आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः – Class 9 Sanskrit Chapter 3 Notes & NCERT PDF
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पाठ 3: आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः (जो सब प्राणियों को अपने समान देखे, वही पण्डित)
पाठ-परिचय
'आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः' (जो सब प्राणियों को अपने समान देखता है, वही पण्डित है) एक संवादात्मक कथा है। भारत ब्रह्मर्षियों और महात्माओं की भूमि है, जिनके जीवन में भूतदया, समता, क्षमा, अहिंसा, करुणा, ऋजुता और बन्धुता जैसे जीवन-मूल्य मिलते हैं। महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत नामदेव महाराज ने सब जीवों में भगवान को देखा। यह पाठ उनके जीवन की एक शिक्षाप्रद घटना सुनाता है।
पात्र: कपिल और माधवी (भाई-बहन), मातामही (नानी), तथा कथा में संत नामदेव, उनके गुरु विसोबा और भगवान पाण्डुरङ्ग।
पाठ-सार
आरम्भ — बच्चों की शरारत
छुट्टियों में कपिल और माधवी मामा के घर (मातुलगृहं) गए। खेलते समय उन्होंने एक कुत्ते (शुनकः) को देखा और पत्थर उठाकर उसे मारने दौड़े। कुत्ता डर से चिल्लाता भागा और दोनों हँसने लगे। नानी ने यह दूर से देखा और उन्हें बुलाया। कपिल ने कहा — "वह कुत्ता हमारे खेल में बीच-बीच में आकर हमें सताता था, इसलिए हमने उसे दण्ड दिया।" नानी बोलीं — "अलं क्रीडया।" (खेल बस करो) और कथा सुनाने लगीं।
नामदेव और पाण्डुरङ्ग
माधवी ने सुना था कि नामदेव के कीर्तन में स्वयं पाण्डुरङ्ग नाचते थे। नानी ने बताया कि नामदेव पाण्डुरङ्ग के प्रिय भक्त ही नहीं, प्रिय मित्र भी थे। वे रोज़ पाण्डुरङ्ग को नैवेद्य चढ़ाकर ही स्वयं भोजन करते थे। उनके गुरु विसोबा ने सिखाया था — "ईश्वर केवल मन्दिर में नहीं, सब प्राणियों में निवास करता है; अतः उस सर्वात्मक ईश्वर की पूजा करो।"
नैवेद्य और प्रार्थना
एक दिन नामदेव ने नैवेद्य की थाली मूर्ति के सामने रखी, आँखें बन्द करके प्रार्थना की:
नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे ह्यचलां कुरु ।
ईप्सितं मे वरं देहि परत्र च परां गतिम् ॥
अर्थ: हे देव! नैवेद्य ग्रहण करें, मेरी भक्ति को अचल (स्थिर) करें, मुझे मनचाहा वर दें और परलोक में उत्तम गति दें।
शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च ।
आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम् ॥
अर्थ: शक्कर, खाँड के खाद्य पदार्थ, दही, दूध, घी तथा भक्ष्य-भोज्य आहार वाला यह नैवेद्य स्वीकार करें।
आँखें खोलीं तो थाली से रोटी गायब थी। एक भूखा कुत्ता रोटी मुँह में लेकर भाग गया था।
करुणा की परीक्षा
कपिल और माधवी ने सोचा कि नामदेव लाठी (लगुडम्) या पत्थर लेकर कुत्ते को मारने दौड़े होंगे। पर नानी ने बताया — नामदेव क्रोध से नहीं, करुणा से दौड़े, और हाथ में घी का पात्र (घृतपात्रम्) लेकर। उन्हें चिन्ता थी कि सूखी रोटी खाने से कुत्ते के पेट में दर्द होगा। वे कहते जा रहे थे — "हे देव! सूखी रोटी मत खाइए, घी भी लीजिए!"
दौड़ता हुआ कुत्ता अदृश्य हो गया और उसकी जगह पाण्डुरङ्ग प्रकट हुए। उन्होंने कहा — "वत्स नामदेव! तुम परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। 'ईश्वर सब प्राणियों में रहता है' — यह गुरु-उपदेश तुमने केवल सुना नहीं, उसका पालन भी किया।"
बच्चों का संकल्प
कपिल ने क्षमा माँगी — "अकारण हि शुनकं ताडितवान्... कमपि न पीडयिष्यामि।" माधवी ने भी वचन दिया कि वह कभी किसी को पीड़ा नहीं देगी। नानी ने संकल्प कराया कि शरीर, वाणी या मन (कायेन वाचा मनसा) से किसी को पीड़ा न हो, और दूसरों की पीड़ा दूर करने का प्रयास करें:
‘आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः ।’
शब्दार्थ
व्याकरण-बिन्दु — उपपदविभक्तियाँ
किसी पास के पद के कारण जो विभक्ति लगती है, उसे उपपदविभक्ति कहते हैं।
क्तवतु प्रत्यय (भूतकाल): दृष्टवन्तौ, धावितवन्तौ, हसितवन्तौ (पुं. द्विवचन); दृष्टवती, आहूतवती (स्त्री.); कृतवान्, अनुधावितवान् (पुं. एकवचन)।
अभ्यास-संकेत
सामान्य भूलें
💡 Key Learning Points
- ✓संत नामदेव की कथा: ईश्वर सब प्राणियों में निवास करता है — गुरु विसोबा का उपदेश
- ✓क्रोध नहीं, करुणा — नामदेव घी का पात्र लेकर भूखे कुत्ते के पीछे दौड़े
- ✓नैवेद्य-प्रार्थना के दोनों श्लोकों का अर्थ
- ✓उपपदविभक्तियाँ: प्रति, धिक्, निकषा, परितः (द्वितीया); सह, साकम्, सार्धम्, समम्, अलम् (तृतीया); विना (द्वि./तृ./पं.)
- ✓क्तवतु प्रत्यय से भूतकाल के रूप (दृष्टवन्तौ, आहूतवती, कृतवान्)
👨🏫 Teaching Tips
- →पाठ को नाटक की तरह चार पात्रों (कपिल, माधवी, मातामही, कथावाचक) में पढ़वाएँ
- →कहानी के मोड़ पर रुककर पूछें — 'नामदेव क्या लेकर दौड़े होंगे?' — फिर उत्तर प्रकट करें
- →उपपदविभक्ति के 7 उपपदों के फ्लैश-कार्ड बनाकर 'विभक्ति पहचानो' खेल कराएँ
- →कक्षा में 'कायेन वाचा मनसा' संकल्प-पत्र बनवाएँ — किसी को पीड़ा न देने के तीन उदाहरण
- →पशु-पक्षियों के प्रति दया की स्थानीय घटनाएँ साझा करवाएँ
- →क्तवतु रूपों की लिङ्ग-वचन तालिका सूची के रूप में बोर्ड पर बनाएँ (कृतवान्/कृतवती/कृतवन्तौ)
📋 Assessment Questions
- क्या छात्र कथा की घटनाएँ सही क्रम में बता सकते हैं?
- क्या वे बता सकते हैं कि नामदेव घी का पात्र लेकर क्यों दौड़े?
- क्या वे सातों उपपदों के साथ सही विभक्ति लगा सकते हैं?
- क्या वे पाठ के शीर्षक-सूक्ति का अर्थ अपने जीवन से जोड़ सकते हैं?
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- 1. सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
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- 3. आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
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- 11. वर्णोच्चारण-शिक्षा २
- 12. परिशिष्टम् १: अन्वयः
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