निर्मल वर्मा – जहाँ कोई वापसी नहीं – Class 12 Hindi Chapter 15 Notes & NCERT PDF
Notes and a simple summary of Chapter 15 of the NCERT Class 12 Hindi book, with the official chapter PDF, flashcards, an MCQ quiz and an AI tutor for your doubts.
🎧 Listen to the content
पाठ 15: निर्मल वर्मा – जहाँ कोई वापसी नहीं
परिचय
जहाँ कोई वापसी नहीं निर्मल वर्मा का यात्रा-वृत्तांत है, जो उनके संग्रह धुंध से उठती धुन से लिया गया है। पाठ के आरंभ में स्थान और वर्ष लिखा है — सिंगरौली, 1983। लेखक दिल्ली की संस्था 'लोकायन' की ओर से सिंगरौली गए थे, ताकि देख सकें कि "विकास का यह 'उजला' पहलू" अपने पीछे कितना विनाश लेकर आया है। पाठ पर्यावरण-विनाश के साथ-साथ विस्थापन से उपजी मनुष्य की यातना को रेखांकित करता है। लेखक का मत है कि अंधाधुंध विकास और पर्यावरण-सुरक्षा के बीच संतुलन होना चाहिए, नहीं तो मनुष्य अपने समाज, संस्कृति और परिवेश से उखड़ता रहेगा।
लेखक परिचय
पाठ का सार
1. अमझर — जहाँ आम झरते हैं
जुलाई के अंत में, धान-रोपाई के महीने में लेखक सिंगरौली के नवागाँव क्षेत्र गए। पचास हज़ार से अधिक आबादी वाले इस क्षेत्र में लगभग अठारह छोटे गाँव हैं। उनमें एक है अमझर — "आम के पेड़ों से घिरा गाँव-जहाँ आम झरते हैं"। पर दो-तीन वर्षों से पेड़ों पर सूनापन है — "न कोई फल पकता है, न कुछ नीचे झरता है"। जब से सरकारी घोषणा हुई कि अमरौली प्रोजेक्ट के अंतर्गत नवागाँव के अनेक गाँव उजाड़ दिए जाएँगे, तब से आम के पेड़ सूखने लगे। लेखक पूछते हैं: "आदमी उजड़ेगा, तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?" टिहरी गढ़वाल में पेड़ों को बचाने के लिए मनुष्य के संघर्ष की कहानियाँ थीं, पर यहाँ पेड़ मनुष्य के विस्थापन के विरोध में "मूक सत्याग्रह" करते दिखे।
2. विस्थापन से पहले का जीवन
लेखक ने शहरों की गंदी, दम घुटती मज़दूर बस्तियों और स्लम्स में विस्थापितों का जीवन देखा था, पर विस्थापन से पहले का उनका "स्वच्छ, पवित्र खुलापन" पहली बार अमझर में देखा — घने पेड़, खप्पर वाले मिट्टी के झोंपड़े और चारों ओर पानी। बस की खिड़की से लगता है जैसे बाढ़ में सब डूब गया हो — "किंतु यह भ्रम है… यह बाढ़ नहीं, पानी में डूबे धान के खेत हैं।" औरतें एक पाँत में झुककर धान रोप रही हैं, सिर पर चटाई के किश्तीनुमा हैट हैं; आहट पाकर वे कान्हा की युवा हिरणियों की तरह चौंककर देखती हैं, फिर मुसकुराकर काम में लग जाती हैं। लेखक की पीड़ा है कि आने वाले वर्षों में यह सब एक गंदी "आधुनिक" औद्योगिक कॉलोनी की ईंटों के नीचे दब जाएगा और ये औरतें शहरों की सड़कों पर पत्थर कूटती दिखेंगी; उनके बच्चों को पता भी नहीं होगा कि "उनके पुरखों का गाँव था-जहाँ आम झरा करते थे।"
3. नए शरणार्थी — प्रकृति और इतिहास का अंतर
लेखक इन्हें "आधुनिक भारत के नए 'शरणार्थी'" कहते हैं, जिन्हें औद्योगीकरण के झंझावात ने हमेशा के लिए निर्वासित कर दिया। बाढ़ या भूकंप (प्रकृति) से उजड़े लोग आफ़त टलने पर लौट आते हैं, पर विकास और प्रगति के नाम पर इतिहास जब लोगों को उन्मूलित करता है, तो वे कभी नहीं लौट सकते — इसीलिए शीर्षक है "जहाँ कोई वापसी नहीं"।
4. सिंगरौली — बैकुंठ, काला पानी और अभिशाप बनी संपदा
सिंगरौली की भूमि उर्वर और जंगल समृद्ध हैं; सदियों से वनवासी और किसान इन्हीं से जीते आए। सन् 1926 से पहले यहाँ खैरवार जाति के आदिवासी राजा राज करते थे, बाद में आधा हिस्सा रीवाँ राज्य में मिला। विंध्याचल और कैमूर के पहाड़ों-जंगलों में कत्था, महुआ, बाँस और शीशम उगते थे। दंतकथा के अनुसार नाम 'शृंगावली' पर्वतमाला से निकला। यातायात कठिन होने से यह सुंदर इलाका "काला पानी" माना जाता था।
