परिशिष्टम् १: अन्वयः – Class 9 Sanskrit Chapter 12 Notes & NCERT PDF
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परिशिष्टम् १: अन्वयः (श्लोक के पदों को सही क्रम में लगाना)
परिचय
श्लोकों में कर्ता, कर्म, तृतीया आदि विभक्ति वाले पद, क्रियापद और विशेषण छन्द के अनुसार आगे-पीछे रखे जाते हैं। इसलिए पढ़ने वाले को पदों का आपसी सम्बन्ध (अन्वय) समझने में कठिनाई होती है। पदों का परस्पर सम्बन्ध सरल रूप में जानने की विधि ही अन्वय है — इसके बाद ही श्लोक का अर्थ समझ में आता है।
श्लोकान्वय की दो विधियाँ —
१. दण्डान्वयः (दण्डवत् अन्वयः)
आद्ये विशेषणं योज्यं विशेष्यं तदनन्तरम् ।
क्त्वा-णमुल्-ल्यप्-प्रभृत्येवं पूर्वं दण्डान्वये भवेत् ॥
(पहले विशेषण जोड़ें, फिर विशेष्य; क्त्वा, णमुल्, ल्यप् आदि प्रत्यय वाले पद भी पहले रखें।)
दण्डान्वय के नियम —
उदाहरण
शास्त्राण्यधीत्यापि भवन्ति मूर्खाः यस्तु क्रियावान् पुरुषः स विद्वान् ।
सुचिन्तितं चौषधमातुराणां न नाममात्रेण करोत्यरोगम् ॥
पदच्छेदः — शास्त्राणि, अधीत्य, अपि, भवन्ति, मूर्खाः, यः, तु, क्रियावान्, पुरुषः, सः, विद्वान्, सुचिन्तितं, च, औषधम्, आतुराणां, न, नाममात्रेण, करोति, अरोगम्।
दण्डान्वयः — (केचन) शास्त्राणि अधीत्यापि मूर्खाः भवन्ति । यः क्रियावान् सः पुरुषः तु विद्वान् (भवति) । (यथा) सुचिन्तितम् औषधं नाममात्रेण आतुराणाम् अरोगं न करोति ।
विवरण — श्लोक में 'केचन' (कुछ लोग) नहीं है, पर 'शास्त्र पढ़कर भी कौन मूर्ख होते हैं?' — इस जिज्ञासा से 'केचन' जोड़ा गया। 'यस्तु क्रियावान् पुरुषस्स विद्वान्' में कोई क्रियापद नहीं, अतः 'भवति' जोड़ा। इसी प्रकार 'यथा' का भी अध्याहार किया गया।
(भावार्थ: शास्त्र पढ़कर भी कुछ लोग मूर्ख रहते हैं; जो उसे आचरण में लाता है, वही विद्वान् है — जैसे अच्छी तरह सोची हुई औषधि केवल नाम लेने से रोगी को नीरोग नहीं करती।)
शिक्षक की विधि — पहले पदच्छेद करें, फिर प्रत्येक पद को संख्या दें (१. शास्त्राणि, २. अधीत्य … १९. करोति) और छात्रों से क्रमशः पद जुड़वाकर अन्वय बनवाएँ।
२. खण्डान्वयः (खण्डशः अन्वयः)
कर्तृ-कर्म-क्रियास्तावच्छ्लोके योज्यास्ततः परम् ।
किमो रूपं पुरस्कृत्य तृतीयादीनि योजयेत् ॥
ल्यबन्तञ्च तुमुन्तञ्च क्त्वान्तं कर्मविभूषितम् ।
अन्वयस्थपदानाञ्च यथा लिङ्गविशेषणे ॥
यहाँ पूरे श्लोक का एक साथ अन्वय नहीं होता; प्रश्नोत्तर के माध्यम से पद-पद जोड़े जाते हैं, अन्त में पूरा अन्वय अपने-आप बन जाता है। प्रश्न सबसे पहले क्रियापद से पूछा जाता है (जैसे — 'सा विद्यालयं गच्छति' में क्रियापद क्या है? — 'गच्छति')। प्रश्न आकाङ्क्षा के अनुसार होते हैं, इसलिए इसे आकाङ्क्षाविधि भी कहते हैं। प्रश्न प्रायः दो, तीन या चार पदों वाले छोटे प्रश्न होते हैं।
अन्वय के चार सहकारी कारण
खण्डान्वय का उदाहरण
सम्पूर्णकुम्भो न करोति शब्दमर्धो घटो घोषमुपैति नूनम् ।
विद्वान् कुलीनो न करोति गर्वमल्पो जनो जल्पति साट्टहासम् ॥
अन्वयः — सम्पूर्णकुम्भः शब्दं न करोति । अर्धः घटः घोषं नूनम् उपैति । कुलीनः विद्वान् गर्वं न करोति । अल्पः जनः साट्टहासं जल्पति ।
(भावार्थ: भरा घड़ा आवाज़ नहीं करता, आधा घड़ा अवश्य छलकता है; कुलीन विद्वान् घमण्ड नहीं करता, ओछा व्यक्ति ठहाके लगाकर बकवास करता है।)
शब्दार्थ
अभ्यास-संकेत
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓अन्वय की आवश्यकता — छन्द के कारण श्लोक में पद आगे-पीछे रहते हैं
- ✓दण्डान्वय के नियम — कर्ता-कर्म-क्रिया, विशेषण पहले, क्रिया अन्त में, अध्याहार
- ✓खण्डान्वय — क्रियापद से आरम्भ करके आकाङ्क्षा-प्रश्नों द्वारा अन्वय
- ✓अन्वय के चार सहकारी कारण — आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्ति, तात्पर्य
- ✓दो उदाहरण-श्लोकों का पूर्ण अन्वय और भावार्थ
👨🏫 Teaching Tips
- →श्लोक के पदों को अलग-अलग पर्चियों पर लिखकर छात्रों से सही क्रम में लगवाएँ
- →पुस्तक की संख्या-विधि अपनाएँ — प्रत्येक पद को क्रमांक देकर अन्वय बनवाएँ
- →खण्डान्वय के लिए कक्षा को दो दल बनाकर एक दल से प्रश्न और दूसरे से उत्तर करवाएँ
- →योग्यता और आसत्ति को मज़ेदार अशुद्ध वाक्यों (जैसे 'गगने पुष्पं विकसति') से समझाएँ
- →अध्याहृत पदों को अलग रंग से बोर्ड पर लिखें
- →पाठ्यपुस्तक के किसी अन्य श्लोक पर दोनों विधियाँ लगाकर तुलना करवाएँ
📋 Assessment Questions
- किसी श्लोक का शुद्ध पदच्छेद कर सकता है?
- दण्डान्वय के नियमों के अनुसार पदों को क्रम में रख सकता है?
- खण्डान्वय के लिए क्रियापद से आरम्भ करके प्रश्न बना सकता है?
- आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्ति, तात्पर्य को उदाहरण सहित बता सकता है?
- अध्याहार कहाँ और क्यों आवश्यक है, समझा सकता है?
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