों से तर्क सहित पक्ष-विपक्ष रखवाएँ।
- →अंतिम बेहोशी वाले अनुच्छेद से बिंब और चेतना-प्रवाह शैली समझाएँ।
- →प्रश्नवाचक वाक्य छाँटने (भाषा-शिल्प प्रश्न 2) का अभ्यास कक्षा में ही करा दें।
📋 Assessment Questions
- क्या विद्यार्थी बता सकता है कि हरगोबिन संवाद क्यों नहीं सुना सका, और कम से कम तीन कारण दे सकता है?
- क्या वह संवदिया की विशेषताओं और गाँववालों की धारणा में अंतर स्पष्ट कर सकता है?
- क्या वह बड़ी हवेली के पतन का क्रम और बड़ी बहुरिया की विवशता पाठ के उदाहरणों से लिख सकता है?
- क्या वह 'द्रौपदी का चीरहरण', 'बथुआ साग खाकर कब तक जीऊँ' जैसी पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या कर सकता है?
- क्या वह कहानी की आंचलिक भाषा और लोकगीतों की भूमिका पर टिप्पणी कर सकता है?
Ask the AI tutor about Class 12 Hindi Chapter 12
Get question answers, important questions, a quick MCQ quiz or a simple explanation of “फणीश्वरनाथ 'रेणु' – संवदिया”. Free — sign in with Google.
- Explain फणीश्वरनाथ 'रेणु' – संवदिया in simple words
- Answer the NCERT exercise questions of Class 12 Hindi Chapter 12 step by step
- Give me 5 important questions with answers from फणीश्वरनाथ 'रेणु' – संवदिया
- Quiz me with 5 MCQs on फणीश्वरनाथ 'रेणु' – संवदिया
- Make last-minute revision notes for Class 12 Hindi Chapter 12
- Explain फणीश्वरनाथ 'रेणु' – संवदिया with an everyday example
👩🏫 Class 12 Hindi classes near you — online or at home
Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.
- Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
- Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
- At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.
Keep learning
- Maharashtra Board Class 12 SolutionsState board textbook solutions
- TalentJR FlashcardsQuick revision cards
- Coding for KidsLearn to code with TalentJR
All chapters in अंतरा भाग 2 (Antra) - Hindi Class 12
- 1. जयशंकर प्रसाद – देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
- 2. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – सरोज स्मृति
- 3. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' – यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
- 4. केदारनाथ सिंह – बनारस, दिशा
- 5. रघुवीर सहाय – वसंत आया, तोड़ो
- 6. तुलसीदास – भरत-राम का प्रेम, पद
- 7. मलिक मुहम्मद जायसी – बारहमासा
- 8. विद्यापति – पद
- 9. घनानंद – कवित्त
- 10. रामचंद्र शुक्ल – प्रेमघन की छाया-स्मृति
- 11. पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी – सुमिरिनी के मनके
- 12. फणीश्वरनाथ 'रेणु' – संवदिया
- 13. भीष्म साहनी – गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
- 14. असगर वजाहत – शेर, पहचान, चार हाथ, साझा
- 15. निर्मल वर्मा – जहाँ कोई वापसी नहीं
- 16. ममता कालिया – दूसरा देवदास
- 17. हजारी प्रसाद द्विवेदी – कुटज