पर "कभी-कभी किसी इलाके की संपदा ही उसका अभिशाप बन जाती है।" अपार खनिज संपदा पर सत्ताधारियों और उद्योगपतियों की नज़र पड़ी। पहले रिहंद बाँध से हज़ारों गाँव उजड़े; फिर सेंट्रल कोल फ़ील्ड और नेशनल सुपर थर्मल पावर कॉरपोरेशन बने, कोयला खदानें और ताप विद्युत गृह फैल गए। जैसे शिकार पर गिद्ध-चीलें मँडराती हैं, वैसे ठेकेदारों, वन-अधिकारियों और सरकारी कारिंदों का आक्रमण हुआ।
5. भारत की ट्रेजेडी — विकास का पश्चिमी मॉडल
लेखक को भ्रम नहीं था कि औद्योगीकरण का चक्का रोका जा सकता है। पर भारत के पास दूसरा विकल्प था, क्योंकि अंग्रेज़ी राज भारत को पूरी तरह अपनी "सांस्कृतिक कॉलोनी" नहीं बना पाया था। भारत की विरासत संग्रहालयों में नहीं, मनुष्य को धरती, जंगल, नदियों से जोड़ने वाले रिश्तों में जीवित थी — "अतीत का समूचा मिथक संसार पोथियों में नहीं, इन रिश्तों की अदृश्य लिपि में मौजूद रहता था।"
स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह नहीं कि औद्योगीकरण चुना गया, बल्कि यह कि पश्चिम की नकल में योजनाएँ बनाते समय प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के नाज़ुक संतुलन पर पश्चिम-शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान नहीं गया; अपनी शर्तों पर विकास का भारतीय स्वरूप तय करने का खयाल ही नहीं आया।
विषय विश्लेषण
भाषा-शैली
बोर्ड परीक्षा फोकस
प्रश्न 1: प्रकृति के कारण विस्थापन और औद्योगीकरण के कारण विस्थापन में क्या अंतर है?
उत्तर-रूपरेखा: बाढ़-भूकंप अस्थायी → आफ़त टलने पर लोग परिचित परिवेश में लौट आते हैं → औद्योगीकरण स्थायी → गाँव, खेत, पेड़ ही मिट जाते हैं → "जहाँ कोई वापसी नहीं"।
प्रश्न 2: यूरोप और भारत की पर्यावरण संबंधी चिंताएँ कैसे भिन्न हैं?
उत्तर-रूपरेखा: यूरोप — मनुष्य और भूगोल का संतुलन → भारत — मनुष्य और संस्कृति का पारंपरिक संबंध → भारत की विरासत संग्रहालयों में नहीं, धरती-जंगल-नदियों के रिश्तों में।
प्रश्न 3: "आदमी उजड़ेंगे तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?" का आशय।
उत्तर-रूपरेखा: अमझर के आम के पेड़ प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद सूखने लगे → मनुष्य और प्रकृति का अटूट संबंध → पेड़ों का "मूक सत्याग्रह"।
कठिन शब्द
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓'जहाँ कोई वापसी नहीं' 'धुंध से उठती धुन' से लिया गया यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें सिंगरौली (1983) में औद्योगीकरण से होने वाले विस्थापन का चित्रण है।
- ✓अमझर गाँव के आम के पेड़ अमरौली प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद सूखने लगे — लेखक इसे पेड़ों का 'मूक सत्याग्रह' कहते हैं।
- ✓प्राकृतिक आपदा से उजड़े लोग लौट आते हैं, पर विकास के नाम पर उजड़े 'नए शरणार्थी' कभी नहीं लौट पाते।
- ✓यूरोप में पर्यावरण का प्रश्न मनुष्य-भूगोल संतुलन का है, भारत में मनुष्य और संस्कृति के पारंपरिक संबंध का।
- ✓स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी पश्चिम की नकल में प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के नाज़ुक संतुलन की अनदेखी है।
👨🏫 Teaching Tips
- →मानचित्र पर सिंगरौली (उ.प्र.–म.प्र. सीमा), रिहंद बाँध, विंध्याचल और कैमूर दिखाकर पाठ आरंभ करें।
- →'यात्रा-वृत्तांत' विधा की विशेषताएँ (स्थान-काल, प्रत्यक्ष अनुभव, लेखक की टिप्पणी) पहले स्पष्ट करें।
