TalentJR

भीष्म साहनी – गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात – Class 12 Hindi Chapter 13 Notes & NCERT PDF

Class 12HindiChapter 13NCERT book: अंतरा भाग 2 (Antra) - Hindi Class 12

Notes and a simple summary of Chapter 13 of the NCERT Class 12 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.

🎧 Listen to the content

पाठ 13: भीष्म साहनी – गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात

परिचय

'गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात' भीष्म साहनी की आत्मकथा आज के अतीत का एक अंश है और विधा की दृष्टि से संस्मरण है। इसमें लेखक ने किशोरावस्था से प्रौढ़ावस्था तक के तीन अनुभव स्मृति के आधार पर लिखे हैं: सेवाग्राम में गांधी जी का सान्निध्य, कश्मीर में जवाहरलाल नेहरू का साथ और ट्यूनिस में फ़िलिस्तीनी नेता यास्सेर अराफ़ात का आतिथ्य। तीनों शब्द-चित्रों में महान व्यक्तियों की सहजता, विनम्रता और मानवीयता झलकती है। साथ ही राष्ट्रीयता, देशप्रेम और अंतरराष्ट्रीय मैत्री जैसे मुद्दे भी उभरते हैं।

लेखक परिचय

  • जीवनकाल: भीष्म साहनी (सन् 1915–2003)। जन्म रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में।
  • शिक्षा: प्रारंभिक शिक्षा घर पर; स्कूल में उर्दू और अंग्रेज़ी; गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर से अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए.; पंजाब विश्वविद्यालय से पीएच.डी.।
  • कार्यक्षेत्र: विभाजन से पहले व्यापार और मानद अध्यापन; विभाजन के बाद पत्रकारिता और इप्टा नाटक मंडली में काम; मुंबई में बेरोज़गार भी रहे; अंबाला और खालसा कॉलेज, अमृतसर में अध्यापन; फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज में साहित्य का अध्यापन। लगभग सात वर्ष मास्को के विदेशी भाषा प्रकाशन गृह में अनुवादक रहे और लगभग दो दर्जन रूसी पुस्तकों का अनुवाद किया। लगभग ढाई वर्ष नयी कहानियाँ का संपादन किया। वे प्रगतिशील लेखक संघ और अफ़्रो-एशियाई लेखक संघ से जुड़े रहे।
  • प्रमुख कृतियाँ: कहानी-संग्रह: भाग्यरेखा, पहला पाठ, भटकती राख, पटरियाँ, वाङ्चू, शोभायात्रा, निशाचर, पाली, डायन; उपन्यास: झरोखे, कड़ियाँ, तमस, बसंती, मय्यादास की माड़ी, कुंतो, नीलू नीलिमा नीलोफ़र; नाटक: माधवी, हानूश, कबिरा खड़ा बज़ार में, मुआवज़े; बाल-कहानियाँ: गुलेल का खेल।
  • सम्मान: तमस पर साहित्य अकादमी पुरस्कार; हिंदी अकादमी, दिल्ली का शलाका सम्मान।
  • भाषा: उर्दू शब्दों से आत्मीयता, पंजाबी की सोंधी महक, छोटे-छोटे वाक्य और संवादों से ताज़गी।
  • पाठ का सार

    1. सेवाग्राम में गांधी जी (लगभग सन् 1938)

    लेखक के भाई बलराज सेवाग्राम में नयी तालीम पत्रिका के सह-संपादक थे। यह सन् 1938 के आसपास की बात है, जिस साल कांग्रेस का हरिपुरा अधिवेशन हुआ था। लेखक वर्धा स्टेशन से लगभग पाँच मील दूर सेवाग्राम इक्के-ताँगे से घुप्प अँधेरी कच्ची सड़क पर रात को पहुँचे।

  • पहली भेंट: गांधी जी ठीक सात बजे घूमने निकले; वे "हू-ब-हू" चित्रों जैसे लगे, कमर से लटकती घड़ी भी परिचित-सी लगी। बलराज सोते रह गए, इसलिए दोनों दौड़कर टोली से मिले। परिचय पर गांधी जी ने हँसकर कहा, "अच्छा। इसे भी घेर लिया।" साथ में डॉ. सुशीला नय्यर और निजी सचिव महादेव देसाई थे।
  • रावलपिंडी की याद: घबराए लेखक को बात सूझी कि गांधी जी बहुत पहले रावलपिंडी आए थे। गांधी जी की आँखों में चमक आई: "याद है। मैं कोहाट से रावलपिंडी गया था... मिस्टर जॉन कैसे हैं?" फिर बोले, "अरे, मैं उन दिनों कितना काम कर लेता था। कभी थकता ही नहीं था।" महादेव देसाई आश्रम के फाटक तक उस दौरे की यादें सुनाते रहे।
  • आश्रम का वातावरण: लेखक लगभग तीन सप्ताह रहे। प्रार्थना सभा में पालथी मारे बैठी कस्तूरबा "बिलकुल मेरी माँ जैसी" लगतीं। एक जापानी भिक्षु चीवर पहने, गाँग बजाते हुए आश्रम की मीलभर की प्रदक्षिणा करता और प्रार्थना के समय गांधी जी को प्रणाम कर बैठ जाता। वहाँ पृथ्वीसिंह आज़ाद (जो हथकड़ियों समेत भागती रेल से कूदकर निकल भागे थे और बरसों गुमनाम रहकर पढ़ाते रहे), मीरा बेन, ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान और राजेंद्र बाबू भी देखने को मिले।
  • रोगी बालक: दोपहर को खोखे में पंद्रह-एक साल का गाँव का लड़का हाथ-पैर पटकता चिल्ला रहा था, "बापू को बुलाओ, मैं मर जाऊँगा।" गांधी जी नंगे बदन पर खादी की हल्की चादर ओढ़े आए, फूले पेट पर हाथ फेरा और हँसकर बोले, "ईख पीता रहा है? इतनी ज़्यादा पी गया? तू तो पागल है!" उन्होंने उसे उँगली डालकर उल्टी करवाई, पीठ पर हाथ रखे झुके रहे और फिर लेटने को कहा। उनके चेहरे पर "लेशमात्र भी क्षोभ" नहीं था।
  • रोज़ का नियम: सड़क के सिरे की कुटिया में रहने वाले तपेदिक (दिक्) के रोगी का हालचाल गांधी जी रोज़ गुजराती में पूछते थे।
  • 2. कश्मीर में नेहरू जी

    नेहरू जी की कश्मीर यात्रा पर शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में झेलम नदी पर सातवें पुल से अमीराकदल तक नावों में शोभायात्रा निकली और दोनों किनारों पर हज़ारों कश्मीरी "अदम्य उत्साह" से स्वागत कर रहे थे। नेहरू जी लेखक के फुफेरे भाई के बँगले में ठहरे और लेखक देखभाल में हाथ बँटाने पहुँचे।

  • धर्म पर बहस और अनातोले फ़्रांस की कहानी: खाने की मेज़ पर शेख अब्दुल्ला, ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान, श्रीमती रामेश्वरी नेहरू और उनके पति थे। धर्म पर बहस में नेहरू जी तुनककर बोले, "मैं भी धर्म के बारे में कुछ जानता हूँ", फिर शांत होकर फ़्रांसीसी लेखक अनातोले फ़्रांस की कहानी सुनाई। पेरिस का एक गरीब, बूढ़ा होता बाज़ीगर (नट) क्रिसमस पर माता मरियम को भेंट देने के लिए कुछ नहीं रखता। खाली गिरजे में वह अपने करतब ही भेंट करता है। बड़ा पादरी इसे अपमान समझकर उसे लात मारने बढ़ता है, तभी मूर्ति से उतरकर माता मरियम हाँफते नट का पसीना अपने आँचल से पोंछने और सिर सहलाने लगती हैं। अर्थात सच्ची भक्ति वह है जो सच्चे मन से, अपनी सामर्थ्य भर अर्पित हो।
  • चरखा: रात देर तक चिट्ठियाँ लिखवाने के बाद भी सुबह नेहरू जी फ़र्श पर बैठे चरखा कात रहे थे।
  • अख़बार प्रसंग: लेखक ने "बचकाना-सी हरकत" में अख़बार पकड़े रखा, ताकि नेहरू जी माँगें और बातचीत हो जाए। नेहरू जी चुपचाप खड़े रहे, फिर धीरे से बोले, "आपने देख लिया हो तो क्या मैं एक नज़र देख सकता हूँ?" लेखक "पानी-पानी" हो गए। उस दिन नेहरू जी को पहलगाम जाना था।
  • 3. ट्यूनिस में यास्सेर अराफ़ात