- →'प्रकृति बनाम इतिहास' के अंतर को दो कॉलम में बोर्ड पर लिखवाकर समझाएँ।
- →नर्मदा, टिहरी जैसे विस्थापन-प्रसंगों पर समाचार-कतरनें लाकर चर्चा कराएँ।
- →'संपदा ही अभिशाप' और 'रिश्तों की अदृश्य लिपि' जैसे सूत्र-वाक्यों का भाव-सौंदर्य लिखने का अभ्यास कराएँ।
- →योग्यता-विस्तार के अनुसार अपने क्षेत्र की पर्यावरण समस्या पर छोटी रिपोर्ट तैयार कराएँ।
- →'किंतु यह भ्रम है… डूब जाती हैं' गद्यांश को भूतकाल में बदलने का भाषा-अभ्यास कराएँ।
📋 Assessment Questions
- क्या विद्यार्थी अमझर का अर्थ और वहाँ के सूनेपन का कारण बता सकता है?
- क्या वह 'नए शरणार्थी' और प्राकृतिक/औद्योगिक विस्थापन का अंतर स्पष्ट कर सकता है?
- क्या वह यूरोप और भारत की पर्यावरण-चिंता का अंतर लिख सकता है?
- क्या वह लेखक के अनुसार स्वातंत्र्योत्तर भारत की 'ट्रेजेडी' स्पष्ट कर सकता है?
- क्या वह पाठ की सूत्रात्मक पंक्तियों का भाव-सौंदर्य लिख सकता है?
Ask the AI tutor about Class 12 Hindi Chapter 15
Get question answers, important questions, a quick MCQ quiz or a simple explanation of “निर्मल वर्मा – जहाँ कोई वापसी नहीं”. Free — sign in with Google.
- Explain निर्मल वर्मा – जहाँ कोई वापसी नहीं in simple words
- Answer the NCERT exercise questions of Class 12 Hindi Chapter 15 step by step
- Give me 5 important questions with answers from निर्मल वर्मा – जहाँ कोई वापसी नहीं
- Quiz me with 5 MCQs on निर्मल वर्मा – जहाँ कोई वापसी नहीं
- Make last-minute revision notes for Class 12 Hindi Chapter 15
- Explain निर्मल वर्मा – जहाँ कोई वापसी नहीं with an everyday example
👩🏫 Class 12 Hindi classes near you — online or at home
Prefer a real teacher? TalentJR teachers take live online classes anywhere in India and visit homes in selected cities. Tell us what you need and our team will call you with timings and fees.
- Live online classesSmall groups or 1:1 with a teacher, from home, any city.
- Teacher at homeA TalentJR teacher visits your home (selected cities).
- At a centreClasses at a TalentJR partner centre near you, where available.
Keep learning
- Maharashtra Board Class 12 SolutionsState board textbook solutions
- TalentJR FlashcardsQuick revision cards
- Coding for KidsLearn to code with TalentJR
All chapters in अंतरा भाग 2 (Antra) - Hindi Class 12
- 1. जयशंकर प्रसाद – देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
- 2. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – सरोज स्मृति
- 3. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' – यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
- 4. केदारनाथ सिंह – बनारस, दिशा
- 5. रघुवीर सहाय – वसंत आया, तोड़ो
- 6. तुलसीदास – भरत-राम का प्रेम, पद
- 7. मलिक मुहम्मद जायसी – बारहमासा
- 8. विद्यापति – पद
- 9. घनानंद – कवित्त
- 10. रामचंद्र शुक्ल – प्रेमघन की छाया-स्मृति
- 11. पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी – सुमिरिनी के मनके
- 12. फणीश्वरनाथ 'रेणु' – संवदिया
- 13. भीष्म साहनी – गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
- 14. असगर वजाहत – शेर, पहचान, चार हाथ, साझा
- 15. निर्मल वर्मा – जहाँ कोई वापसी नहीं
- 16. ममता कालिया – दूसरा देवदास
- 17. हजारी प्रसाद द्विवेदी – कुटज