    लेखक अफ़्रो-एशियाई लेखक संघ के कार्यकारी महामंत्री थे। ट्यूनीसिया की राजधानी ट्यूनिस में सम्मेलन था; भारतीय प्रतिनिधि मंडल में कमलेश्वर, जोगिंदरपाल, बालू राव, अब्दुल बिस्मिल्लाह आदि थे। संघ की पत्रिका लोटस का कार्यालय वहीं था; उसके प्रधान संपादक फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ एकाध वर्ष पहले चल बसे थे। ट्यूनिस में ही अराफ़ात के नेतृत्व में फ़िलिस्तीनी अस्थायी सरकार का सदरमुकाम था।

  • लोटस के संपादक लेखक और उनकी पत्नी को सदरमुकाम ले गए। संभवतः सुरक्षा कारणों से उन्होंने नहीं बताया कि उन्हें दिन के भोजन पर बुलाया गया है। स्वयं अराफ़ात बाहर आकर उन्हें अंदर ले गए, जिससे लेखक को झेंप हुई।
  • मेज़ पर पूरा भुना बकरा रखा था। अराफ़ात स्वयं फल छील-छीलकर खिलाते और शहद की चाय बनाते रहे; उनकी इंजीनियरिंग की शिक्षा, हवाई यात्राओं और शहद की उपयोगिता पर बातें हुईं।
  • भारत के नेताओं द्वारा फ़िलिस्तीन के प्रति साम्राज्यवादी शक्तियों के अन्याय की भर्त्सना और भारतीयों की सहानुभूति की चर्चा हुई। गांधी जी का ज़िक्र आने पर अराफ़ात बोले, "वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं। उतने ही आदरणीय जितने आपके लिए।"
  • भोजन से पहले लेखक गुसलखाने से निकले तो अराफ़ात स्वयं तौलिया लिए बाहर खड़े थे। यह आतिथ्य की पराकाष्ठा थी।
  • विषय-विश्लेषण

  • गांधी जी: सहज, विनोदी, स्मरणशक्ति प्रखर, सेवाभावी (रोगी बालक और तपेदिक रोगी), बिना क्षोभ के करुणा।
  • नेहरू जी: लोकप्रिय, विद्वान, अनुशासित (देर रात काम, सुबह चरखा), अत्यंत शिष्ट और विनम्र (अख़बार प्रसंग)।
  • अराफ़ात: विनम्र, आत्मीय मेज़बान; गांधी जी के प्रति अंतरराष्ट्रीय श्रद्धा के प्रतीक।
  • लेखक: संकोची, जिज्ञासु, बड़ों के सान्निध्य के लिए उत्सुक; अपनी झेंप को भी ईमानदारी से लिखते हैं।
  • साझा सूत्र: महानता सहजता और मानवीयता में है; भारत की विदेश नीति में फ़िलिस्तीन के प्रति सहानुभूति; गांधी का प्रभाव देश की सीमाओं से परे।
  • भाषा-शैली

  • आत्मकथात्मक प्रथम पुरुष शैली, संवादों से जीवंतता।
  • उर्दू-फ़ारसी शब्द (नज़रसानी, सदरमुकाम, इत्मीनान, गुसलखाना, तपाक) और मुहावरे (पानी-पानी होना, आँखें गाड़ना, पुलक उठना, घेर लेना, चल बसना)।
  • क्रिया-विशेषणों का सुंदर प्रयोग: तड़के, ऐन सात बजे, धीरे-धीरे, चुपचाप, सहसा।
  • हल्का आत्म-व्यंग्य ("बचकाना-सी हरकत", "मेरी झेंप का अंत नहीं था")।
  • बोर्ड परीक्षा फोकस

  • अख़बार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषता स्पष्ट होती है? उत्तर-रूपरेखा: लेखक का जानबूझकर अख़बार न देना; नेहरू जी का धैर्य से प्रतीक्षा करना; अत्यंत शिष्ट वाक्य; न क्रोध, न अधिकार-भाव; अतः विनम्रता, शालीनता और दूसरों का सम्मान।
  • रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यवहार: स्वयं दोपहर में आना, पेट पर हाथ फेरना, हँसते हुए स्नेहपूर्ण डाँट ('तू तो पागल है'), उल्टी करवाकर सहारा देना, लेटने की हिदायत; कोई क्षोभ नहीं। इससे सेवा, धैर्य और आत्मीयता झलकती है।
  • "वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं": गांधी जी का अहिंसक स्वतंत्रता संघर्ष दुनिया के शोषित-उपनिवेशित लोगों के लिए प्रेरणा; अराफ़ात की श्रद्धा; गांधी जी का अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व।
  • अन्य: लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गया; सेवाग्राम आने वाले लोग; कश्मीर में नेहरू जी का स्वागत; अराफ़ात के आतिथ्य की दो घटनाएँ; नेहरू जी की सुनाई कहानी अपने शब्दों में।
  • कठिन शब्द

  • प्रदक्षिणा: परिक्रमा
  • घुप्प: गहरा, घोर (अँधेरा)
  • झिंझोड़कर: पकड़कर ज़ोर से हिलाकर
  • पालथी: बैठने का एक आसन
  • चीवर: बौद्ध भिक्षुओं का ऊपरी वस्त्र
  • क्षोभ: रोष, असंतोष
  • रुग्ण: बीमार
  • दिक्: तपेदिक
  • लब्धप्रतिष्ठ: प्रतिष्ठा प्राप्त, प्रसिद्ध
  • अभ्यर्थना: प्रार्थना, पूजा
  • दत्तचित्त: एकाग्र
  • लरज़ना: काँपना
  • नज़रसानी: नज़र डालना, पुनरीक्षण
  • सदरमुकाम: मुख्यालय, राजधानी
  • पानी-पानी होना: बहुत शर्मिंदा होना
  • सामान्य भूलें

  • यह मान लेना कि लेखक गांधी जी से मिलने ही सेवाग्राम गए थे; वे अपने भाई बलराज के साथ कुछ दिन बिताने गए थे।
  • नेहरू जी की सुनाई कहानी को नेहरू जी की अपनी रचना बताना; वह अनातोले फ़्रांस की कहानी है।
  • अराफ़ात से भेंट का स्थान फ़िलिस्तीन लिखना; भेंट ट्यूनिस (ट्यूनीसिया) में फ़िलिस्तीनी अस्थायी सरकार के सदरमुकाम में हुई।
  • लोटस को अख़बार कहना; यह अफ़्रो-एशियाई लेखक संघ की पत्रिका थी।
  • सेवाग्राम में ठहरने की अवधि गलत लिखना: लगभग तीन सप्ताह।
  • 💡 Key Learning Points

    • ✓यह पाठ भीष्म साहनी की आत्मकथा 'आज के अतीत' का संस्मरणात्मक अंश है, जिसमें गांधी, नेहरू और अराफ़ात से जुड़े तीन अनुभव हैं।
    • ✓सेवाग्राम (लगभग 1938) में गांधी जी की सहजता, स्मरणशक्ति और सेवा-भाव प्रकट होते हैं: रावलपिंडी की याद, रोगी बालक की देखभाल, तपेदिक रोगी से रोज़ मिलना।
    • ✓कश्मीर में नेहरू जी की लोकप्रियता, अनातोले फ़्रांस की बाज़ीगर वाली कहानी, सुबह का चरखा और अख़बार प्रसंग उनकी विद्वत्ता और शिष्टता दिखाते हैं।
    • ✓ट्यूनिस में अराफ़ात का आत्मीय आतिथ्य (फल छीलकर खिलाना, शहद की चाय, तौलिया लिए खड़े रहना) अंतरराष्ट्रीय मैत्री का उदाहरण है।
    • ✓"वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं" से गांधी जी के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और भारत-फ़िलिस्तीन सहानुभूति का पता चलता है।

    👨‍🏫 Teaching Tips

    • →पाठ को तीन भागों (सेवाग्राम, कश्मीर, ट्यूनिस) में बाँटकर एक समय-रेखा और मानचित्र बनवाएँ (वर्धा-सेवाग्राम, श्रीनगर-पहलगाम, ट्यूनिस)।
    • →हर महापुरुष के लिए 'घटना → गुण' तालिका मौखिक रूप से बनवाएँ, जैसे रोगी बालक → सेवा-भाव, अख़बार → विनम्रता, तौलिया → आतिथ्य।
    • →अख़बार वाली घटना का छोटा अभिनय करवाएँ और पूछें कि नेहरू जी की जगह आप क्या करते।
    • →अनातोले फ़्रांस की कहानी विद्यार्थियों से अपने शब्दों में सुनवाएँ (भाषा-शिल्प प्रश्न 3) और 'सच्ची भक्ति' पर चर्चा कराएँ।
    • →पाठ से क्रिया-विशेषण छाँटने की गतिविधि कराएँ (तड़के, ऐन सात बजे, धीरे-धीरे, चुपचाप, सहसा)।
    • →भारत-फ़िलिस्तीन संबंध और गांधी जी के विश्वव्यापी प्रभाव पर संक्षिप्त पृष्ठभूमि दें, पर चर्चा को पाठ के तथ्यों पर केंद्रित रखें।
    • →'तमस' और 'मेरा भाई बलराज' पढ़ने की प्रेरणा दें (योग्यता-विस्तार)।

    📋 Assessment Questions

    1. क्या विद्यार्थी बता सकता है कि लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गए और वहाँ किन-किन से मिले?
    2. क्या वह रोगी बालक और अख़बार प्रसंग से क्रमशः गांधी जी और नेहरू जी के गुण स्पष्ट कर सकता है?
    3. क्या वह नेहरू जी द्वारा सुनाई गई कहानी का सार और उसका संदेश लिख सकता है?
    4. क्या वह अराफ़ात के आतिथ्य की दो घटनाएँ और उनके कथन का आशय बता सकता है?
    5. क्या वह संस्मरण की भाषा (मुहावरे, क्रिया-विशेषण, उर्दू शब्द) के उदाहरण दे सकता है?

    👩‍🏫 Class 12 Hindi classes near you — online or at home

    Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.

    • Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
    • Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
    • At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.

    Keep learning

    All chapters in अंतरा भाग 2 (Antra) - Hindi Class 12

    1. 1. जयशंकर प्रसाद – देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
    2. 2. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – सरोज स्मृति
    3. 3. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' – यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
    4. 4. केदारनाथ सिंह – बनारस, दिशा
    5. 5. रघुवीर सहाय – वसंत आया, तोड़ो
    6. 6. तुलसीदास – भरत-राम का प्रेम, पद
    7. 7. मलिक मुहम्मद जायसी – बारहमासा
    8. 8. विद्यापति – पद
    9. 9. घनानंद – कवित्त
    10. 10. रामचंद्र शुक्ल – प्रेमघन की छाया-स्मृति
    11. 11. पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी – सुमिरिनी के मनके
    12. 12. फणीश्वरनाथ 'रेणु' – संवदिया
    13. 13. भीष्म साहनी – गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
    14. 14. असगर वजाहत – शेर, पहचान, चार हाथ, साझा
    15. 15. निर्मल वर्मा – जहाँ कोई वापसी नहीं
    16. 16. ममता कालिया – दूसरा देवदास
    17. 17. हजारी प्रसाद द्विवेदी – कुटज